220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन, देश के पहले डेडिकेटेड ट्रायल ट्रैक का 80 फीसदी काम पूरा
डीडवाना जिले के गुढ़ा से ठठाणा मीठड़ी के बीच 64 किमी लंबा रेल प्रोजेक्ट आकार ले रहा है. इसकी लागत 967 करोड़ रुपए है.

Published : September 5, 2025 at 8:20 PM IST
जयपुर: नमक उत्पादन के लिए देश-दुनिया में मशहूर सांभर झील के नाम अब एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है. देश का पहला डेडिकेटेड रेलवे ट्रायल ट्रैक सांभर झील के बीचों-बीच बनकर तैयार हो रहा है. यहां 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ेंगी. झील के बीच से गुजरने वाले इस ट्रैक की लंबाई करीब 64 किलोमीटर है. इस रास्ते पर चार स्टेशन भी बनाए गए हैं. फिलहाल, इस ट्रायल ट्रैक का निर्माण कार्य अपने आखिरी चरण में है, जल्द ही इस पर हाई-स्पीड ट्रेनों का ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 967 करोड़ रुपए है.
यह ट्रैक तैयार होने के बाद यहां बुलेट ट्रेन, मेट्रो और हाई-स्पीड ट्रेनों का ट्रायल किया जाएगा. बताया जा रहा है कि आजादी से पहले ब्रिटिश शासनकाल में इस इलाके में जयपुर-जोधपुर रूट के लिए रेलवे ट्रैक बिछाया गया था, लेकिन बाढ़ के कारण पटरियां मिट्टी में दब गई थी. जब ट्रायल ट्रैक प्रोजेक्ट की परिकल्पना की गई, तो रेलवे ने सैटेलाइट इमेज की मदद से इस पुराने ट्रैक को तलाशा और अब उसी जगह पर नए सिरे से 64 किलोमीटर लंबा ट्रैक बिछाया जा रहा है, जिसका काम अब अंतिम दौर में है.
देश का पहला अनूठा प्रोजेक्ट: उत्तर-पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशिकिरण ने बताया कि जोधपुर मंडल के गुढ़ा और ठठाणा मीठड़ी रेलवे स्टेशन के बीच हाई-स्पीड ट्रेनों का ट्रायल ट्रैक बन रहा है, जिसकी लंबाई 64 किलोमीटर है. इस ट्रायल ट्रैक में अलग-अलग स्ट्रक्चर जैसे पुल, अंडरब्रिज और ओवरब्रिज भी बनाए गए हैं. इन स्ट्रक्चर से बुलेट ट्रेन को गुजारकर उसकी स्पीड का ट्रायल किया जाएगा. यह देश का पहला डेडिकेटेड ट्रायल ट्रैक होगा.
137 अंडर और ओवरब्रिज होंगे: भविष्य में इस ट्रैक पर हाई-स्पीड, सेमी हाई-स्पीड और मेट्रो ट्रेन का ट्रायल भी हो सकेगा. ठठाणा मीठड़ी से गुढ़ा के बीच बन रहे इस ट्रैक पर मीठड़ी, नावां, जाबदीनगर और गुढ़ा में चार स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें मुख्य स्टेशन नावां सिटी रहेगा. इस ट्रैक पर 137 अंडर और ओवरब्रिज भी बनाए गए हैं. बुलेट ट्रेन के ट्रायल के लिए ट्रैक में कई तरह के एक्सपेरिमेंट भी किए गए हैं.

आजादी से पहले का है ट्रैक, जमीन में दबा था: उन्होंने बताया कि जिस जगह पर यह हाई-स्पीड डेडिकेटेड ट्रायल ट्रैक बनाया जा रहा है. वह कभी जयपुर-जोधपुर रेलवे ट्रैक का हिस्सा हुआ करता था. आजादी से पहले ब्रिटिशकाल में नमक के परिवहन के लिए झील के बीचों-बीच यह ट्रैक बिछाया गया था. बाद में बाढ़ की वजह से पटरियां डूब गईं और कुछ हिस्सा मिट्टी में दब गया, तो दूसरा ट्रैक बिछाया गया, जहां से आज जयपुर-जोधपुर के बीच ट्रेनों का संचालन हो रहा है. पुरानी पटरियां करीब 50 साल तक मिट्टी में दबी रहीं.
इस साल काम पूरा करने का लक्ष्य: जब ट्रायल ट्रैक के लिए जमीन तलाशी जा रही थी, तो इस इलाके का सैटेलाइट सर्वे किया गया. सैटेलाइट इमेज से मार्किंग करने के बाद कुछ हिस्सों से अतिक्रमण हटाने की कवायद की गई और आसपास के आठ गांवों से भी कुछ जमीन अधिग्रहित की गई. इसके बाद ट्रायल ट्रैक का काम शुरू किया गया, जो अब आखिरी चरण में है. उन्होंने बताया कि 64 किलोमीटर में से 52 किलोमीटर तक ट्रैक का काम पूरा हो चुका है, जो कुल परियोजना का 80 प्रतिशत है. इस साल इसका काम पूरा करने का लक्ष्य है.

यह हैं डेडिकेटेड ट्रायल ट्रैक की खासियत
- घुमावदार टेस्ट ट्रैक: 64 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक एकदम सीधा नहीं है, बल्कि इसमें कई घुमावदार पॉइंट बनाए गए हैं. इससे तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेन को तेज घुमाव पर बिना रफ्तार कम किए गुजारने का ट्रायल होगा.
- स्टील और RCC से बने पुल: इस ट्रैक पर स्टील और आरसीसी के पुल बने हैं, जो जमीन के नीचे और ऊपर भी हैं. इन पुलों को कंपनरोधी बनाने में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. ट्रायल के दौरान तेज रफ्तार का ओवरब्रिज और अंडरब्रिज पर असर भी देखा जाएगा.
- लूप और कर्व लाइन भी: हाई स्पीड डेडिकेटेड रेलवे ट्रैक 64 किलोमीटर लंबा है. इसमें 23 किलोमीटर लंबी मुख्य लाइन है. जबकि गुढ़ा में 13 किलोमीटर लंबा लूप है. रेलवे में लूप का इस्तेमाल क्रॉसिंग या फिर आमने-सामने से आ रही दो ट्रेनों को बिना रुकावट के गुजारने के लिए होता है.
- ट्विस्टी ट्रैक भी बिछाया: कई बार देखने में आता है कि खराब ट्रैक पर ट्रेन डगमगाने लगती है और झटके लगने लगते हैं. ऐसे में इस ट्रैक में करीब सात किलोमीटर लंबा ट्विस्टी ट्रैक भी शामिल है. इस पर ट्रायल कर यह पता लगाया जाएगा कि ट्रैक खराब हो तो अधिकतम कितनी गति पर ट्रैन को सुरक्षित निकाला जा सकता है.

