कांकेर में मानव पशु द्वंद की क्या है वजह, तीन साल में हुए हमलों में 11 मौतें, 70 घायल
कांकेर में मानव पशु द्वंद बढ़ रहा है. हर दूसरे दिन जंगली जानवर लोगों पर हमला कर रहे हैं.आईए जानते हैं इसकी बड़ी वजह.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 1, 2025 at 4:24 PM IST
कांकेर : छत्तीसगढ़ में इन दिनों मानव पशु द्वंद बढ़ रहा है.कहीं ग्रामीण हाथियों के हमले और फसल बर्बाद करने से परेशान हैं. तो कहीं तेंदुए और भालू ने इंसानों का जीना मुश्किल कर रखा है.वन विभाग लोगों को जंगली जानवरों से दूर रहने की चेतावनी तो देता है,लेकिन जिन लोगों का जीवन ही जंगल के भरोसे हैं वे क्या करें.उनके लिए जंगल के अंदर जाना और अपने जरुरत की वनोपज लाना मजबूरी है.क्योंकि बिना इसके दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होगी.और यही दो वक्त की रोटी कभी कभी भोले भाले ग्रामीणों के लिए काल का कारण बन जाती है.
कांकेर में भालुओं का हमला बढ़ा : बात यदि उत्तर बस्तर कांकेर की करें तो यहां पर आए दिन भालू आम लोगों पर हमला कर रहे हैं. गर्मी की शुरुआत में भालुओं का हमला सबसे ज्यादा बढ़ता है.आखिर क्या वजह है कि पहले की तुलना में अब भालू रहवासियों पर हमला कर रहे हैं.कांकेर में वन्यजीव और मानवों के बीच आए दिन संघर्ष हो रहा है.यहां के लोग भी हाथी,तेंदुए और भालू से परेशान हैं.इन हमलों में कई बार लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता है.
कांकेर में हर दूसरे दिन जंगली जानवर का हमला : कांकेर में तीन दिन पहले भालू के हमले से डिप्टी रेंजर की मौत हो गई थी. इस घटना में पिता पुत्र की भी जान गई थी. बीते माह राहगीर को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया था. स्थिति ये है कि कांकेर में हर दूसरे दिन भालू और तेंदुए के हमले की खबर लगातार समाने आ रही हैं. कांकेर के नागरिक अजय भासवानी और पप्पू मोटवानी के मुताबिक कांकेर पहाड़ों और जंगल से घिरा हुआ है.लेकिन जंगल में लगातार मानव का दखल बढ़ता जा रहा है.जंगली जानवरों पास जगह की कमी हो रही है.
फलदार पेड़ कम हो रहे हैं.जंगलों में पानी की सुविधा नही है. यही कारण है कि वन्यजीव शहर और आबादी वाले इलाके में पलायन करते हैं.उनका मानव के बीच संघर्ष होता है और इंसान अपनी जान गंवा रहा है. इन सब का जिम्मेदार वन विभाग है. जो पर्याप्त मात्रा में फलदार वृक्ष नहीं नहीं लगा रहे हैं, ना पानी की व्यवस्था कर रहे हैं- अजय भासवानी, नागरिक
वहीं नागरिक अजय मोटवानी की माने तो जंगल के अंदर जानवरों के लिए खाने का कोई प्रबंध नहीं है.फलदार वृक्षों की भी कमी है.ऊपर से जंगल के अंदर स्थानीय लोग आग लगा देते हैं.जिससे जंगली जानवर शहरों में घुसते हैं.
जंगल में कुछ लोग आग लगाते हैं.जिसके कारण आग फैल जाती है.आग फैलने के कारण जानवर अपनी जान बचाने के लिए शहरी इलाकों में घुस जाते हैं.आग के कारण जानवर अपनी जान बचाने की कोशिश में शहर की ओर आते हैं.जहां उनका सामना इंसानों से होता है- अजय मोटवानी, स्थानीय
अब तक कितने हुए हमले : वन विभाग की आंकड़ों की माने तो साल जनवरी 2022 से जनवरी 2025 तक 11 लोगों ने तेंदुए और भालू के हमले में अपनी जान गंवाई है. वहीं अब तक 70 से अधिक लोग भालू और तेंदुए के हमले से बुरी तरह घायल हो चुके हैं. डीएफओ आलोक वाजपेयी के मुताबिक कांकेर जिले में दो प्रजाति के तेंदुए और भालू रहवास के लिए अनुकूल हैं.इनकी संख्या भी बढ़ रही है.
छत्तीसगढ़ में बहुत सारे क्षेत्र वन आच्छादित है.बहुत से गांव एवं बसाहटों की सीमा वन क्षेत्र से सटे हुए हैं.इसी कारण द्वंद की स्थिति पैदा हो रही है. विभाग लगातार इसे रोकने की कोशिश की जा रही है- आलोक वाजपेयी, डीएफओ
वन विभाग के अपने दावे हैं. लेकिन जंगल में लगातार फलदार वृक्ष की कमी हो रही है. जिसके कारण जंगली भालू शहरों की ओर रुख कर रहे हैं. 2014 -15 में करोड़ों खर्च कर भालू रहवास क्षेत्र जामवंत परियोजना का शुरुआत की गई थी. लेकिन जिन जगहों पर फलदार पेड़ लगे वो सारे सूखकर मर गए.अब जंगल के अंदर खाना और पानी नहीं मिलने के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं.जिसका खामियाजा कहीं ना कहीं इंसान को ही भुगतना पड़ रहा है.
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