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साहिबगंज में ब्रेन मलेरिया के प्रकोप के बाद कितना तैयार है पड़ोसी जिला देवघर, जानें क्या कहते हैं सिविल सर्जन

ब्रेन मलेरिया के केस को लेकर देवघर जिला कितना तैयार है. इसको लेकर सिविल सर्जन ने अपनी बात ईटीवी भारत के साथ साझा की है.

How prepared Deoghar health department for brain malaria cases in district
देवघर सदर अस्पताल भवन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : March 28, 2025 at 4:13 PM IST

5 Min Read
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देवघरः झारखंड पहाड़ों और जंगलों का राज्य है. यहां पर एक तरफ स्वच्छ वातावरण मिलता है. वहीं दूसरी ओर पहाड़ों और जंगलों में बदलने वाले मौसम से लोगों को कई बीमारियों से भी सामना करना पड़ता है.

कुछ ऐसा ही बीमारी झारखंड राज्य के संथाल प्रमंडल के साहिबगंज जिले में देखने को मिला।साहेबगंज जिले के मंडरो प्रखंड में पिछले कुछ दिनों में ब्रेन मलेरिया नाम की बीमारी से छह बच्चों की मौत हो चुकी है. यह सूचना जैसे ही सरकार तक पहुंची सरकार के द्वारा इस पर संज्ञान लिया गया और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने रांची से टीम को भेज पूरे स्थिति की जानकारी ली.

जानकारी देते सिविल सर्जन (ETV Bharat)

टीम में डॉक्टर और कई स्वास्थ्य कर्मी शामिल है जो साहिबगंज जिला के मंडरो प्रखंड के विभिन्न गांव में लोगों का स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार अब तक एक सौ से ज्यादा लोग ब्रेन मलेरिया के शिकार हो चुके हैं. जिन्हें विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है.

संथाल परगना के साहेबगंज जिले में जहां ब्रेन मलेरिया से लोग परेशान है. वहीं संथाल परगना के ही दूसरे जिले में इस बीमारी से बचने के लिए क्या व्यवस्था की गई है. इस पर भी राज्य सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है. साहिबगंज से सटे जिला में पाकुड़, दुमका, गोड्डा, देवघर और जामताड़ा शामिल है. इन जिलों में देवघर जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से क्या कुछ तैयार है. इसकी जानकारी सिविल सर्जन ने दी.

देवघर में समुचित तैयारी

ब्रेन मलेरिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए ईटीवी भारत की टीम ने जब देवघर जिले के स्वास्थ्य अधिकारी सिविल सर्जन वाई. के. चौधरी से बात की. उन्होंने बताया कि पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को इस मौसम में इस तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. पहाड़ों पर समुचित रूप से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं पहुंच पाती है. इसलिए इस बीमारी में मरीजों की मौत भी हो जाती है.

सिविल सर्जन युगल के चौधरी ने बताया कि वर्तमान में ब्रेन मलेरिया के एक भी केस देवघर जिले में नहीं पाए गए हैं. लेकिन बगल का जिला होने के नाते उनके तरफ से सभी स्वास्थ्य पदाधिकारी को यह निर्देश दिया गया है कि अपने-अपने क्षेत्र के अस्पतालों में व्यवस्था को दुरुस्त रखें. इस तैयारी के साथ उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वर्तमान में सदर अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी अस्पताल बेड की कमी से जूझ रहे हैं. सदर अस्पताल में जहां तीन सौ बेड की आवश्यकता है वहां पर मात्र एक सौ बेड के भरोसे ही लोगों का इलाज हो रहा है.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि वर्तमान में मेडिकेटेड मच्छरदानी की भी कमी आ गई है. इसकी सूचना लिखित तौर पर राज्य सरकार को दी जाएगी ताकि जल्द से जल्द जिला में मेडिकेटेड मच्छरदानी की कमी को पूरा किया जा सके. बता दें कि सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मेडिकेटेड मच्छरदानी दिया जाता है ताकि मच्छरों से वह खुद की रक्षा कर सके.

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश

वहीं देवघर की स्वास्थ्य व्यवस्था एवं संथाल परगना के अन्य जिलों की तैयारी को लेकर हमने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से बात की. उन्होंने कहा कि 6 टीमों को साहिबगंज के मंडरो प्रखंड में लगाया गया है और यह जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है कि आखिर उन क्षेत्रों में ब्रेन मलेरिया क्यों पनप रहे हैं. उन्होंने बताया कि पूरे राज्य के सिविल सर्जनों के साथ उन्होंने बैठक कर यह दिशा निर्देश दिया है कि ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का सारा लाभ मिलना चाहिए.

उन्होंने बताया कि सभी सिविल सर्जनों के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया है. उन्हें यह निर्देश दिया गया है कि वैसे क्षेत्र में जाकर लोगों के स्वास्थ्य का जांच करें जहां पर साक्षरता दर काफी कम है. वहीं देवघर जिला को लेकर उन्होंने कहा कि जहां भी कमी-खामी है, उसे पूरा किया जाएगा. वह खुद एक डॉक्टर हैं और उन्हें पता है कि स्वास्थ्य सुविधा को कैसे मजबूत करना है.

बता दें कि देवघर संथाल क्षेत्र का सबसे बेहतर शहर माना जाता है. ऐसे में देवघर शहर में मौजूद सभी निजी और सरकारी अस्पतालो को सिविल सर्जन की तरफ से तैयार रहने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में मरीज को बेहतर इलाज मिल सके.

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