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हिमाचल का एक ऐसा मंदिर जहां सामने से नहीं है कोई दरवाजा, फिर कैसे होते हैं दर्शन

हिमाचल में कई देवी-देवताओं के मंदिर है. ये मंदिर अपनी अलग पहचान और रोचक इतिहास के लिए जाने जाते हैं.

माता टारना का मंदिर
माता टारना का मंदिर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : September 28, 2025 at 9:07 AM IST

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मंडी: हिमाचल के मंडी जिले को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है. यहां शिव के साथ साथ अन्य देवी देवताओं के भी मंदिर हैं. हर मंदिर का अपना इतिहास और रोचक कहानी है. मंडी के कई मंदिर सात से आठ सौ सालों का इतिहास अपने अंदर समेटे हुए हैं. शारदीय नवरात्रों में आज हम आपको मंडी में स्थित एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जहां सामने कोई दरवाजा ही नहीं है. ये एक ऐसा इकलौता मंदिर है जहां माता के सामने से नहीं साइड से दर्शन किए जाते हैं.

मंदिर में माता पिंडी स्वरूप में भक्तों को दर्शन देती हैं. इस मंदिर को टारना माता के नाम से जाना जाता है. टाराना पहाड़ी का नाम माता के नाम पर ही पड़ा है. इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा श्याम सेन ने करवाया था. आज ये मंदिर पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है. शिवरात्रि महोत्सव के दौरान बड़ा देव कमरूनाम इसी मंदिर में रुकते हैं.

16वी सदी में राजा श्याम सेन ने बनवाया था मंदिर (ETV Bharat)

'राजा का सपने में दिए दर्शन'

मंदिर निर्माण को लेकर अलग अलग कहानियां प्रचलित हैं. मंदिर के पुजारी हर्ष शर्मा ने बताया कि '16वीं शताब्दी में तत्कालीन मंडी के राजा श्याम सेन को इस पहाड़ी पर तीन कन्याएं दिखाई दी थीं, लेकिन जब राजा यहां पहुंचे तो आस पास कोई मौजूद नहीं था.बाद में राजा को सपने में माता ने दर्शन देकर यहां मंदिर बनवाने को कहा. खुदाई में माता की तीन पिंडी स्वरूप मूर्तियां मिलीं. इनमें महाकाली, महा-सरस्वती और महालक्ष्मी विराजमान हैं, जब राजा ने मंदिर बनवाया तो पहले सामने यानी पश्चिम दिशा की ओर ही दरवाजा होता था. सामने से दर्शन करने के बाद लोग मूर्छित होने लगे. माता ने फिर से सपने में दर्शन दिए और अपने तेज के बारे में बताकर दरवाजा साइड से बनाने को कहा.'

मंदिर पुजारी हर्ष शर्मा आगे बताते हैं कि 'माता के दोबारा सपने में आने के बाद राजा ने मंदिर की उत्तर दिशा की ओर से दरवाजा निकालवाया और तब से आज दिन तक इसी दिशा से माता के दर्शन किए जाते हैं. पश्चिम दिशा की ओर खुलने वाले दरवाजे को हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है. हालांकि मंदिर में स्थापित माता रानी के शेर की प्रतिमा की बात करें तो ये पिंडियों के ठीक सामने ही विराजमान है, जिस ओर से दरवाजे को बंद कर दिया गया है.'

मंदिर में साइड से है दरवाजा
मंदिर में साइड से है दरवाजा (ETV Bharat)

सुकेत पर विजय से पहले की आराधना

वहीं, कुछ लोगों का ये भी कहना है कि सुकेत के खिलाफ लड़ाई पर जाने से पहले राजा श्याम सेन ने यहां अराधना की और अपनी सेना को पड्डल मैदान में एकत्र कर खुद टारना माता के पास जाकर तलवार की धार से अपने अंगूठे से रक्त निकालकर तिलक किया और प्रतिज्ञा ली. इसके बाद सुकेत और मंडी के राज्यों के बीच बल्हघाटी के लोहारा मैदान में युद्ध हुआ, जहां मंडी की सेना की जीत हुई और सुकेत का राजा जीतसेन मैदान छोड़ कर भागने लगा, लेकिन मंडी के सैनिकों ने उसे पकड़ लिया. एक सैनिक तलवार से उसके गले पर वार करने लगा, तो श्याम सेन ने उसे रोक दिया और जीतसेन को छोड़ दिया. युद्ध जीतने के बाद श्याम सेन ने टारना की पहाड़ियों में श्यामाकाली के भव्य मंदिर के निर्माण के आदेश दिए.

श्यामाकाली के नाम से जानी जाती हैं माता टारना

बता दें कि इस मंदिर में तीन महादेवियों के रूप में विराजमान माता टारना को श्यामाकाली के नाम से भी जाना जाता है. टारना की पहाड़ी पर बने इस मंदिर में टारना माता की पिंडी पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर स्थापित हैं. मंदिर को लेकर मंडी जिले के साथ साथ पूरे प्रदेश के लोगों की इसमें आस्था. यहां हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं. नवरात्रों में यहां खासी भीड़ रहती है.

सामने से नहीं होते माता टारना के दर्शन
सामने से नहीं होते माता टारना के दर्शन (ETV Bharat)

क्यों पड़ा नाम टारना
स्थानीय निवासी महेंद्र पाल और जोगिंद्र शर्मा ने बताया कि 'माता सभी को तारने का काम करती है, इसलिए इसे टारना या फिर तारना माता भी कहते हैं. यहां वर्ष भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है. शिवरात्रि के दौरान मंडी जनपद के अराध्य देव कमरूनाग भी सिर्फ इसी मंदिर में विराजते हैं. उस दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी हो जाती है कि दर्शनों के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर बारी का इंतजार करना पड़ता है.'

16वी सदी में राजा श्याम सेन ने बनवाया था मंदिर
16वी सदी में राजा श्याम सेन ने बनवाया था मंदिर (ETV Bharat)

हिमाचल प्रदेश का कोई राज्यपाल, सीएम, मंत्री या नेता ऐसा नहीं है जो माता के इस दरबार में आकर नतमस्तक न हुआ हो. मंडी में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान जो भी वीवीआईपी मंडी आता है वो यहां के दर्शनों के लिए जरूर जाता है. छोटी काशी मंडी में जितने भी मंदिर हैं उसमें टारना माता मंदिर भी अपनी विशेषता के कारण प्रसिद्ध है. टारना मंदिर मंडी बस स्टैंड से करीब दो किलोमीटर दूर है. यहां वाहन के द्वारा व पैदल पहुंचा जा सकता है। मंडी शहर से मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढिय़ां भी बनी हुई हैं.

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