'खासा कोठी' का अनसुना इतिहास, यहां कभी रुकती थी महाराजा की शाही ट्रेन
हिडन जेम्स ऑफ राजस्थान सीरीज के पार्ट-2 में जानिए जयपुर के शाही खासा कोठी के बारे जहां शाही ट्रेन सीधे महल पर रुका करती थी...

Published : August 4, 2025 at 3:47 PM IST
जयपुर : राजस्थान की राजधानी जयपुर अपने भव्य महलों, किलो और सांस्कृतिक वैभव के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. जयपुर का समृद्ध इतिहास ऐसा है, जो इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक बनाता है. हालांकि, जयपुर के इतिहास में एक ऐसा अनसुना अध्याय भी है, जहां ट्रेन सीधे महल के दरवाजे तक आया करती थी. ये है जयपुर का खासा कोठी महल, जो आज एक भव्य होटल के रूप में दुनिया भर में अपनी पहचान रखता है. रियासत काल में यहां शाही ट्रेन रुकती थी और रेल भी दरबार का हिस्सा हुआ करती थी. खासा कोठी के परिसर में बना छोटा लेकिन विशेष रेलवे स्टेशन एक समय भारत के गिने चुने निजी रेल स्टेशनों में से एक था. वहां आम ट्रैफिक की अनुमति नहीं थी, सिर्फ शाही ट्रेनों को ही रुकने दिया जाता था.
खासा कोठी से भी चलती थी जयपुर की हुकूमत : दरअसल, सन 1866 में पूर्व महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने परकोटे से बाहर जयपुर में खासा कोठी जैसी भव्य इमारत का निर्माण करवाया था. उस समय कई बार सिटी पैलेस से बाहर इसी इमारत से जयपुर रियासत का शासन भी चलाया गया था. जब भारत में रेलवे लाइन बिछाई गई और रेल का आवागमन शुरू हुआ तब जयपुर स्टेशन बनाया गया था, लेकिन यह आम लोगों के लिए था. जयपुर रियासत के राजाओं और शाही परिवारों के लिए जयपुर स्टेशन से खासा कोठी महल के परिसर तक रेलवे लाइन बिछाई गई थी. खासा कोठी परिसर में ही विमान भवन नाम से एक शाही छोटा स्टेशन भी बनाया गया था, जो सीधे खासा कोठी इमारत के पोर्च तक आता था. यहीं से बैठकर जयपुर के राजा दूसरे स्थानों पर जाते थे.
शाही ट्रेन के लिए शाही रेलवे ट्रैक : खासा कोठी के विमान भवन स्टेशन पर केवल एक ही रेलवे ट्रैक था, जिस पर कोई आम आदमी नहीं चढ़ सकता था और न ही कोई आम रेल इस पर दौड़ सकती थी. यह केवल शाही रेलवे ट्रैक ही था. जयपुर स्टेशन से खासा कोठी की दूरी महज 500 मीटर की है. ऐसे में जयपुर स्टेशन से खासा कोठी तक रेलवे लाइन बिछाई गई थी. हालांकि, शहर का विस्तार होने के बाद अब यह रेलवे ट्रैक न खासा कोठी में नजर आता है और न ही उसे बाहर के इलाके में. खासा कोठी परिसर में बने विमान भवन को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कभी रियासत काल में एक छोटा और शाही रेलवे स्टेशन रहा होगा, जो आज भी अपने अंदर उस दौर के इतिहास को समेटे हुए हैं.

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महाराजा माधो सिंह II ने कई बार किया सफर : वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार जितेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि महाराजा माधो सिंह द्वितीय का धार्मिक कर्मकांड में बड़ा विश्वास था. उन्होंने कई बार हरिद्वार की यात्रा की और इंग्लैंड भी गए थे. उन्होंने कई बार जयपुर के खासा कोठी के शाही स्टेशन से ट्रेन पकड़कर हरिद्वार और कई अन्य स्थानों की यात्रा की थी. शेखावत का कहना है कि महाराजा माधो सिंह द्वितीय अपने फैसले और यात्राओं में शुभ मुहूर्त का बड़ा ध्यान रखते थे. जब उन्हें जयपुर से बाहर यात्रा करनी होती तो वे राज ज्योतिषियों सलाह पर रेलगाड़ी पकड़ने के मुहूर्त से कई दिन पहले सिटी पैलेस छोड़कर खासा कोठी होटल में आ जाते थे और फिर यहीं से जयपुर रियासत की हुकूमत चलाते थे और शुभ मुहूर्त में ट्रेन पकड़ कर हरिद्वार और कई अन्य स्थानों पर जाते थे.

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शाही ट्रेन में अलग-अलग डिब्बे : उन्होंने बताया कि शाही ट्रेन में कई डिब्बे होते थे, जिसमें जनाना और मर्दाना डिब्बे होते, जनाना डब्बे में रानियां और उनकी सेविकाएं सफर करती थी तो वहीं मर्दाना डिब्बे में महाराजा और उनके सेवक और उनके कई विश्वासपात्र सैनिक यात्रा करते थे. शाही ट्रेन में पर्देदार खिड़कियां और रेशमी गद्दे, सोफे होते थे जो किसी रॉयल लुक जैसा एहसास कराते थे. जब महाराजा खासा कोठी में निवास करते थे तो वहां का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं होता था. कोठी में सुरक्षा में तैनात सैनिकों की कड़ी निगरानी होती थी. शाम को महफिलें सजती थीं. गर्मियों में भिश्ती मिट्टी पर पानी छिड़कते थे, जिससे मिट्टी की सौंधी खुशबू वातावरण में फैल जाती थी.

महाराजा मानसिंह II भी विवाह करने ट्रेन से गए थे : प्रसिद्ध शिक्षाविद और जयपुर के इतिहास पर बारीकी से नजर रखने वाले सुनील शर्मा का कहना है कि 1940 में जयपुर के अंतिम राजा महाराजा मानसिंह द्वितीय जब गायत्री देवी से विवाह करने कूच बिहार गए थे तो ट्रेन से गए थे. जब विवाह करके आए थे तब भी शाही परिवार के सैकड़ो लोगों, सामंतों और ठिकानेदारों के साथ ट्रेन से खासा कोठी के शाही स्टेशन पर ही उतरे थे. उस वक्त उनके स्वागत में नाहरगढ़ से तोपें दागी गई थी. सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया था.

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यहां आज राजस्व विभाग का ऑफिस : खासा कोठी परिसर में जहां शाही रेलवे स्टेशन बना हुआ था वो आज राजस्व विभाग के सेटेलमेंट डिपार्मेंट में तब्दील हो चुका है. जहां स्टेशन का प्लेटफॉर्म हुआ करता था वहां पर अब कमरे बने हुए हैं. यहां पर अधिकारी-कर्मचारी बैठते हैं. अब न यहां पर रेलवे ट्रैक नजर आता है और न ही शाही रेलवे स्टेशन. हालांकि, यहां पर अभी भी विमान भवन बना हुआ है और उसी की छत पर उस जमाने की टीन शेड लगी हुई है, जो कभी शाही रेलवे स्टेशन के ऊपर लगा हुआ था. यही नहीं, विमान भवन पर जयपुर रियासत का राजकीय चिन्ह भी बना हुआ है.

खासा कोठी परिसर में बने हुए हैं विशाल कुंए : वहीं, खासा कोठी परिसर में चार विशाल कुंए बने हुए हैं, जो करीब 200 फीट से भी ज्यादा गहरे हैं. रियासत काल के दौरान खासा कोठी परिसर में रहने वाले सैनिकों और अन्य लोगों के पीने और रोजमर्रा के काम के लिए इन्हीं कुएं का पानी प्रयोग में लाया जाता था.



