बारिश से रॉयल हुआ रायसेन का दुर्ग किला, हर तरफ हरियाली की चादर, खुशनुमा वादियां
रिमझिम बारिश के बीच रायसेन के दुर्ग ने हरियाली की चादर ओढ़ ली. जिससे पर्यटकों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो गया.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 27, 2025 at 10:38 PM IST
रायसेन: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नजदीक रायसेन शहर में बने प्राचीन दुर्ग की शोभा आज भी देखते ही बनती है. बारिश के मौसम में दुर्ग हरियाली और घने बदलों की चादर के अंदर छुपा हुआ सा दिखाई देता है. जो किसी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता.
पहाड़ पर बना है दुर्ग किला
इस दुर्ग को 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच रायसेन के एक ऊंचे पहाड़ पर बनाया गया था. जिसमें आने जाने के लिए एक नहीं तीन द्वार हैं. प्राचीन कलात्मक नक्काशियां यहां पर देखने को मिलती हैं. तो वहीं, बारिश के मौसम में यहां का वातावरण काफी सुहाना होता है. यही कारण है कि यहां पर पर्यटक खिंचे चले आते हैं
किले में पेयजल व्यवस्था के लिए लगभग 84 छोटे बड़े तालाब हैं, जिनमें वर्ष भर पानी रहता है. जो किसी समय यहां रहने वाली प्रजा के गले की प्यास बुझाया करता था. यहां कई बार विदेशी आक्रांताओं ने भी हमला किया था, पर इसकी ऊंचाई होने के कारण इसे फतह कर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं था.
कोई नहीं कर पाया किले को फतह
शेरशाह सूरी ने भी यहां पर चार माह डेरा डाला, लेकिन इसे फतह नहीं कर पाया. आज भी यहां बड़ी-बड़ी तोपें मौजूद हैं, जो उस समय इस किले के सुरक्षा और हथियारों के जखीरे की गवाही देती हैं. यहां का इतिहास लोगों को आज भी अपनी और आकर्षित करता है. सुंदर तस्वीरें और मार्मिक इतिहास लोगों के मन में आज भी घर करता है.

1100 साल पुराना किला आज भी अच्छी हालत में
10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बनाए गए इस दुर्ग की स्थिति अन्य ऐतिहासिक स्थलों से काफी अच्छी है, जो उस समय के इंजीनियरिंग के अद्भुत नजरिये, निर्माण और भौतिक क्षमताओं की गवाही देता है. आज जहां इमारतें 50 से 100 साल नहीं टिक पाती, वहीं रायसेन का किला 1000 साल से ऊपर होने के बाद भी अपनी बुलंद दस्तान को बयां करता हुआ दिखाई दे रहा है.
बारिश के मौसम में पर्यटकों की संख्या अधिक
अन्य मौसम की तुलना में यहां पर सर्दी और गर्मी के मौसम में हरियाली देखने को मिलती है. खासकर अगर बारिश के मौसम की बात की जाए तो यहां पर लोग किले पर पहुंचकर बादलों से बातें कर सकते हैं. बादल किले की चरम ऊंचाई को छूते हुए गुजरते हैं. तो कई बार ऐसे दृश्य सामने आते हैं जब यह दुर्ग बादलों में कहीं छुप जाता है. यहां की हरियाली किसी हिल स्टेशन से कम नहीं है. यही कारण है कि यहां पर पर्यटक खिंचे चले आते हैं.
बन सकता है पर्यटन का बेहतर विकल्प
रायसेन का दुर्गा किसी अच्छे पर्यटन स्थल से कम नहीं है. यहां की हरी भरी वादियां और प्राचीन इतिहास पर्यटन का एक बेहतर विकल्प है. जो राजधानी से सटे हुए इलाकों के पर्यटकों को यहां पर आकर अपने जीवन के अमूल क्षणों को बिताने और यादों को सजाने का बेहतर अवसर प्रदान कर सकता है.
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पुरातत्व और पर्यटन विभाग की अनदेखी
1100 साल पुराने इस दुर्ग को पर्यटन और पुरातत्व विभाग की अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है. कई दीवारें मरम्मत के इंतेजार में हैं. यह विरासत अब धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने की कगार पर है. समय रहते अगर इसका रखरखाव किया जाए तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर उपहार साबित होगा.

