स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के वीडियो पर विवाद, हादसे में घायल शख्स को ऑटो में भिजवाया था अस्पताल, बीजेपी ने उठाए सवाल
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने अपना काफिला रोक सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को ऑटो में अस्पताल भिजवाया था. बीजेपी ने इसपर सवाल उठाए हैं.

Published : July 18, 2025 at 8:22 PM IST
रांची: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं. ताजा विवाद एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें गुरुवार को जामताड़ा में सड़क किनारे दुर्घटना के शिकार एक घायल व्यक्ति को देखकर स्वास्थ्य मंत्री ने अपने काफिले को रुकवाया और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया. इस वीडियो को लेकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्वास्थ्य मंत्री और हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तथा प्रवक्ता अजय साह ने सवाल उठाया है कि क्या राज्य की 108 एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जो स्वास्थ्य मंत्री को ऑटो का सहारा लेना पड़ा. दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे मानवता की मिसाल बताकर स्वास्थ्य मंत्री का बचाव किया है.
वीडियो बना विवाद का केंद्र
गुरुवार को जामताड़ा में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सड़क पर घायल पड़े एक व्यक्ति को देखा. उन्होंने तत्काल अपने काफिले को रुकवाया और घायल को ऑटो के जरिए अस्पताल भिजवाया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे लेकर विवाद शुरू हुआ. जहां कुछ लोग इसे स्वास्थ्य मंत्री की तत्परता और मानवता की मिसाल बता रहे हैं, वहीं भाजपा ने इसे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता का सबूत करार दिया है.
*इंसानियत सबसे बड़ी सेवा है*…🙏
— Dr. Irfan Ansari (@IrfanAnsariMLA) July 17, 2025
आज रांची से लौटते वक्त गोविंदपुर के पास एक बुज़ुर्ग — श्री सुलेमान अंसारी जी — को सड़क पर घायल हालत में पड़ा देखा। किसी गाड़ी ने टक्कर मारी और फरार हो गया।
कई गाड़ियां गुजर रही थीं, लेकिन कोई नहीं रुका।
मैंने तुरंत काफिला रुकवाया, उन्हें उठाया,… pic.twitter.com/wOdDMmEvv8
भाजपा का हमला: 'स्वास्थ्य व्यवस्था जर्जर, एम्बुलेंस सेवा ध्वस्त'
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने घायल व्यक्ति के लिए 108 एम्बुलेंस की व्यवस्था करने के बजाय उसे ऑटो में अस्पताल भेजा, जो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है. मरांडी ने कहा, 'स्वास्थ्य मंत्री अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का बंटाधार हो चुका है. गरीब और जरूरतमंद लोगों को सरकारी एम्बुलेंस नहीं मिलती. इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या हो सकती है?'
मरांडी ने आगे कहा, 'हेमंत सरकार एयर एम्बुलेंस का ढोल पीटती है, लेकिन हकीकत यह है कि वह फर्जी विज्ञापनों के जरिए अपनी वाहवाही लूटने में लगी है. झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी जर्जर हो चुकी है कि न तो मंत्री और न ही मुख्यमंत्री अपने या अपने परिजनों का इलाज यहां के अस्पतालों में करवाने का साहस जुटा पाते.'
108 एम्बुलेंस पर सवाल: अजय साह का तंज
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, '108 एम्बुलेंस सेवा के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है. बाइक एम्बुलेंस और एयर एम्बुलेंस की बात करने वाली सरकार की हकीकत सामने आ गई है. स्वास्थ्य मंत्री को बेबसी में ऑटो का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि 108 एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह ध्वस्त है. यह घटना दिखाती है कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था गर्त में चली गई है.'
कांग्रेस का बचाव: "मंत्री की मानवता को देखें"
स्वास्थ्य मंत्री पर भाजपा के हमलों का जवाब देते हुए कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि बाबूलाल मरांडी और भाजपा को डॉ. इरफान अंसारी की मंशा और मानवता को देखना चाहिए. सिन्हा ने कहा, 'सड़क पर घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी था. उस समय 108 एम्बुलेंस का इंतजार नहीं किया जा सकता था. मंत्री ने मानवता का परिचय देते हुए घायल को ऑटो से अस्पताल भिजवाया. इसमें गलत क्या है? भाजपा को इस घटना का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए.'
सिन्हा ने आगे कहा, 'स्वास्थ्य मंत्री ने तत्परता दिखाकर एक व्यक्ति की जान बचाने में मदद की. यह उनकी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है. विपक्ष को इसकी सराहना करनी चाहिए, न कि अनावश्यक विवाद खड़ा करना चाहिए.'
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल बरकरार
यह विवाद झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को एक बार फिर उजागर करता है. विपक्ष का आरोप है कि 108 एम्बुलेंस सेवा, जिसे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए शुरू किया गया था, कई क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही. दूसरी ओर, सत्तारूढ़ कांग्रेस का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री ने तत्काल कार्रवाई कर एक उदाहरण पेश किया है.
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