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हरियाणा का पहला मदर मिल्क बैंक रोहतक पीजीआईएमएस में ट्रायल पर शुरू, प्रीमैच्योर और कम वजन वाले शिशुओं के लिए बनेगा वरदान

रोहतक पीजीआईएमएस में हरियाणा का पहला मदर मिल्क बैंक ट्रायल के तौर पर शुरू.

पीजीआईएमएस में मदर मिल्क बैंक की शुरुआत
पीजीआईएमएस में मदर मिल्क बैंक की शुरुआत (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 18, 2025 at 11:19 PM IST

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रोहतक: हरियाणा के रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा पीजीआईएमएस में राज्य का पहला मदर मिल्क बैंक ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है. यह कदम उन शिशुओं और परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिनकी माताएं किसी कारणवश दूध नहीं पिला पा रही हैं.

एच.के. अग्रवाल ने मदर मिल्क बैंक का किया निरीक्षण

हेल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने सोमवार को मदर मिल्क बैंक का निरीक्षण किया. उन्होंने यहां की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा और माताओं से बातचीत भी की. इस मौके पर उन्होंने नियोनेटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. जगजीत दलाल और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह बैंक नवजात शिशुओं की जान बचाने में मील का पत्थर साबित होगा.

कम वजन वाले शिशुओं के लिए वरदान

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि मां का दूध बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ आहार है. विशेष रूप से प्रीमैच्योर और कम वजन वाले शिशुओं के लिए यह अत्यंत आवश्यक है. ऐसे में मदर मिल्क बैंक उनके जीवन को सुरक्षित बनाने का कार्य करेगा. यहां दूध को सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से स्टोर किया जाता है, जिससे शिशुओं को उच्च गुणवत्ता वाला दूध उपलब्ध कराया जा सके.

शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी

पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने उम्मीद जताई कि इस बैंक की मदद से शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी और नवजात जल्दी स्वस्थ होकर घर जा सकेंगे. इससे परिवारों का आर्थिक बोझ भी घटेगा.

एनएचएम निदेशक ने 40 लाख रुपए के उपकरण उपलब्ध कराए

नियोनेटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. जगजीत दलाल ने बताया कि यह सिर्फ एक मदर मिल्क बैंक नहीं बल्कि कंप्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (CLMC) है. यहां माताओं को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, काउंसलिंग दी जाती है और दूध स्टोरेज जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं. उन्होंने कहा कि इस पहल में एनएचएम के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव का बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने करीब 40 लाख रुपए के उपकरण उपलब्ध कराए.

दूध को -20 डिग्री तापमान पर रखा जा सकता है सेफ

डॉ. दलाल ने बताया कि कोई भी माता जिसके पास अतिरिक्त दूध है, वह इसे बैंक में दान कर सकती है. दूध को -20 डिग्री तापमान पर तीन माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है. वर्तमान में रोजाना 10-12 माताएं अपने दूध का दान कर रही हैं, जिससे नियोनैटल आईसीयू में भर्ती करीब 20-25 शिशुओं की जान बचाई जा रही है.

उन्होंने साफ कहा कि फार्मूला मिल्क नवजातों के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं है क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. मां का दूध ही शिशु के स्वास्थ्य और विकास के लिए सर्वोत्तम है.

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