मध्य प्रदेश में एक और प्रस्तावित अभ्यारण्य पर छिड़ी जंग, आदिवासी समुदाय उतरा सड़कों पर
हरदा जिले के आदिवासियों में उबाल है. जयस संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने आंदोलन का बिगुल बजाया.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 13, 2025 at 2:05 PM IST
हरदा : हरदा जिले में वन क्षेत्र में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम से नया वन अभ्यारण्य बनाने की योजना पर विवाद छिड़ गया है. आदिवासियों का आरोप है कि वन्य जीवों को बसाने के लिए इंसानों को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है. वन अभ्यारण्य की योजना के खिलाफ आदिवासी संगठनों ने हरदा में प्रदर्शन किया. योजना के तहत हरदा जिले के रहटगांव वन क्षेत्र में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम से नया वन अभ्यारण्य बनाने की योजना के कारण 8 गांवों को विस्थापित करने की तैयारी जारी है.
गांवों के विस्थापन के विरोध में आदिवासी समुदाय
आदिवासियों में विस्थापन को लेकर भारी गुस्सा है. शुक्रवार को हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग जयस संगठन के बैनर तले जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है "वे पीढ़ियों से इन गांवों में रह रहे हैं. वन्य जीवों के लिए इंसानों को उजाड़ना अन्याय है." युवा संगठन (जयस) और अन्य संगठनों के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में लोगों ने मांग की "अगर सरकार विस्थापन करना चाहती है, तो उन्हें वैसी ही बसाहट और उतनी ही जमीन दी जाए, जितनी उनके पास अभी है."
आदिवासी समुदाय को गुमराह कर सहमति ली
योजना के मुताबिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद अभ्यारण्य बनाने के लिए सिंगनपुर, केलझिरी, खूमी, गांगराढाना, रुटूबर्रा, गोराखाल, बासंपानी और चंद्रखाल गांव प्रभावित होंगे. वहीं, मध्य प्रदेश में अभ्यारण्यों की संख्या 25 हो जाएगी, लेकिन इन गांवों से आदिवासियों को हटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. युवा जयस संगठन के जिला अध्यक्ष सत्यनारायण सुचार ने सहमति के नाम पर गुमराह करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है "हमारे गांवों को उजाड़ने की साजिश की जा रही है. हमें गलत जानकारी देकर सहमति ली गई. हम इसका विरोध करते हैं."

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मांगें नहीं मानी तो आदिवासी भोपाल में करेंगे प्रदर्शन
जयस का आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव और फॉरेस्ट बीट प्रभारी ने लोगों को गलत जानकारी देकर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए. झांसा दिया गया कि अभ्यारण्य बनने से रोजगार मिलेगा और आर्थिक स्थिति सुधरेगी. लेकिन अब समाज इसका विरोध कर रहा है. जयस ने चेतावनी दी "अगर 15 दिन में सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वे फिर आंदोलन करेंगे. जरूरत पड़ी तो भोपाल तक कूच करेंगे." इस मामले में अपर कलेक्टर पुरुषोत्तम कुमार ने बताया "प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपा है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद वन अभ्यारण्य, मोरण गंजाल डेम और सतपुड़ा गौ अभ्यारण्य से जुड़ी समस्याएं बताई गई हैं. यह ज्ञापन राष्ट्रपति, राज्यपाल और जनजातीय मंत्रालय को भेजा जाएगा."

