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सरकारी नौकरी छोड़ विक्की बिंदु बन गए मूर्तिकार, वेस्टेज से बनाते हैं 25 हजार से 5 लाख तक की मूर्तियां

गया के विक्की बिंदु मूर्तिकला के इंजीनियर हैं, जो सरकारी नौकरी छोड़ बने मूर्तिकार. 25 हजार से लेकर 5 लाख तक की बनाते हैं मूर्तियां.

Gaya Sculpture engineer
गया के विक्की बिंदु (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 12, 2025 at 6:48 AM IST

7 Min Read
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गया: गया शहर के बागेश्वरी मोहल्ले की बिंदु गली, जिसे मूर्ति गली के नाम से भी जाना जाता है. यहां रहने वाले विक्की बिंदु एक ऐसे मूर्तिकार हैं जिन्हें 'प्रतिमा इंजिनियर' कहा जाता है. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल करने वाले विक्की ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर पुश्तैनी मूर्तिकला को नया आयाम दिया है.

विक्की बिंदु बनाते हैं खास मूर्तियां: विक्की बिंदु की खासियत यह है कि वे रद्दी कागज, लकड़ी, फाइबर, पीओपी, और सिल्वर जैसे वेस्टेज सामानों से गणेश, दुर्गा, सरस्वती जैसी खूबसूरत मूर्तियां बनाते हैं, जो न केवल बिहार बल्कि झारखंड और बंगाल तक मशहूर हैं.

मूर्तिकला के इंजीनियर विक्की बिंदु (ETV Bharat)

100 साल पुरानी विरासत: विक्की का मूर्तिकला से नाता कोई नया नहीं है. यह कला उनके परिवार में 100 साल से चली आ रही है. उनके दादा गोपाली कुम्हार ने इस कला की शुरुआत की थी, जिसे उनके पिता बिंदु प्रजापति ने आगे बढ़ाया.

विक्की ने आगे बढ़ाई विरासत: पिता के देहांत के बाद विक्की ने इस पुश्तैनी काम को संभाला और इसे आधुनिक तरीके से प्रस्तुत कर अपनी अलग पहचान बनाई. जहां उनके दादा और पिता सिर्फ मिट्टी की मूर्तियां बनाते थे, वहीं विक्की ने वेस्टेज सामानों का उपयोग कर इस कला को नया रंग दिया.

Gaya sculptor Vicky Bindu
विक्की बिंदु मूर्तिकला के इंजीनियर (ETV Bharat)

वेस्टेज से कला का जादू: विक्की की कला का सबसे खास पहलू है वेस्टेज सामानों का उपयोग. वे रद्दी अखबार, छोटी लकड़ियां, फाइबर, शिरा मिक्स, और पॉपकॉर्न जैसे सामानों से ऐसी मूर्तियां बनाते हैं, जो देखने में पत्थर की तरह लगती हैं.

15 फीट तक की होती है मूर्तियां: विक्की की बनाई मूर्तियां इतनी आकर्षक होती हैं कि लोग इन्हें पूजा पंडालों के साथ-साथ अपने घरों में भी सजावट के लिए रखते हैं. उनकी मूर्तियां 1 फीट से लेकर 15 फीट तक की होती हैं, और इनकी डिजाइन इतनी अनोखी होती है कि सामग्री की पहचान करना मुश्किल हो जाता है.

Gaya sculptor Vicky Bindu
सरकारी नौकरी छोड़ विक्की बिंदु बन गए मूर्तिकार (ETV Bharat)

दुर्गा पूजा की विशेष मांग: विक्की की मूर्तियों की मांग खास तौर पर दुर्गा पूजा के दौरान बढ़ जाती है. वे छह महीने पहले से ही मूर्तियां तैयार करना शुरू कर देते हैं. बिहार के कई जिलों के अलावा झारखंड के चतरा, हजारीबाग, कोडरमा और पलामू जैसे जिलों में उनकी मूर्तियां भेजी जाती हैं. पहले वे बंगाल जाकर भी मूर्तियां बनाते थे, लेकिन अब गयाजी में ही व्यस्तता के कारण वे यहीं से काम करते हैं। उनकी मूर्तियां बड़े पंडालों और पूजा समितियों की शोभा बढ़ाती हैं.

Gaya sculptor Vicky Bindu
25 हजार से लेकर 5 लाख तक की मूर्तियां (ETV Bharat)

मूर्तियों की कीमत और रोजगार सृजन: विक्की की बनाई मूर्तियों की कीमत 25,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक होती है, जो मूर्ति के साइज और डिजाइन पर निर्भर करती है. कुछ खास मूर्तियां इससे भी महंगी होती हैं। उनकी कला ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया, बल्कि वे 10 अन्य मूर्तिकारों को रोजगार भी दे रहे हैं. इसके साथ ही वे युवाओं को मूर्तिकला की बारीकियां सिखाकर इस कला को जीवित रखने में योगदान दे रहे हैं. एक पूजा सीजन में उनकी कमाई 5 लाख रुपये से अधिक होती है.

Gaya sculptor Vicky Bindu
वेस्टेज से बनाते हैं मूर्तियां (ETV Bharat)

नौकरी छोड़ बने मूर्तिकार: विक्की ने 2013 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया और सरकारी नौकरी भी हासिल की. वे बिजली विभाग और उद्योग विभाग में टेक्निकल ऑफीसर के रूप में कार्यरत थे, लेकिन 2015 में पिता के निधन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर मूर्तिकला को अपनाया. शुरू में परिवार वाले इसके खिलाफ थे, क्योंकि उनके तीन भाई सरकारी नौकरी में हैं. लेकिन विक्की ने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया और आज वे इस क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं.

Gaya sculptor Vicky Bindu
पुश्तैनी मूर्तिकला को आगे बढ़ाया (ETV Bharat)

मूर्तिकला में इंजीनियरिंग का तड़का: विक्की बिंदु ने बताया कि उन्हें 'मूर्तिकला का इंजिनियर' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मिट्टी के अलावा वेस्टेज सामानों से मूर्तियां बनाकर इस कला में नयापन लाया. 2015 में उन्होंने पहली मूर्ति बनाई थी, और अब हर साल सैकड़ों मूर्तियां बनाते हैं. उनकी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि ने उन्हें डिजाइन और तकनीक में नवाचार करने में मदद की, जिसके कारण उनकी मूर्तियां अनोखी और आकर्षक होती हैं. उनकी इस कला को देखकर अन्य मूर्तिकारों ने भी उन्हें यह उपाधि दी.

Gaya sculptor Vicky Bindu
मूर्तियों में वेस्टेज सामानों का उपयोग (ETV Bharat)

"नौकरी छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पिता की कला को बचाने का फैसला मेरे जीवन का सबसे सही कदम था. मेरी मूर्तियां सिर्फ मिट्टी या कागज की नहीं, ये मेरे सपनों और मेहनत की कहानी बयां करती हैं."-विक्की बिंदु, मूर्तिकार

घरों की सजावट में भी माहिर: विक्की न केवल पूजा पंडालों के लिए मूर्तियां बनाते हैं, बल्कि घरों की सजावट के लिए भी चित्र और प्रतिमाएं तैयार करते हैं. उनकी बनाई मूर्तियां और चित्र दीवारों पर सजावट के लिए भी उपयोग किए जाते हैं. वे अपने पिता की याद में कई बार मुफ्त में मूर्तियां बनाकर लोगों को देते हैं, ताकि वे पूजा के दौरान इन्हें स्थापित कर सकें। उनका सपना है कि उनकी कला को सरकारी स्तर पर सम्मान मिले.

Gaya sculptor Vicky Bindu
दुर्गा पूजा की विशेष मांग (ETV Bharat)

पंजीकरण की सलाह: जिला कला संस्कृति विभाग की अधिकारी सुरभि बाला ने बताया कि बिहार सरकार की कई योजनाएं दुर्लभ कलाओं को संरक्षित करने के लिए हैं. विक्की जैसे मूर्तिकारों को कला संस्कृति एवं युवा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना चाहिए.

"ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण से उनकी कला को प्रदर्शनी के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। पंजीकरण के लिए किसी वरिष्ठ कलाकार या गैजेटेड ऑफीसर की अनुशंसा जरूरी है."- सुरभि बाला, अधिकारी, जिला कला संस्कृति विभाग

विक्की का सपना और योगदान: विक्की बिंदु ने अपनी कला से न केवल अपने परिवार की विरासत को जिंदा रखा, बल्कि इसे नए आयाम भी दिए. वे चाहते हैं कि उनकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले और वे इसे और बड़े पैमाने पर ले जाएं. उनकी मेहनत और नवाचार ने उन्हें गया के मूर्तिकारों में एक खास मुकाम दिलाया है। उनकी कहानी प्रेरणा देती है कि शिक्षा और तकनीक के साथ परंपरागत कला को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है.

Gaya sculptor Vicky Bindu
दुर्गा पूजा के लिए शुरू किया काम (ETV Bharat)

बेटे की आस्था जुड़ी: विक्की बिंदु की मां लक्ष्मी देवी कहती हैं कि मूर्ति बनाने का काम तो खानदानी है, लेकिन हम नहीं चाहते थे कि ये अपनी नौकरी छोड़कर इस काम को करे क्योंकि हमें लगता था कि अगर इस में सफल नहीं हुआ तो ये आगे क्या करेगा? सरकारी नौकरी भी छोड़ दी है, लेकिन एक कहावत है कि मछली के बच्चे को तैरना नहीं सिखाया जाता, वो खुद तैरता है.

"विक्की के पिता मूर्ति कला के माहिर थे, वो अपने पिता की तरह ही कुछ दिनों में ही कमाल का कारीगर हो गया है, वो एक सफल मूर्तिकार है."-विक्की बिंदु की मां

दूर-दूर से कारीगर आते हैं सीखने: एक और मूर्ति कलाकार उमेश कहते हैं कि वो भी मिट्टी से प्रतिमा बनाते हैं, लेकिन विक्की ने जिस तरह से वेस्टेज सामानों से प्रतिमा बनाना शुरू किया वो कमाल है, कई कारीगर इसके हुनर को देखने आते है, कई कला तो हमने इन से सीखने का प्रयास किया है.

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