DJ की धुन पर निकली 100 साल की दादी की शव यात्रा, गम की बजाय खुशी में झूमता दिखा परिवार
बांका मे 100 साल की बुजुर्ग की शव यात्रा में मातम नहीं जश्न का माहौल नजर आया. परिजन डीजे पर डांस करते नजर आए. पढ़ें...

Published : February 24, 2025 at 10:03 AM IST
बांका: बिहार के बांका के काटोरिया के थेबरी गांव में 100 साल की नदिया देवी की अंतिम यात्रा काफी अनोखी रही, जहां मातम की जगह जश्न का माहौल दिखा. परिजनों ने शव यात्रा में डीजे बजवाया, जिस पर लोग नाचते-गाते नजर आए. परिवार का कहना है कि अगर कोई शख्स 100 साल की उम्र पूरी कर ले, तो उसके निधन पर शोक नहीं बल्कि खुशी मनाई जाती है. इसी परंपरा के तहत उन्होंने दादी नदिया देवी की अंतिम विदाई डीजे के साथ करने का फैसला किया.
शव यात्रा में भोजपुरी गानों पर झूमे परिजन: शव यात्रा में महिलाएं भी शामिल थीं. शव को कंधा देने वाले लोग भोजपुरी गानों पर थिरकते दिखे. इस अनोखी शव यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया. वीडियो में डीजे वाली गाड़ी शव के आगे चलती नजर आई, वहीं लोग पीछे नाचते-गाते आ रहे हैं. इस शव यात्रा में भोजपुरी के गानों की तेज बीट वाले गानों पर जमकर ठुमके लगाए गए.
इस शव यात्रा को परिजनों ने बताया परंपरा: इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर मिला-जुला रिएक्शन सामने आया है. कुछ लोगों ने इसे परंपरा से जोड़कर सही बताया, तो वहीं कुछ ने इसे 'संवेदनहीनता' कहा है. मृतका के पोते सिकंदर ने सोशल मीडिया पर लिखा, "यह हमारी पारंपरिक मान्यता है कि जो व्यक्ति 100 साल की उम्र पूरी करके दुनिया छोड़ता है, उसके लिए मातम नहीं बल्कि जश्न मनाना चाहिए." परिवार का कहना है कि उनकी दादी ने लंबी उम्र जी, इसलिए खुशी-खुशी उनकी अंतिम विदाई दी गई.
"हमारी पारंपरिक मान्यता है कि जो व्यक्ति 100 साल की उम्र पूरी करके मरता है, उसके लिए मातम नहीं बल्कि जश्न मनाना चाहिए. इसलिए मैं दादी का खुशी-खुशी अंतिम संस्कार कर रहा हूं."-मृतका का पोता
चर्चा का विषय बना शव यात्रा: शव यात्रा के दौरान अश्लील भोजपुरी गाने बजाने की बात भी सामने आई है. पुलिस इस पर नजर रख रही है. स्थानीय प्रशासन जांच कर रहा है कि कहीं कोई कानून तो नहीं तोड़ा गया. इस घटना के बाद गांव में यह शव यात्रा चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं. परिवार अपने फैसले को सही मान रहा है. वहीं बुजुर्गों का कहना है कि अंतिम यात्रा में शोक और सम्मान होना चाहिए, न कि इस तरह का नाच-गाना करना चाहिए.
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