गाजियाबाद की पेपर फैक्ट्री में आग बुझाने में अग्रिशमन विभाग के छूटे पसीने, रोबोट की भी लेनी पड़ी मदद
गाजियाबाद की पेपर फैक्ट्री में आग बुझाने के लिए 18 अग्निशमन वाहनों की मदद ली गई. फिलहाल घटना की जांच की जा रही है.

Published : July 7, 2025 at 7:54 PM IST
नई दिल्ली/गाजियाबाद: गाजियाबाद में सोमवार सुबह तीन जगहों पर आग लगने से हड़कंप मच गया. इसमें से दो जगहों पर पहले ही आग बुझा ली गई थी, लेकिन साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट 4 की ईशान पेपर्स (पी) लिमिटेड और विकास ओवरसीज क्राफ्ट्स में लगी भीषण आग को काफी देर बाद बुझाया जा सका. चीफ फायर ऑफिसर राहुल पाल ने बताया कि फिलहाल आग बुझा ली गई है और कूलिंग का काम किया जा रहा है. आग इतनी भीषण थी कि उसपर काबू करने के लिए रोबोट का भी सहारा लेना पड़ा. आग लगने के बाद इमारत गिरने का खतरा बढ़ गया है.
जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में लगे आग बुझाने के उपकरण अपर्याप्त थे और पेपर रोल इतने ज्यादा थे कि आग बुझाने के सारे उपाय फेल हो गए. घटना के दौरान बारिश हो रही थी और फैक्ट्री बंद थी. ऐसे में दमकलकर्मी शॉर्ट सर्किट से आग लगाने की आशंका जता रहे हैं. हालांकि अग्निशमन विभाग की तरफ से आग लगने के कारण की जांच करने के बाद ही आग लगने के सही कारणों की पुष्टि की जाएगी.
इंतजाम पर भारी पड़ी अव्यवस्था: जानकारी के अनुसार, विकास ओवरसीज क्राफ्ट्स में रात करीब 3:10 बजे आग लगी थी. फैक्ट्री में आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य उपकरण लगे हुए थे, लेकिन बेसमेंट से लेकर इमारत का हर फ्लोर का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पेपर रोल से भरा हुआ था. रात में फैक्ट्री बंद थी और कोई कर्मचारी नहीं था. वहीं ईशान पेपर्स लिमिटेड के कुछ कर्मचारी फैक्ट्री के गेट पर बने कमरों में सो रहे थे. फैक्ट्री के बराबर एक निर्माणाधीन इमारत है, जिसके मजदूरों ने सबसे पहले आग को देखा और पेपर फैक्ट्री के कर्मचारियों को सूचना थी.
की जाएगी जांच: कर्मचारियों ने बताया कि आग पहले छोटी थी, लेकिन पेपर रोल के कारण आग अधिक फैल गई. फैक्ट्री में आग बुझाने के उपकरण लगे थे, लेकिन आग इतनी ज्यादा फैल गई की उपकरण काम नहीं आए. मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) राहुल पाल ने कहा कि इसकी जांच की जाएगी कि आग बुझाने के उपकरण क्यों अपर्याप्त साबित हुए. फिलहाल आशंका जताई जा रही है कि पेपर रोल के कारण आग तेजी से फैल गई, जिसके कारण आग पर काबू नहीं पाया जा सका.

आग बुझाने में जेसीबी की भी ली गई मदद: राहुल पाल ने बताया कि आग बुझाने के लिए 18 दमकल की गाड़ियों की मदद ली जा रही थी. जेसीबी की सहायता से जले हुए पेपर रोल को बाहर निकाल कर कूलिंग का काम किया गया. दीवार तोड़कर भी कई रोल निकाले गए, जिससे आग बुझाई जा सके. फैक्ट्री की इमारत की दूसरी तरफ का हिस्सा जर्जर हो गया है.
पानी के बिल का भुगतान करना होगा: उन्होंने आगे बताया कि आग बुझाने में सरकार के संसाधनों और भारी मात्रा में जल का उपयोग होता है. आग बुझाने में जो भी पानी या अन्य चीजों का खर्च आता है, इसका बिल जिसके यहां आग बुझाने का कार्य किया जाता उसे भुगतान करना होता है. इसके लिए नोटिस दिया जाता है. इसके बाद खर्च का भुगतान सरकार के खाते में करना होता है. इसलिए फैक्ट्री संचालक को आग बुझाने का बिल देना होगा.
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