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भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला, EOW ने पेश किया 7500 पन्नों का चालान, 10 आरोपियों के नाम

भारतमाला प्रोजेक्ट स्कैम में EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में चालान पेश किया है.

BHARATMALA PROJECT
भारतमाला प्रोजेक्ट स्कैम के आरोपी (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : October 13, 2025 at 8:31 PM IST

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Updated : October 13, 2025 at 8:49 PM IST

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में हुए भारतमाला प्रोजेक्ट से संबंधित मुआवजा राशि घोटाले के मामले में सोमवार को EOW ने स्पेशल कोर्ट में 7500 पन्नों का चालान पेश किया है. भारतमाला परियोजना में 10 लोगों ने मिलकर 32 करोड रुपए का घोटाला किया है. इस मामले में EOW ने जांच के बाद चालान पेश किया है.

भारतमाला प्रोजेक्ट में अनियमितताओं की जांच की गई: भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर से विशाखापट्टनम तक सड़क निर्माण का कार्य किया जा रहा है. इसके तहत प्रभावित ग्रामों में से ग्राम नायक बांधा ग्राम टोकरो और ग्राम उरला की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया हुई है.

फर्जी मुआवजा और नामंतरण का मामला: इस प्रक्रिया में बैक डेट में बंटवारे और नामांतरण की अनियमिताओं की जांच की गई. जिसमें राजस्व अधिकारियों और दलालों की मिली भगत से फर्जी बंटवारा एवं नामांतरण कर अधिक मुआवजा प्राप्त किए जाने का खुलासा हुआ. नायक बांधा जलाशय से संबंधित पूर्व अधिग्रहित भूमि के दोबारा मुआवजा भुगतान करने का प्रकरण सामने आया. इसके साथ ही उमा तिवारी के नाम पर फर्जी दस्तावेज के माध्यम से भूमि नामांतरण कर मुआवजा प्राप्त करने का मामला दर्ज किया गया.

EOW ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति: इस पूरे मुद्दे पर EOW ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि नायक बांधा जलाशय से संबंधित जल संसाधन विभाग के मामले में कई खुलासे हुए हैं. इसमें तत्कालीन अधिकारी नरेंद्र नायक और गोपाल वर्मा ने अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर गड़बड़ी की. इन्होंने डुबान क्षेत्र से जुड़े पूर्व अधिग्रहण दस्तावेजों को दबाने के साथ ही झूठे प्रतिवेदन तैयार किए. इन कार्यों से शासन को करोड़ों रुपए का सीधा नुकसान हुआ है. प्रभावित किसानों को उनका हक नहीं मिल पाया.

भारतमाला परियोजना घोटाला मामले में आरोपियों के नाम

  • निर्भय साहू तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अभनपुर
  • दिनेश पटेल हल्का पटवारी
  • रोशन लाल वर्मा राजस्व निरीक्षक
  • शशिकांत कुर्रे तत्कालीन तहसीलदार
  • जितेंद्र साहू तत्कालीन हल्का पटवारी क्रमांक 49 नायक बांधा
  • बसंती धृतलहरे तत्कालीन पटवारी
  • लखेश्वर प्रसाद किरण, तत्कालीन नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा और लेखराम देवांगन है.

इन आरोपियों के फरार रहने और न्यायालय से राहत मिलने के बाद विवेचना में सहयोग न करने से आपराधिक षड्यंत्र पद के दुरुपयोग और अवैध लाभ से संबंधित साक्ष्य प्रभावित हुआ. जिसके कारण इनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की गई. उनकी भूमिका के संबंध में अलग से चालान प्रस्तुत किया गया है.

जांच में और क्या खुलासा हुआ ?: जांच में यह बात सामने आई कि राजस्व अधिकारियों और दलालों की मिली भगत से बैक डेट में फर्जी दस्तावेज तैयार करके भूमि का बंटवारा और नामांतरण करवाया गया. इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अधिक मुआवजा दिया गया. जिससे शासन को लगभग 28 करोड रुपए का सीधा नुकसान हुआ.

इसके साथ ही नायक बांधा जलाशय में यह पाया गया कि पहले से अधिग्रहित भूमि के संबंध में अनुचित रूप से पुनः मुआवजा भुगतान कर शासन को 2 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया.

तीसरे प्रकरण में उमा तिवारी के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों द्वारा नामांतरण करके मुआवजा प्राप्त किए जाने से शासन को 2 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ. इस तरह से कुल मिलाकर इसमें 32 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है.

EOW की जांच में यह बात भी सामने आई है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों ने प्राइवेट दलाल हरमीत सिंह खनूजा और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर किसानों को अधिक मुआवजा दिलवाने का लालच दिया. दलालों ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिली भगत करके किसानों के नाम से बैक डेट में फर्जी बंटवारे और नामांतरण तैयार कराए. किसानों से कोरे चेक और आरटीजीएस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए. मुआवजे की राशि का बड़ा भाग अपने और अपने सहयोगी के फर्मों के खातों में ट्रांसफर करवा लिया गया

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Last Updated : October 13, 2025 at 8:49 PM IST