पटना जू की शान 'माला' का निधन, कार्डियक रेस्पिरेटरी फेलियर से हुई मौत
लोगों को कुछ जानवरों से इतना प्यार होता है कि उसे कुछ हो जाए तो बड़ा सदमा लगता. माला के साथ भी ऐसा ही था.

Published : June 2, 2025 at 1:59 PM IST
पटना : पटना चिड़ियाघर यानी संजय गांधी जैविक उद्यान की सबसे लोकप्रिय हथिनी 'माला' का निधन हो गया. 55 वर्षीया माला कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रही थी. प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मृत्यु कार्डियक रेस्पिरेटरी फेलियर के कारण हुई है. मौत के सटीक कारणों की जांच के लिए उसके विसरा के नमूने बरेली स्थित भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजे गए हैं.
अंतिम समय में बीमारी से संघर्षरत थी माला : पिछले कुछ समय से माला के पैरों में गहरे घाव थे, नाखून उखड़ रहे थे और वह चलने-फिरने में असमर्थ थी. इसके कारण उसने खाना-पीना भी लगभग छोड़ दिया था. देश के शीर्ष हाथी विशेषज्ञों की टीम उसके इलाज में जुटी थी, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे. रविवार को सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली.
"माला की स्थिति पिछले 48 घंटों में अचानक बिगड़ी और रविवार सुबह उसने अंतिम सांस ली. माला की मौत से पूरे चिड़ियाघर में शोक का माहौल है, विशेषकर पशुपालकों और बच्चों के बीच जो उससे भावनात्मक रूप से जुड़े थे.''- हेमंत पाटिल, निदेशक, संजय गांधी जैविक उद्यान

पटना जू का 'जीवित इतिहास' थी माला : माला का लगभग पूरा जीवन पटना चिड़ियाघर में बीता. वर्ष 1975 में महज सात साल की उम्र में उसे रेस्क्यू कर यहां लाया गया था. 48 वर्षों तक वह जू की मुख्य आकर्षण बनी रही. विशेष रूप से बच्चों के लिए वह पसंदीदा थी. माला के निधन से उसकी साथी हथिनी 'लक्ष्मी' अब अकेली रह गई है. लक्ष्मी को 12 साल की उम्र में रेस्क्यू कर जू लाया गया था और माला के साथ उसकी गहरी दोस्ती थी.
लक्ष्मी का व्यवहार हुआ असामान्य : कर्मचारियों के अनुसार, माला की मौत के बाद लक्ष्मी का व्यवहार असामान्य रहा है. जू प्रबंधन अब उसकी मानसिक सेहत पर ध्यान दे रहा है और संभवतः उसके लिए एक नया साथी लाने पर विचार कर रहा है. माला न केवल एक हथिनी, बल्कि पटना की सामूहिक स्मृतियों का हिस्सा थी. तीन पीढ़ियों ने उसे देखा, उसके साथ समय बिताया और उसकी सौम्यता से प्यार किया.
माला के साथ एक युग का अंत : माला विशेष रूप से बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र थी, जो उसे फल खिलाते और उसके साथ फोटो खिंचवाते थे. चिड़ियाघर में माला के सम्मान में एक प्रतिमा लगाए जाने की योजना है. निदेशक हेमंत पाटिल का कहना है कि माला ने सभी को भावनात्मक रूप से जोड़ा था, उसकी विरासत को संजोकर रखा जाएगा.
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