DUSU ELECTION: छात्र राजनीति का मिनी थिएटर; देश की आजादी से लेकर अब तक निभा रहा प्रभावी भूमिका
यह संघ छात्रों की समस्याओं को उठाने, कैंपस जीवन को प्रभावित करने और राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज बुलंद करने का प्रभावी मंच रहा.

Published : August 26, 2025 at 3:40 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव, जो दशकों से भारतीय छात्र राजनीति और राष्ट्रीय राजनीति का प्रतिबिंब रहा है. इस साल कुलसचिव कार्यालय से जारी अधिसूचना के अनुसार, 18 सितंबर को मतदान और 19 सितंबर को मतगणना होनी है. यह चुनाव एक बार फिर एबीवीपी, एनएसयूआई, एआईएसएपी और अन्य संगठनों के बीच कड़ी टक्कर का मंच बनेगा.
100 साल पूरे कर चुके दिल्ली विश्वविद्यालय का यह छात्र संगठन न केवल कैंपस जीवन को दिशा देता है, बल्कि देश को कई बड़े नेताओं की राजनीतिक यात्रा को मंच दिया है. इसके साथ यह संघ छात्रों की समस्याओं को उठाने, कैंपस जीवन को प्रभावित करने और राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज बुलंद करने का भी प्रभावी मंच रहा है. ऐसे में आइये जानते हैं डीयू छात्र संघ चुनाव के बारे में...
स्थापना और प्रारंभिक वर्ष (1940-1950 के दशक): दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थापना 1922 में हुई थी. यह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहा. देश की स्वतंत्रता के बाद छात्रों की मांग पर एक छात्र संघ की जरूरत महसूस की गई. 9 अप्रैल 1949 को DUSU की स्थापना हुई. इसका संविधान तैयार करने के लिए एक अस्थायी समिति गठित की गई, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख वीकेआरवी राव ने की. इस समिति में सभी संबद्ध कॉलेजों के छात्र संघ अध्यक्ष शामिल थे. DUSU का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था. छात्र संघ का मुख्य उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान और विश्वविद्यालय के विकास में योगदान था.
पहला चुनाव (1954): DUSU के पहला चुनाव 1954 में हुआ. यह चुनाव जुलाई-अगस्त में होते थे, जिसमें विश्वविद्यालय के फैकल्टी, शिक्षण विभागों और संबद्ध कॉलेजों के छात्र मतदान करते थे. छात्र संघ की संरचना में चार पदाधिकारी जिनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव शामिल थे. इसके अलावा प्रत्येक संबद्ध कॉलेज से एक या दो सेंट्रल काउंसलर चुने जाते थे. कॉलेज अध्यक्ष सेंट्रल काउंसिल के सदस्य होते थे. शुरुआती साल में DUSU ने छात्रों के कल्याण, शिक्षा सुधार और राष्ट्रीय मुद्दों पर फोकस किया.
1960-1970 के दशक: राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव और उभरते संगठन
इस दौर में DUSU चुनाव राष्ट्रीय राजनीति का प्रतिबिंब बनने लगे. प्रमुख छात्र संगठन जैसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP, RSS और BJP से जुड़े) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI, कांग्रेस से जुड़े) सक्रिय हुए. ABVP और NSUI ने चुनावों में प्रमुख भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय पार्टियों की रणनीतियों को दर्शाते थे. इस दौर से DUSU ने कई राष्ट्रीय नेता दिए, जिनमें अरुण जेटली (ABVP) 1974-75 में अध्यक्ष चुने गए, जो बाद में भारत के वित्त मंत्री बनें. इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान DUSU ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. DUSU की अध्यक्ष रहीं रेखा गुप्ता वर्तमान समय में दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं तो वही आशीष सूद शिक्षा मंत्री हैं.
1980-1990 के दशक: संगठनों का विस्तार और महिला प्रतिनिधित्व
इन चुनावों में ABVP और NSUI का दबदबा बढ़ा, लेकिन अन्य संगठन जैसे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI, CPI-M से जुड़े) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA, CPI-ML से जुड़े) भी उभरे. 1985-86 में अजय माकन (NSUI) अध्यक्ष बने, जो बाद में कांग्रेस के प्रमुख नेता बनें.1995-96 में अलका लांबा (NSUI) अध्यक्ष चुनी गईं. इस दौर में महिला प्रतिनिधित्व पर चर्चा शुरू हुई, लेकिन कुल मिलाकर 65 वर्षों (1954-2019 तक) में केवल 11 महिलाएं ही अध्यक्ष बनीं. DUSU की संरचना में बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन कॉलेजों की संख्या बढ़ने से मतदाताओं की संख्या 1.5 लाख तक पहुंच गई. यह चुनाव अब "राष्ट्रीय राजनीति का मिनी थिएटर" कहा जाने लगा है.
2000-2010 के दशक: नए संगठन और विवाद
2008 में इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (INSO, इंडियन नेशनल लोक दल से जुड़ा) ने इतिहास रचा, जब उन्होंने सिख समुदाय से एक पुरुष उम्मीदवार को मैदान में उतारा. 2009-10 में मनोज चौधरी (स्वतंत्र) अध्यक्ष बनें. चुनावों में धनबल, मसल पावर और कैंपस डिफेसमेंट (पोस्टर आदि से दीवारें खराब करना) के आरोप बढ़े. 2008-09 में नेहा जोशी (ABVP) अध्यक्ष बनीं. चुनाव राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा भारी निवेश के साथ लड़े जाने लगे. महिलाओं के लिए दो पद आरक्षित करने की मांग उठी और दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई.
2010-2020 के दशक: प्रभाव और हालिया घटनाएं
2013 के DUSU चुनावों ने दिल्ली विधानसभा और लोकसभा चुनावों को प्रभावित किया. आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई छत्र युवा संघर्ष समिति (CYSS) ने AISA के साथ गठबंधन किया. 2024 चुनावों में कैंपस डिफेसमेंट के कारण दिल्ली हाईकोर्ट ने परिणामों पर रोक लगा दी, जो नवंबर 2024 में हटी. लिंग समानता, चुनावी खर्च पर सीमा और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दे विवादास्पद रहे. DUSU में सुधार के लिए अदालती हस्तक्षेप बढ़ा और 2024 में मतगणना की देरी हुई.
2025 का परिदृश्य:
दिल्ली विश्वविद्यालय ने 13 अगस्त 2025 को DUSU चुनावों की तिथियां घोषित की. चुनाव प्रक्रिया जो 18 सितंबर 2025 को मतदान और 19 सितंबर 2025 को वोटो की गिनती के साथ खत्म होगी. यह चुनाव भी ABVP, NSUI, ASAP और अन्य संगठनों के बीच कड़ी टक्कर होगी.अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, एनएसयूआई, आईसा दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में 1 लाख का चुनावी बांड भरवाने में विरोध प्रदर्शन कर रहे है. विरोध प्रदर्शन में डीयू के रामजस कॉलेज, हिन्दू कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज, मिरांडा हाउस सहित अन्य कॉलेज के छात्र शामिल हो रहे. छात्रों ने 1 लाख का चुनावी बांड के निर्णय को वापस लेने की मांग की.
डूसू चुनाव समिति के चीफ रिटर्निंग ऑफिसर डॉ राजेश सिंह ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय जिसने सौ वर्ष अपनी पूर्ण कर लिए हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र संगठन है, यह देश का एक बहुत ही महत्वपूर्ण छात्र संगठन है, जिसने देश की राजनीति में अनेकों प्रतिष्ठित राजनेताओं को यहां से प्रदान किया है. वह पहले डूसू के मेंबर रह चुके हैं या डूसू में उन्होंने विभिन्न पदों पर जीत दर्ज की है. विश्वविद्यालय भी प्रतिष्ठित है और जो छात्र संगठन है वह भी हमारा प्रतिष्ठित है. इस वर्ष चुनाव हम क्लीन और ग्रीन चुनाव कराने के लिए कोशिश कर रहे हैं, जिसमें बहुत सारी गाइडलाइंस हैं.
DUSU से 2014 से 2024 तक के विजेताओं के नाम:
2014-15
- अध्यक्ष: मोहित नागर (ABVP)
- उपाध्यक्ष: प्रवेश मलिक (ABVP)
- सचिव: कनिका शेखावत (ABVP)
- संयुक्त सचिव: आशुतोष माथुर (ABVP)
2015-16
- अध्यक्ष: सतेंद्र अवाना (ABVP)
- उपाध्यक्ष: सनी डेढ़ा (ABVP)
- सचिव: अंजलि राणा (ABVP)
- संयुक्त सचिव: छतरपाल यादव (ABVP)
2016-17
- अध्यक्ष: अमित तंवर (ABVP)
- उपाध्यक्ष: प्रियंका छाबड़ी (ABVP)
- सचिव: अंकित सांगवान (ABVP)
- संयुक्त सचिव: मोहित सांगवान (NSUI)
2017-18
- अध्यक्ष: रॉकी तुसीद (NSUI)
- उपाध्यक्ष: कुणाल सहरावत (NSUI)
- सचिव: महामेधा नागर (ABVP)
- संयुक्त सचिव: उमा शंकर (ABVP)
2018-19
- अध्यक्ष: अंकित बैसोया (ABVP)
- उपाध्यक्ष: शक्ति सिंह (ABVP)
- सचिव: आकाश चौधरी (NSUI)
- संयुक्त सचिव: ज्योति चौधरी (ABVP)
2019-20
- अध्यक्ष: अक्षित धैया (ABVP)
- उपाध्यक्ष: प्रदीप तंवर (ABVP)
- सचिव: आशीष लांबा (NSUI)
- संयुक्त सचिव: शिवांगी करवाल (ABVP)
2023-24
- अध्यक्ष: तुषार देभा (ABVP)
- उपाध्यक्ष: अभि धैया (NSUI)
- सचिव: अपराजिता (ABVP)
- संयुक्त सचिव: सचिन बैसला (ABVP)
2024-25
- अध्यक्ष: रौनक खत्री (NSUI)
- उपाध्यक्ष: भानु प्रताप सिंह (ABVP)
- सचिव: मित्रविंदा करणवाल (ABVP)
- संयुक्त सचिव: लोकेश चौधरी (NSUI)
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