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टर्की में धनबाद सिंफर को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान, कंट्रोल ब्लास्टिंग की तकनीक को विश्व ने सराहा

कंट्रोल ब्लास्टिंग के क्षेत्र में धनबाद सिंफर को बड़ा सम्मान मिला है. टर्की में सिंफर के वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया है.

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टर्की में हुए फ्लैगब्लास्ट अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सिंफर के वैज्ञानिकों की टीम. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : April 17, 2025 at 4:26 PM IST

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धनबादः टर्की में हुए फ्लैगब्लास्ट अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सिंफर को पहला स्थान प्राप्त हुआ है. कंट्रोल ब्लास्टिंग के क्षेत्र में सिंफर Central Institute of Mining and Fuel Research, Dhanbad (CSIR-CIMFR)को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान मिला हैं. नवीं मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण का एक वीडियो सिंफर के वैज्ञानिकों के द्वारा प्रस्तुत किया गया था. जिसमें सिंफर के शैल उत्खनन अभियांत्रिकी विभाग के चार वैज्ञानिक सूरज कुमार, अरविंद कुमार, डॉ फिरोज अली और डॉ रंजित कुमार पासवान इस अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे. आपको बता दें कि फ्लैगब्लास्ट अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विश्व के 26 देशों के 500 से अधिक साइंटिस्ट शामिल हुए थे.

वैज्ञानिकों ने साझा किए अनुभव

टर्की से धनबाद लौटने के बाद सिंफर के वैज्ञानिकों के साथ ईटीवी भारत संवाददाता नरेंद्र निषाद ने बातचीत की. जिसमें शैल उत्खनन अभियांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक रंजित कुमार पासवान ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन हर तीन साल में किया जाता है. इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन अलग-अलग देशों में किया जाता है. उन्होंने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस ब्लास्टिंग के क्षेत्र में वर्ल्ड कप की तरह है. जिसमें अलग-अलग देशों में कॉन्फ्रेंस के आयोजन को लेकर बिडिंग की जाती है. आयोजन के लिए इंटेंशनल ऑर्गनाइजिंग कमेटी है. सभी पहलुओं को देखकर फाइनल निर्णय लिया जाता है कि किस देश में कॉन्फ्रेंस का आयोजन होगा.

टर्की से लौटने के बाद सिंफर के वैज्ञानिकों से बात करते ईटीवी भारत संवाददाता नरेंद्र निषाद. (वीडियो-ईटीवी भारत)

कंट्रोल ब्लास्टिंग में सिंफर अव्वल

उन्होंने बताया कि इस बार टर्की में अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ था. जिसमें 26 देशों के 500 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया था. करीब 100 शोध पत्रों का व्याख्यान हुआ. जिसमें सिंफर से 5 शोध पत्र शामिल किए गए थे. रंजित कुमार ने बताया कि उन्होंने कॉन्फ्रेंस में दो केस स्टडी को प्रजेंट किया था. जिसमें एक माइंस का कंट्रोल वे में प्रोडक्शन एन्हांसमेंट के लिए हम लोग क्या-क्या कर सकते हैं. इससे जुड़ी चीजों पर उन्होंने अपना व्याख्यान दिया. दूसरा कि अगर आसपास के एरिया में अगर कोई बहुत बड़ा स्ट्रक्चर है और ब्लास्टिंग के थ्रू एग्जीक्यूशन करना है, वैसे केस में क्या मेथोडोलॉजी यूज कर सकते हैं इस पर व्याख्यान दिया गया.

उन्होंने बताया कि हमारे विभाग के द्वारा कंट्रोल ब्लास्टिंग के क्षेत्र में जो पूर्व में कार्य किए हैं उससे संबंधित व्याख्यान केस स्टडी के रूप में रखा. उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस के दौरान वीडियो कॉन्टेस्ट का भी आयोजन हुआ. 30 देशों के प्रतिभागियों ने कंट्रोल ब्लास्टिंग के 60 वीडियो प्रस्तुत किए. जिसमें टॉप 3 में पहले स्थान पर सिंफर का कंट्रोल ब्लास्टिंग का वीडियो आया है.

ब्लास्टिंग का वीडियो प्रस्तुत किया

वहीं तकनीकी अधिकारी सह साइंटिस्ट सूरज कुमार ने बताया कि जब हम माइंस में ब्लास्ट करते हैं, तो यह ध्यान में रखा जाता है कि आसपास के इलाके के घरों को क्षति ना पहुंचे. इसके लिए हम लोग कंट्रोल ब्लास्टिंग करते हैं. कॉन्टेस्ट में जो वीडियो दिखाया गया, वह नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण कार्य के लिए जो ब्लास्ट किया था, उसका एक वीडियो प्रस्तुत किया गया. यह पूरी तरह से कंट्रोल ब्लास्टिंग था.

इलेक्ट्रिक डेटोनेटर के इस्तेमाल पर भी प्रजेंटेशन

वहीं वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी सह साइंटिस्ट अरविंद कुमार ने कहा कि भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक डेटोनेटर के इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है. ना तो इसका निर्माण कर सकते हैं और ना ही इसका भंडारण और ना ही इलेक्ट्रिक डेटोनेटर का किसी कार्य में इस्तेमाल कर सकते हैं. भारत में हमलोग अंडरग्राउंड माइंस में फर्स्ट टाइम इसका इस्तेमाल करने जा रहे हैं. इसकी टेस्टिंग की सुविधा पूरे भारत में सिर्फ सिंफर के पास है और कहीं नहीं है. विश्व के कुछ ही देश हैं जो अंडरग्राउंड में इस्तेमाल किए हैं. सिंफर से 5 कंपनियों का सर्टिफिकेशन हो चुका है. डीजीएमएस के क्लियरेंस के बाद इसे अंडरग्राउंड माइंस में यूज किया जा सकेगा.

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टर्की में सिंफर के वैज्ञानिक को सम्मानित करते आयोजक. (फोटो-ईटीवी भारत)

आम लोगों की सेफ्टी के लिहाज से इसकी टेस्टिंग की गई है. इसका इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकेगा. इसमें बार कोड लगाया गया है. बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन किया गया है. जिस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने डेटोनेटर का निर्माण किया है और वही उस डेटोनेटर को ब्लास्ट कर सकता है. दूसरे पावर सोर्स से उसे ब्लास्ट नहीं किया जा सकता है.टर्की में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में इसी पर अपना व्याख्यान दिया. जिसमें बताया कि फर्स्ट टाइम इंडिया में इसे इंप्लीमेंट करने जा रहे हैं. जो अन्य देश के साइंटिस्ट आए थे,उन्हें भी जानने की इच्छा हुई कि और किस तरह की टेस्टिंग फैसलिटी है. अन्य कई देशों ने भी इस तकनीक का अभी तक इस्तेमाल नहीं किया है.

सिंफर के लिए गौरव की बातः निदेशक

वहीं इस संबंध में सिंफर के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि टर्की में फ्लैग ब्लास्ट इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था. जिसमें हमारे संस्थान के चार वैज्ञानिक शामिल हुए थे. रॉक ब्लास्टिंग के क्षेत्र में एक वीडियो कंप्टीशन था. जिसमें टॉप 3 में सिंफर ने पहला स्थान प्राप्त किया है. यह संस्थान के लिए गौरव की बात है. इसके साथ ही रॉक ब्लास्टिंग के क्षेत्र में शोध पत्र का व्याख्यान भी दिया गया. अन्य देशों ने हमारी तकनीक की सराहना की है. साथ ही हमारे वैज्ञानिकों को विश्व के अन्य देशों के वैज्ञानिकों के साथ उनकी भी तकनीक को जानने का एक मौका मिला. ब्लास्टिंग के क्षेत्र में जो नए रिसर्च किए जा रहे हैं, उन्हें जानने और समझने का एक मंच प्राप्त हुआ.

जानकारी देते सिंफर के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा. (वीडियो-ईटीवी भारत)

एयरपोर्ट निर्माण में सिंफर का योगदान

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में धनबाद के सिंफर की अहम भूमिका है. पहाड़ को सुरक्षित तरीके से तोड़ रनवे का निर्माण कार्य सिंफर के द्वारा किया गया है.सिंफर एवं सिडको महाराष्ट्र लिमिटेड के बीच वर्ष 2017 के जून में नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए एमओयू हुआ था. 92 मीटर उलवे पहाड़ी को सुरक्षित तरीके से तोड़ कर ऊंचाई कम किया गया है. जिसने सिंफर ने कंट्रोल ब्लास्टिंग का इस्तेमाल किया गया है. तोड़े गए पहाड़ के अवशेष का उपयोग समुद्र और नदी की धार को मोड़ने में किया गया है. इसी साल एयरपोर्ट के शुरू होने संभावना जताई जा रही है.

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