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भाषाई विवाद पहुंचा राजभवन, मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका, भूमिज को शामिल करने की मांग

भाषाई अस्मिता की रक्षा के लिए राज्यपाल से गुहार लगाने राजभवन पहुंचा शिष्टमंडल.

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राजभवन (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : July 11, 2025 at 7:59 PM IST

3 Min Read
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रांचीः मैथिली, भोजपुरी, अंगिका को जिला स्तर की भाषा से दूर रखने के खिलाफ चल रहा आंदोलन जोर पकड़ने लगा है. शुक्रवार 11 जुलाई को अखिल भारतीय भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका मंच के अध्यक्ष कैलाश यादव के नेतृत्व में 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के समक्ष गुहार लगाने पहुंचा.

इस मौके पर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए प्रतिनिधिमंडल ने भोजपुरी, मगही, मैथिली अंगिका भूमिज भाषा को नियोजन नीति में क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग रखी, साथ ही राज्य सरकार को इस संबंध में राज्य के मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं को समुचित स्थान देने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया.

जानकारी देते अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष (ETV BHARAT)

मंच की ओर से राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा गया कि झारखंड राज्य के विशिष्ट क्षेत्रों में राजकीय प्रयोजनार्थ उर्दू, संथाली, बंगला, मुंडारी, हो, खरिया, कुडूख (उरांव ) कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया तथा उड़िया भाषा के अतिरिक्त भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका, एवं भूमिज भाषा को राज्य के द्वितीय राजभाषा की मान्यता हेतु अधिसूचना 29 अगस्त 2018 को निर्गत है.

झारखंड सरकार कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राज्यभाषा विभाग की अधिसूचना संख्या 1426 दिनांक 10.03.2023 द्वारा निर्गत झारखंड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा संचालन नियमावली 2023 में उक्त 17 द्वितीय राज्यभाषाओं से 12 को क्षेत्रीय भाषा के रूप मान्यता दी गई है. जबकि भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका एवं भूमिज को वंचित रखा गया है.

delegation reached Raj Bhawan to appeal to the Governor
राज्यपाल के नाम ज्ञापन (ईटीवी भारत)

पलामू एवं संथाल परगना प्रमंडल सहित राज्य के मुख्य शहर रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो गोड्डा, देवघर, गिरिडीह, कोडरमा एवं चतरा में करोड़ों लोग इन भाषाओं को बोलते हैं, इन भाषाओं की साहित्य भी एक अमूल्य धरोहर है.

झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की अधिसूचना संख्या 453 दिनांक 18.02.2022 में जिलावार चिन्हित क्षेत्रीय भाषाओं में भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका एवं भूमिज के अतिरिक्त सभी भाषाओं को सम्मिलित किया गया है.

राज्यपाल से मुलाकात के बाद मंच के अध्यक्ष कैलाश यादव ने मीडियाकर्मियों से कहा कि इन भाषाओं को जब तक शामिल नहीं कर लिया जाता तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा.

राज्यपाल ने शिष्टमंडल को दिया भरोसा

शिष्टमंडल में शामिल अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अमरनाथ झा ने राज्यपाल से आग्रह करते हुए कहा कि राज्य के मान्यता प्राप्त द्वितीय राज्यभाषा में शामिल सभी 17 भाषाओं को उचित सम्मान एवं प्रोत्साहन देते हुए भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका एवं भूमिज को भी राज्य नियोजन नीति में क्षेत्रीय भाषा के रूप में न्यायसंगत समाहित करने के लिए राज्य सरकार व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अनुशंसा करने की कृपा की जाय.

शिष्टमंडल को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आश्वस्त करते हुए कहा कि मैं इस विषय में सरकार को पत्र लिखूंगा और इसे गंभीरता से अध्ययन करने का जिक्र करूंगा. राज्यपाल ने यह भी कहा कि इस विषय पर आप सभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात कर वार्ता कीजिए व अवगत कराइए. प्रतिनिधिमंडल में कैलाश यादव के अलावा अमरनाथ झा, सुधीर गोप, सुरेन्द्र मिश्रा राधेश्याम यादव, सुनील पांडेय शामिल थे.

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