अंडे की दुकान लगाने वाली लड़की राष्ट्रीय नेटबाल प्रतियोगिता में दिखाएगी जलवा
खिलाड़ी खुशबू गुप्ता के पिता की मौत कैंसर से हुई. पिता का सपना था कि उनकी बेटी खेल की दुनिया में नाम रोशन करे.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 30, 2025 at 4:56 PM IST
|Updated : August 30, 2025 at 5:13 PM IST
सरगुजा: अंबिकापुर में अंडे की दुकान चलाने वाले पिता की बेटी ने फिर बड़ा कमाल दिखाया है. खिलाड़ी खुशबू गुप्ता ने कैंसर से पिता की मौत के बाद भी अपना हौसला नहीं खोया. मां के साथ अंडे की दुकान चलाते हुए नेटबाल की कोचिंग जारी रखी. आज उसकी मेहनत रंग लाई है. नेटबाल की खिलाड़ी खुशबू गुप्ता का चयन पांचवी बार नेशनल गेम्स के लिए हुआ है.
राष्ट्रीय नेटबाल सीनियर प्रतियोगिता में हुआ चयन: अंबिकापुर की रहने वाली खुशबू गुप्ता को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय नेटबाल की सीनियर प्रतियोगिता की टीम में चयनित किया गया है. गांधीनगर में ये सिलेक्शन किया गया. खुशबू गुप्ता अब हरियाणा में आयोजित होने जा रही चौथी फास्ट फाइव सीनियर नेशनल नेटबॉल चैंपियनशिप के लिए छत्तीसगढ़ की टीम से खेलेंगी. यह प्रतियोगिता 28 अगस्त से 31 अगस्त 2025 तक हरियाणा में खेली जानी है.
हरियाणा में होगी प्रतियोगिता: खुशबू ने ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए बताया कि पांचवी बार नेशनल प्रतियोगिता में शामिल हो रही हैं, संघर्ष बहुत था लेकिन परिवार का साथ मुझे मिला. मेरे पिता अंडे और चने की दुकान चलाते थे. उसी दुकान से हमें पढ़ाया लिखाया. मेरे पिता की मौत कैंसर से हुई. अब हम लोग मिलकर दुकान को चलाते हैं. खुशबू कहती हैं कि हमने परिस्थितियों से हार नहीं मानी. जितनी मुश्किलें हुई उससे हमने संघर्ष किया.य
कोच ने की तारीफ: खुशबू के कोच राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि सरगुजा की खिलाड़ी खुशबू गुप्ता प्रतिदिन गांधी स्टेडियम के बास्केटबॉल ग्राउंड में अभ्यास करती हैं. अपनी निरंतर मेहनत और संघर्ष के बल पर उसने पहले भी नेटबॉल में सरगुजा को कई बड़ी उपलब्धियाँ दिलाई हैं. अब राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के महिला टीम सम्मिलित होकर राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी.
पढ़ाई के साथ खेल भी जारी: खुशबू गुप्ता की उम्र 21 साल है. वह बीकॉम फाइनल ईयर में पढ़ रही हैं. उनके पिता नरेश गुप्ता अंडे का ठेला लगाकर पत्नी और तीन बेटियों का पालन पोषण करते थे. वह कैंसर की बीमारी से ग्रस्त थे. 14 नवम्बर 2024 को उनकी मौत हो गई. पिता की मौत के बाद बेटियों पर पहाड़ टूट पड़ा. अपनी पढ़ाई, खेल का खर्चा और परिवार का पेट पालना एक बड़ी चुनौती थी. लेकिन नरेश गुप्ता की तीनों बेटियों ने हिम्मत नहीं हारी. सबने मिलकर एक दूसरे का साथ दिया और पिता के साथ देखे सपने को पूरा करने बेटियां निकल पड़ीं. खुशबू ने इससे पहले भी कई मेडल हासिल किये हैं. खुशबू अब तक 4 नेशनल खेल चुकी हैं और लास्ट दो प्रतियोगिता में भी उसने ब्रॉंज मेडल हासिल किया था.

