'जिस पार्टी को खत्म करने का संकल्प लिए थे लालू, आज उसी की गोद में..', नित्यानंद राय
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने लालू यादव पर कांग्रेस से गठबंधन को लेकर निशाना साधा. कहा कि शायद लालू यादव आपातकाल को भूल गए.

Published : June 29, 2025 at 2:15 PM IST
दरभंगा: लालू यादव जिस पार्टी को खत्म करने का संकल्प लिए थे, आज उसी की गोद में जाकर बैठ गए हैं. आपातकाल की घटना को याद दिलाते हुए नित्यानंद राय ने दरभंगा में लालू यादव पर निशाना साधा. उन्होंने मीसा भारती को बहन कहते हुए कहा कि वे लालू यादव को उनके संकल्प को याद दिलाएं.
शनिवार को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय दरभंगा के अलीनगर विधानसभा के पाली स्थित एक संगोष्ठी सह जनसभा कार्यक्रम में भाल लिए. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने राजद और कांग्रेस को खड़ी खोटी सुनाई.
"लालू यादव की बेटी मीसा भारती के नाम पर ही मीसा कानून बना हुआ है. पिता आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में कांग्रेस को मिटाने की शपथ ली थी. आज लालू यादव संविधान के हत्यारे कांग्रेस की गोद मे जाकर बैठ गए. मुझे विश्वास है कि बहन मीसा पिता को आपातकाल की घटना याद दिलाने में सफल होंगी." -नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री
जैसे-जैसे बिहार चुनाव का समय नजदीक आ रहा, वैसे-वैसे ही पक्ष-विपक्ष के नेताओं का हमला एक-दूसरे पर बढ़ने लगा है. आपातकाल के 50 वां वर्ष पूरे होने पर भाजपा के द्वारा काले अध्याय का 50वां वर्ष पूरे देश में जनसभा के माध्यम से मनाया जा रहा है.
दरभंगा में केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके नेता संविधान कि प्रतियां लेकर जेब में घूमते हैं. नरेन्द्र मोदी अपने दिल में संविधान लेकर चलते हैं. कांग्रेस को देश के सम्मान से कोई मतलब नहीं है. राहुल गांधी देश में ही पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं, जो पाकिस्तान बोल रहा है. उसके सुर से सुर मिला रहे हैं.

मीसा कानून क्या है?: आंतरिक सुरक्षा अधिनयम 'MISA' (The Maintenance of Internal Security Act) 1971 में कांग्रेस की सरकार में संसद द्वारा पारित विवादित कानून था. 1977 में जनता पार्टी सत्ता में आयी, इसके बाद इस कानून को निरस्त कर दिया गया था.
इस कानून के तहत भारत के प्रधानमंत्री और देश के जांच एजेंसी को अधिक शक्ति दी गयी थी. इसके तहत अनिश्चितकालीन निवारक हिरासत, बिना वारंट संपत्ति की तलाशी, जब्ती और वायरटैपिंग आदि था. आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों से निपटना आदि शामिल है.
1975-77 में आपातकाल के दौरान इस कानून में कई संसोधन किए गए. कानून में कई बार संसोधन कर राजनीतिक असंतोष को दबाने के लिए इसका इस्तेमाल कांग्रेस के द्वारा खूब किया गया था.
आपातकाल के दौरान विरोधी को इसी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था. 1 लाख लोग जिसमें पत्रकार, लेखक, विपक्ष पार्टी के नेता और राजनेता शामिल थे, जिन्हें बिना किसी सुनवाई के 18 महीनों तक जेल में रखा गया.
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