इस घर में एक-दो नहीं, 15 सदस्य हैं CA, सभी अलग-अलग डिपार्टमेंट के महारथी
नेशनल चार्टर्ड अकाउंटेंट डे पर मिलिए राजस्थान के जयपुर के ऐसे परिवार से, जिसमें 15 सदस्य सीए हैं.

Published : July 1, 2025 at 9:32 AM IST
जयपुर : चार्टर्ड अकाउंटेंसी को भारत में सबसे कठिन प्रोफेशन में गिना जाता है, लेकिन जयपुर का आकड़ परिवार इसे सिर्फ करियर नहीं, परंपरा और विरासत मानता है. एक ही खानदान में 15 सीए सदस्य और हर कोई किसी न किसी खास फाइनेंशियल डिपार्टमेंट में महारथ रखता है. राघव कृष्ण आकड़ से ये सफर शुरू हुआ और अब इसमें बेटे, बहुएं, बेटियां, दामाद और भतीजे-भतीजियां सभी शामिल हैं. पेशेवर डेडिकेशन और पारिवारिक समर्पण का ये ऐसा संगम है, जिसकी मिसाल देशभर में विरली ही मिलेगी.
नेशनल सीए डे पर मिलिए ऐसे परिवार से, जहां हर सदस्य की पहचान सिर्फ रिश्ते से नहीं, पेशे से भी है. ये पेशा है चार्टर्ड अकाउंटेंसी. किसी ने जीएसटी संभाल रखा है तो कोई फ्रॉड डिटेक्शन में माहिर है. सीए प्रोफेशन के हर विभाग के एक्सपर्ट एक ही खानदान में मौजूद हैं. ईटीवी भारत से खास बातचीत में घर के प्रधान राघव कृष्ण आकड़ ने बताया कि उनके घर में सबसे पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट वो खुद हैं. शुरुआत से ही उनका पढ़ाई में बहुत इंटरेस्ट था. जब हायर सेकेंडरी पास की तब ये डिसाइड करना था कि आगे क्या करना है. ऐसे में उनके पास कुछ सुझाव डॉक्टरी करने के आए तो किसी ने उन्हें सीए बनने का सुझाव दिया. उनका व्यक्तिगत इंटरेस्ट कॉमर्स में ज्यादा था. इस वजह से उन्होंने सीए को चुना और फिर वो बहुत जल्दी सीए बन गए. हालांकि, उस दौर में रिजल्ट 2% ही रहता था.
15 सीए का घर : घर में सीए बनने की शुरुआत राघव कृष्ण आकड़ से हुई और आज उनके परिवार में 15 सदस्य सीए हैं, जिनमें बेटे, बहुएं, बेटियां, दामाद और भाई तक शामिल हैं. सभी सीए प्रोफेशन से जुड़े अलग-अलग विभाग के महारथी हैं. महज 20 वर्ष की उम्र में सीए जैसी मुश्किल पढ़ाई को पास करने वाले सीए परिवार के सदस्य जय आकड़ ने बताया कि परिवार के 10 सदस्य एक साथ एक ही जगह पर काम करते हैं, लेकिन सभी के अलग-अलग डिपार्टमेंट बंटे हुए हैं. उनकी धर्मपत्नी परिधि जीएसटी का काम देखती हैं. पिताजी और चाचाजी टीडीएस और इनकम टैक्स हैंडल करते हैं. वो खुद लिटिगेशन हैंडल करते हैं. वर्कप्लेस पर सिर्फ काम होता है. घर पर घर की ही बातें करते हैं. हालांकि, क्लोजिंग मंथ और सितंबर की फाइलिंग के वक्त डिनर टेबल पर ही अकाउंटिंग और क्लाइंट्स की चर्चा शुरू हो जाती है.

बेटे-बहू, बेटी-दामाद भी सीए : घर में सीए गौरांग आकड़ सबसे छोटे हैं और सबसे ज्यादा अटेंप्ट के बाद वो सीए बने. आज उनके पास सबसे बड़े क्लाइंट्स हैं. यही वजह है कि परिवार का हर सदस्य उन पर गर्व करता है. इंटरनल ऑडिट की जब भी बात आती है तो सब उन्हीं की तरफ देखते हैं. सीए आरके आकड़ ने बताया कि परिवार में उनके बड़े भाई की बेटी, दोनों बेटे और दोनों बहुएं सीए हैं. इसी तरह उनके बेटे-बहू और बेटी-दामाद सीए हैं. उनसे छोटे भाई के बेटी-दामाद और सबसे छोटे भाई खुद भी सीए हैं. उनके बेटे और बेटी भी सीए हैं. जीएसटी स्पेशलिस्ट और आरके आकड़ की बहू परिधि आकड़ बताती हैं कि ये उनकी डेस्टिनी ही थी कि उन्हें एक सीए परिवार से जुड़ना था. शायद इसी वजह से वो सीए बनी. हालांकि, पहले प्लान कुछ और था. उन्होंने नई जनरेशन के लिए ये फील्ड सेफ बताते हुए कहा कि ये एक अच्छी लाइन है और आपको अच्छे मुकाम तक पहुंचा सकती है.

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एआई और इनोवेशन की तरफ बढ़ते कदम : वहीं, अब इस सीए परिवार का ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फ्रॉड डिटेक्शन टेक्नोलॉजी की ओर है, ताकि काम को और अधिक फाइन-ट्यून किया जा सके. राघव कृष्ण ने बताया कि सीए का भविष्य अच्छा है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी बात डेडिकेशन और मेहनत की है. वो खुद अपने ग्रुप के साथ रोज नए इनोवेशन करते रहते हैं. डिपार्मेंट वाइज सभी अपने-अपने क्षेत्र में अच्छा कर रहे हैं, लेकिन अब नई पीढ़ी को एआई का काम सौंपा गया है. वो खुद भी इसमें इंवॉल्व होते हैं ताकि फ्रॉड डिडक्शन लॉकेट किए जा सकें.

बहरहाल, जयपुर के आकड़ परिवार की कहानी सिर्फ अकाउंटिंग या टैक्स की नहीं है, ये परिवारिक एकता, प्रोफेशनल डिसिप्लिन और पीढ़ियों तक ज्ञान और अनुभव के ट्रांसफर की प्रेरणादायक मिसाल है. नेशनल सीए डे पर जब देश चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की उपलब्धियों को याद करता है, उस वक्त इस सीए फैमिली की कहानी हर युवा के लिए मिसाल बन सकती है.


