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RIMS-2 विवाद पर पूर्व मुख्यमंत्री बोले- जब भी आदिवासियों की जमीन छीनने का प्रयास होगा, चंपाई सोरेन खड़े मिलेंगे

RIMS-2 जमीन विवाद को लेकर चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन नहीं छीनने देंगे.

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पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 25, 2025 at 12:55 PM IST

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रांची: पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक चंपाई सोरेन और नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर रविवार को कांके प्रखंड के नगड़ी में लोगों ने हल चलाया और धान रोपनी की. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी दागे. इससे पहले चंपाई सोरेन को हाउस अरेस्ट कर लिया गया था.

मीडिया से बातचीत करते चंपाई सोरेन (ETV BHARAT)

इस लेकर चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कांके नगड़ी के किसानों की उपजाऊ जमीन को जबरन छीनना चाहती है. उन्होंने कहा कि 1957 में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के लिए जब यह भूमि अधिगृहित करने की कोशिश की गई थी, तब रैयतों ने उसका तगड़ा विरोध किया था. इस भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 153 पंचायतियों में से 128 ने अधिग्रहण का विरोध करते हुए भुगतान लेने से इंकार कर दिया था तो फिर यह अधिग्रहण पूरा कैसे हुआ?

वैसे भी जब यह अधिग्रहण रिम्स-2 के नाम पर हुआ ही नहीं तो फिर सरकार सीएनटी एवं भूमि अधिग्रहण अधिनियम का उल्लंघन क्यों कर रही है? उन्होंने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि विश्वविद्यालय उक्त भूमि को अधिगृहित नहीं कर पाई है. इस वजह से उस भूमि पर कभी घेराबंदी तक नहीं की गई, लेकिन इस सरकार ने कई दशकों बाद उसे हथियाने का षडयंत्र रचा है, जो स्वीकार नही है.

पूर्व सीएम ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि झारखंड में जब कभी और कहीं भी आदिवासियों की जमीन छीनने का प्रयास होगा, हर जगह चंपाई सोरेन उसके खिलाफ खड़ा मिलेगा. हम सरकार को रैयतों की एक इंच भी जमीन जबरन नहीं लेने देंगे. चंपाई सोरेन ने इस आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता के लिए इससे जुड़े सभी आदिवासी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, किसानों समेत आदिवासी-मूलवासी समाज के लोगों को धन्यवाद भी दिया.

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