नवापारा सीएचसी में बंद हुई कैंसर जांच व कीमोथेरेपी की सुविधा
अंबिकापुर के नवापारा सीएचसी में कैंसर रोग विशेषज्ञ ने इस्तीफा दे दिया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : September 30, 2025 at 7:05 PM IST
|Updated : October 1, 2025 at 12:17 PM IST
सरगुजा: कैंसर रोगियों को अब अंबिकापुर के नवापारा सीएचसी में कैंसर जांच व उपचार की सुविधा नहीं मिल पाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि अस्पताल में पदस्थ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है. उनके नौकरी छोड़कर जाने से अब सीएचसी में आने वाले कैंसर रोगियों की परेशानी और चिंताएं बढ़ गई है. ऐसे मरीज जिनके पास इस महंगे उपचार के लिए ना ही पैसे है और ना संसाधन उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, हैरानी की बात तो यह है कि चिकित्सक को रोकने के लिए अधिकारियों की ओर से कोई पहल भी नहीं की गई है.
सरगुजा में बढ़ रही कैंसर मरीजों की संख्या: सरगुजा संभाग में कैंसर के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. बड़ी संख्या में लोग विभिन्न प्रकार के कैंसर की बीमारियों से जूझ रहे है. ऐसे कैंसर मरीजों को जांच व कीमो थेरेपी जैसी सुविधा के लिए रायपुर सहित अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था. इस घातक बीमारी से जूझने के साथ ही मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ता था. आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए इतने महंगे उपचार का भार उठाना भी संभव नहीं है. यही वजह है कि शहर के शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवापारा में कैंसर रोगियों के लिए कैंसर डे केयर व कीमोथेरेपी की सुविधा शुरू की गई थी.
नवापारा सीएचसी में साल 2021 से कैंसर मरीजों का हो रहा इलाज: अस्पताल में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु गुप्ता की निगरानी में वर्ष 2021 में सीएचसी नवापारा में कैंसर रोगियों की स्क्रीनिंग करने के साथ ही प्राथमिक उपचार और सबसे महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दी जा रही थी. पिछले तीन वर्ष के आंकड़ों पर ही नजर डाले तो यहां
नवापारा सीएचसी में 2754 कैंसर मरीजों का इलाज: सितंबर 2022 से सितंबर 2025 के मध्य नवापारा सीएचसी में 4 हजार 756 लोगों की स्क्रीनिंग की गई. इसमें से 2 हजार 754 लोगों का उपचार चल रहा है और उन्हें कीमो थेरेपी दी जा रही थी.
इनमें सिर्फ 2025 की बात की जाए तो अस्पताल में 1 हजार 372 लोगों की स्क्रीनिंग की गई जिसमें 657 लोगों का उपचार चल रहा है. इनमें ब्रेस्ट कैंसर, ओरल कैंसर, सर्विक्स कैंसर, ओवरी कैंसर के साथ मल्टीपल माइलोमा के मरीज शामिल है.
पड़ोसी राज्यों के कैंसर मरीजों का भी होता है इलाज: नवापारा सीएचसी में कैंसर मरीजों के लिए जांच और कीमोथेरेपी की सुविधा शुरू होने के बाद एक तरह से वरदान ही था. इस अस्पताल में ना सिर्फ सरगुजा संभाग बल्कि पड़ोसी राज्य झारखंड से भी कैंसर के मरीज कीमो थेरेपी के लिए आते थे. नवापारा सीएचसी में आने वाले मरीज मध्यम और गरीब वर्ग के है और उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपने उपचार का खर्च वहन कर सके.
अस्पताल में ब्लड चढ़वाने आए ब्लड कैंसर के मरीज असोला निवासी रज्जाक अंसारी ने बताया "दो साल से उनका उपचार निःशुल्क चल रहा है और उन्हें डेढ़ से दो माह में ब्लड चढ़ता है, सप्ताह में कीमो थेरेपी होती है. अब डॉ. हिमांशु के जाने से खासी परेशानियों का सामना करना पडेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार कीमो नहीं रहने पर अस्पताल में बाहर से दवा मंगवाकर नि:शुल्क कीमो किया गया लेकिन अब उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पाएगी और उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे निजी अस्पताल में इतना खर्च वहन कर सके."
कैंसर मरीजों का मुफ्त में होता है महंगा इलाज: कैंसर जितनी घातक बीमारी है उसका उपचार भी उतना ही मंहगा है. कैंसर के मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार कीमो थेरेपी की जरुरत पड़ती है, जो एक कठिन और कष्टदायक प्रक्रिया है. कीमो थेरेपी विशेषज्ञ चिकित्सक की निगरानी में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ द्वारा ही किया जाता था. मरीजों को पैकली, कार्बो, बिवेक्सी, ट्रांट जैसी महंगी दवाओं के साथ ही रिटुक्जी, सीटुक्जी जैसी 80-80 हजार की दवाएं निःशुल्क उपचार के लिए उपलब्ध कराई जाती थी. ऐसे में अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि चिकित्सक के जाने से लोगों को किस तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.
कैंसर रोग विशेषज्ञ के इस्तीफा का कारण: नवापरा सीएचसी में कार्यरत डॉ. हिमांशु एमडी रेडियो थेरेपी है. एक कैंसर रोग विशेषज्ञ जिन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा करने के उद्देश्य से सीएचसी नवापारा में जॉइनिंग दी थी. इस दौरान उन्हें एक जनरल डॉक्टर के रूप में महज 50 हजार रुपए का वेतन दिया जाता था लेकिन आयुष्मान सहित अन्य इंसेंटिव से उन्हें एक सम्मान जनक वेतन मिल जाता था.
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद डेढ़ साल से इंसेंटिव आना बंद है और शासकीय चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस भी नहीं कर सकते. लम्बे समय तक परेशान होने के बाद उन्होंने जुलाई माह में ही अपना इस्तीफा दे दिया था लेकिन उन्हें आश्वासन मिला था कि उनकी बातों को सुना जाएगा लेकिन अब तक कोई पहल नहीं की गई. ऐसे में उन्होंने 25 सितम्बर को इस्तीफा दे दिया, हैरानी की बात तो यह है कि एक विशेषज्ञ चिकित्सक को रोकने के लिए कोई पहल नहीं की गई जबकि पूर्व में कई चिकित्सकों को डीएमएफ से लाखों रुपए का वेतन जारी हो चुका है.
इस मामले में जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ जेके रेलवानी ने बताया " डॉ हिमांशु अपने वेतन से संतुष्ट नहीं थे, ऐसा उन्होंने अपने पत्र में बताया है, उनका कहना है कि एक विशेषज्ञ चिकित्सक का वेतन जब तक उनको नहीं दिया जाता वो कार्य करने में असमर्थ हैं. अभी उनको करीब 62 हजार रुपये एनएचएम के माध्यम से दिया जाता है. अगर वो ज्वाइन नहीं करते है तो अन्य विकल्प देखा जाएगा, फिलहाल डॉ हिमांशू से निवेदन करेंगे कि जब तक दूसरी व्यवस्था नही हो जाती है तब तक वो मरीजो को देख लें".
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीएस मार्को ने इस मामले में कहा "नवापारा सीएचसी में कीमोथेरेपी बंद होने की जानकारी मिली है. उनकी समस्याओं से शासन और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया था, जानकारी शासन को भेजी जा रही है".

