महाबोधि मंदिर पर नियंत्रण को लेकर बवाल तय! CM नीतीश से मिलेंगे 300 बौद्ध भिक्षु
बोधगया में 12 फरवरी से बौद्ध भिक्षु लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को खत्म किया जाए.

Published : May 4, 2025 at 6:38 PM IST
|Updated : May 4, 2025 at 8:05 PM IST
गया: "मस्जिद को मुसलमान, मंदिर को हिंदू, गुरुद्वारा को सिख लेकिन महाबोधि मंदिर में हिंदुओं को भी शामिल किया गया है. 2 साल से कोशिश कर रहे हैं लेकिन बिहार सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है.यह मामला आज का नहीं है बल्कि 1890 से चल रहा है." यह कहना है ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फॉर्म के जनरल सेक्रेटरी आकाश लामा का.
गया से बौद्ध भिक्षु पटना रवाना: दरअसल, बिहार के गया में विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल बोधगया में 12 फरवरी से बौद्ध भिक्षुओं का धरना प्रदर्शन जारी है. उनकी मांग है कि बीटी एक्ट यानी बोधगया टेंपल एक्ट 1949 खत्म किया जाए. महाबोधि मंदिर पर नियंत्रण को लेकर बौद्ध भिक्षु पिछले 82 दिनों से धरने पर बैठे हैं. रविवार को 82 दिनों बाद धरने से उठ कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने पटना तक की पैदल यात्रा पर निकले हैं.
12 फरवरी से प्रदर्शन शुरू: 12 फरवरी 2025 को एक बार फिर से इसी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू हुआ. हालांकि 12 फरवरी को बौद्ध भिक्षु पहले महाबोधि मंदिर के पास आमरण अनशन पर बैठे थे लेकिन बाद में आमरण अनशन खत्म कर ये धरने के तौर बदल गया और तभी से ये बोधगया दोमुहान के पास स्थित संबोधि द्वारा के पास अनिश्चितकाल करने पर बैठे हैं.
बुद्ध पूर्णिमा सीएम को देंगे निमंत्रण: ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फॉर्म के जनरल सेक्रेटरी आकाश लामा ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर एक्ट को समाप्त करने की मांग के साथ उन्हें बुद्ध पूर्णिमा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रण भी देंगे. जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुद्धपूर्णिमा के कार्यक्रम में और धरना स्थल पर आएं और हम लोगों की समस्या को देखें.

"5 मई की रात को यात्रा पटना पहुंचेगी. 6 मई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने का समय मांगा गया है. ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फॉर्म और दूसरे बौद्ध संगठनों के द्वारा यात्रा निकाली गई है. पिछले 82 दिनों से यह धरने पर बैठे थे. बीटी एक्ट बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को खत्म करने की मांग है." -आकाश लामा, ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फॉर्म के जनरल सेक्रेटरी

हिंदू समुदाय के लोगों को हटाने की मांग: असल में एक्ट के तहत बनने वाली बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी 'बीटीएमसी' में बौद्धों के साथ-साथ गैर बुद्धिस्ट 'हिंदू समुदाय' के लोगों को सरकार द्वारा सदस्य बनाने का प्रावधान है. जिसका विरोध बौद्ध भिक्षु लंबे समय से कर रहे हैं. पहली बार महाबोधि मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी बुद्धिस्टों के हाथों में सौंपने की मांग 1890 में उठी थी.

90 के दशक से है मांग: बौद्ध धर्मावलंबियों की यह मांग 90 के दशक से हैं. अभी आंदोलन करने वालों से जिला प्रशासन और गृह विभाग के अधिकारी की शुरुआती दौर में ही बातचीत हुई थी लेकिन मसाले का हल नहीं निकाला जा सका.
दोमुहान में धरना-प्रदर्शन : राजधानी पटना से 125 किलोमीटर दूर गया जिले के शहर बोधगया में ऊपर से सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन रह-रहकर दूसरे राज्यों से आए लोग छोटे समूह में स्थानीय लोगों से पूछते हैं दोमुहान जाना है, कैसे जाएं ? क्योंकि यहीं पर धरना प्रदर्शन हो रहा है. महाराष्ट्र के नागपुर से आए एक कम उम्र के भंते माहाना जो पैदल यात्रा में भी शामिल थे.

"महाराष्ट्र से बहुत सारे लोग यहां आए हैं. पहले हम लोग यहां आकर धरने पर बैठे थे, क्योंकि हमारे महाबोधि को हमें नहीं दिया जा रहा है. आज हम एक बड़े समूह के साथ पटना पैदल यात्रा में साथ जा रहे हैं. यह हमारा धार्मिक मामला है. हम महाराष्ट्र से आए हैं और तब तक यहां साथ रहेंगे जब तक एक्ट को खत्म नहीं किया जाता."-भंते माहना, नागपुर
3 लाख बुद्ध पूर्णिमा में होंगे शामिल: प्रज्ञा मित्र बौद्ध भिक्षु कहते हैं कि इस बार बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 3 लाख श्रद्धालु आएंगे. उनका दावा है की बुद्ध पूर्णिमा में आने वाले देश भर के बौद्ध भिक्षु धरने में भी शामिल होंगे. बुद्ध पूर्णिमा के कार्यक्रम को लेकर बड़े स्तर पर धरना स्थल पर भी तैयारी चल रही है.
आंदोलन नहीं रुकेगा: जयपुर से आए प्रज्ञा मित्र बौद्ध ने कहा के "हम लोग बोधगया से पैदल यात्रा पर निकले हैं. मुख्यमंत्री बिहार से मिलकर उन्हें बुद्ध पूर्णिमा में आने का आमंत्रण देंगे हमारी मांग है कि बीटी एक्ट 1949 को खत्म कर हमें महाबोधि महाविहार का पूर्ण अधिकार दें. यह लड़ाई 134 सालों से चलती आ रही है और जब तक पूरी नहीं होती है तब तक चलती रहेगी, हम अपनी मांग को मनवाने के लिए धरना प्रदर्शन करते रहेंगे."
महाबोधि महाविहार केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि बौद्ध समाज की आस्था, अस्मिता और अधिकार का प्रतीक है। यह घोर अन्याय है कि भगवान बुद्ध की ज्ञान स्थली आज भी गैर-बौद्धों के हस्तक्षेप में जकड़ी हुई है। महाबोधि महाविहार पर बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों का प्राकृतिक और ऐतिहासिक अधिकार… pic.twitter.com/YbwtNMGm7l
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) February 19, 2025
विदेश से मिल रहा है नैतिक सपोर्ट: राजस्थान के जयपुर के रहने वाले प्रज्ञा मित्र धरने के शुरुआत से ही यहां मौजूद है. उन्होंने कहा कि विदेशी राजनयिकों का जो उनके नीतियों के तहत सहयोग होना चाहिए वह हो रहा है. भारत सरकार से कई देशों की बात हुई है जो यहां के हालात हैं उसके बारे में भी कई देशों से आवाज भी उठी है. प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका दौरे पर थे तो वहां के संघनायक से जो बात हुई उसमें यह भी मुद्दा शामिल था. थाईलैंड, लॉस और छोटे-छोटे कई देशों से हमें नैतिक सपोर्ट मिल रहा है.
कांग्रेस के अधिवेशन में उठा मुद्दा: यह मुद्दा साल 1922 में गया में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में भी उठा था. देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सहित कई नेताओं के हस्तक्षेप के बाद अक्टूबर 1948 में बोधगया टेंपल बिल बिहार विधानसभा में लाया गया था जो 1949 में अस्तित्व में आया. 28 मई 1953 को पहले बोधगया टेंपल मैनेजमेंट बीटीएमसी ने अपना कार्यभार संभाला था.

कब मिला अधिकार?: अक्टूबर 1948 में बोधगया टेंपल बिल बिहार विधानसभा में लाया गया जो 1949 में अस्तित्व में आया. बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था सम्राट अशोक ने इस जगह तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व एक मंदिर बनवाया था. धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आकाश लामा ने कहा कि संसार में किसी भी धार्मिक स्थल पर दूसरे धर्म का कब्जा नहीं है.

राज्य सरकार सदस्यों को करती है नामित: बीटीएमसी एक्ट 1949 के तहत प्रबंधन समिति में हिंदू समुदाय के चार लोग सदस्य बनाए जाते हैं. सदस्यों को नामित करने का अधिकार राज्य सरकार को है और सरकार के गृह विभाग की. वर्तमान में कमेटी में 7 सदस्य ही हैं. दो सीट वेकेंट है. वर्तमान कमेटी के सचिव महाशेवता महारथी हैं. जब के सदस्य के रूप में हिंदू समुदाय से अरविंद कुमार सिंह और मिथुन मांझी हैं. बुद्धिस्ट में प्रेमा भंते और किरण लामा भी हैं.
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