पुस्तक मेला में उमड़ी पुस्तक प्रेमियों की भीड़, लोगों ने कहा- सोशल मीडिया के युग में भी किताबों का काफी महत्व
धनबाद में पुस्तक मेला में लोगों की भीड़ उमड़ रही है. इस दौरान कुछ लोगों ने पुस्तकों के महत्व पर अपनी बातें रखीं.

Published : April 10, 2025 at 4:01 PM IST
धनबाद: किताबों की अपनी अलग ही दुनिया है. भले ही लोग आधुनिक युग में मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हों, लेकिन आज भी कुछ ऐसे वर्ग हैं जो किताबों में दिलचस्पी रखते हैं. आज बच्चे या फिर युवा पीढ़ी सोशल मीडिया या मोबाइल पर ज्यादा समय बीताते हैं. घर में माता-पिता या बड़े-बुजुर्ग भी मोबाइल पर ज्यादा समय देते हैं. उनके हाथों में किताबों की जगह मोबाइल ने ले ली है. यही वजह है कि बच्चे भी बड़े का अनुसरण कर रहे हैं, लेकिन अब भी कई ऐसे लोग हैं जो किताबों को महत्व देते हैं.
धनबाद के हीरापुर जिला परिषद मैदान में आयोजित बुक फेयर में पुस्तक प्रेमियों के आने का सिलसिला जारी है. लोग अपनी-अपनी रुचि की किताबें खरीद रहे हैं. इस दौरान ईटीवी भारत ने कुछ लोगों से बातचीत की. जिसमें लोगों ने आज के आधुनिक दौर में किताबों के महत्व के बारे में अपनी बातें रखीं.
किताबें पढ़ने की रुचि घर से महौल से
इस संबंध में डॉक्टर अमरेश चौधरी ने कहा कि किताबों के अंदर रुचि रखना घर के माहौल से पैसा होता है. किताबों के लिए घर में परिवार के बीच एक नैसर्गिक माहौल का होना बेहद जरूरी है. अगर घर में बड़े मोबाइल पर हमेशा लगे रहेंगे तो उनके बच्चे भी मोबाइल के प्रति ही आकर्षित होंगे. बड़ों को अगर बच्चे किताब पढ़ते हुए देखेंगे तभी उनके अंदर भी किताब पढ़ने की इच्छा जगेगी. उन्होंने कहा कि लोग अब किताबें पढ़ना धीरे-धीरे छोड़ चुके हैं.

डिजिटल क्रांति का युग है. लोग मोबाइल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. लोग हर चीज आज मोबाइल में ही खोजते हैं. उन्होंने कहा कि ज्ञान कहीं से भी अर्जित की जा सकती है. लेकिन उसमें सबसे पहले घर है. घर में अगर किताबों की अहमियत है तो उसकी ज्ञान की पिपासा हमेशा रहेगी. दूसरी बात है कि अगर लिखित फॉर्मेट में कोई चीज रहती है तो उसका अध्ययन हम बार-बार कर सकते हैं. बार-बार पढ़ने से हमें चीजें अच्छी तरह से समझ में आती हैं.
बच्चों को कहानियां पढ़कर सुनाएं
वहीं बुक फेयर में किताबें खरीदने पहुंचीं श्वेता ने कहा कि बच्चे अगर चार साल या पांच साल के करीब उम्र के हैं तो उन्हें उनके माता-पिता या फिर बुजुर्ग किताबों से कहानियां पढ़कर सुनाएं. एक तो इससे बच्चों को कहानियों में रुचि बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर वह किताबों के जरिए शब्दों का उच्चारण सही-सही कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि किताबों की अपनी ही एक दुनिया है. यहां कई चीजें मौजूद हैं, जो शायद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नहीं मिल सकते.

मोबाइल से ज्यादा किताबों का महत्व
वहीं 10वीं की छात्रा मानुषी चटर्जी ने बताया कि किताबों में कहानियां या फिर ज्ञानवर्धक चीजें पढ़ना ज्यादा अच्छा है. मोबाइल से हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है. किताबें हम कभी भी निकालकर बार-बार पढ़ सकते हैं. मोबाइल फोन जरूरी है, लेकिन जीवन में किताबों का होना भी जरूरी है. किताबें पढ़ने से रीडिंग स्किल भी डेवलप होता है.

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