नीतीश सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेगी बिहार पुलिस, मांग पूरी नहीं होने पर दी ये चेतावनी
चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ ने नीतीश सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया है. साथ ही ट्रेड सिपाही व्यवस्था लागू ना करने पर आंदोलन की बात कही.

Published : June 24, 2025 at 10:25 AM IST
पटना: राजधानी पटना के केंद्रीय कार्यालय में पुलिस विभाग में कार्यरत चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों ने एकत्र होकर बिहार सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है. इन कर्मचारियों का कहना है कि झारखंड और उत्तराखंड जैसे राज्यों में ट्रेड सिपाही व्यवस्था लागू कर दी गई है, लेकिन बिहार में यह प्रक्रिया अब तक लंबित है, जिसको लेकर चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ द्वारा मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र भी दिया जा चुका है.
चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों में नाराजगी: चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामानुज राय ने बताया कि अन्य राज्यों में अब चतुर्थवर्गीय कर्मचारी जैसे रसोइया, सफाईकर्मी और नाई को ट्रेड सिपाही के रूप में समायोजित कर पदोन्नति और वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है, जबकि बिहार में वर्षों से काम कर रहे कर्मियों को सिर्फ आश्वासन मिलते आए हैं. अब जन आंदोलन किया जाएगा.
''हम तब से इंतजार कर रहे हैं, जब से नौकरी में आए थे. अब रिटायरमेंट नजदीक है, लेकिन कोई हलचल नहीं दिख रही है. मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ वादे मिले हैं. अब चुप नहीं बैठेंगे. आर-पार की लड़ाई होगी''. रामानुज राय, प्रदेश अध्यक्ष, चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ
कर्मचारियों का हो रहा शोषण: चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ के जनरल सचिव मोहन शंकर तिवारी ने भी वरीय अधिकारियों पर शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग में वर्षों से नई बहाली नहीं हुई है और जो पुराने कर्मचारी हैं, उन पर काम का अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है.
''एक-एक अधिकारी हमारे 10-10 साथियों से निजी कार्य करवाते हैं. जब कोई कर्मचारी विरोध करता है, तो उन्हें सस्पेंड कर दिया जाता है या सेवा से मुक्त कर दिया जाता है. यह बेगारी ड्यूटी है और यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है''. मोहन शंकर तिवारी, जनरल सचिव, चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ

मांग पूरी ना होने पर होगा आंदोलन: जनरल सेक्रेट्री मोहन शंकर तिवारी ने सरकार से मांग की है कि झारखंड और उत्तराखंड की तर्ज पर बिहार के भी चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को ट्रेड सिपाही में समायोजित किया जाए. साथ ही चेतावनी दी कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा. पहले भी इन लोगों द्वारा अपनी मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन किया गया है.
ये भी पढ़ें-

