सर्वेक्षण संविदा कर्मियों की बर्खास्तगी से नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर संकट, वापसी के मूड में नहीं सरकार
खुद को परमानेंट कराने के लिए हड़ताल पर गए सर्वेक्षण संविदा कर्मी अपनी नौकरी ही गंवा बैठे, सरकार ने प्रदर्शन को बड़ा अनुशासनहीनता माना-


Published : September 6, 2025 at 4:24 PM IST
|Updated : September 6, 2025 at 4:42 PM IST
पटना : बिहार में भूमि सर्वे और राजस्व महाभियान की गुत्थियां ग्रामीणों को उलझा रही हैं. संविदा कर्मियों की हड़ताल और विभाग की ओर से सेवा समाप्ति ने हालात को और पेंचीदा बना दिया है. नौकरी परमानेंट करने की मांग को लेकर संविदा कर्मी पटना में धरना प्रदर्शन करने आए थे और अब नौकरी गंवा बैठे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट भूमि सर्वेक्षण आखिर कब तक पूरा होगा.
7480 संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त : भूमि सर्वे का काम शुरू हुए करीब एक साल हो चुका है लेकिन चुनावी साल आते ही रुकावटें खड़ी हो रही हैं. पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 7480 संविदा कर्मियों ने हड़ताल की. विभाग ने उनकी सेवा समाप्त कर दी और नए सिरे से बहाली का ऐलान कर दिया. जिनके चेहरे पर कभी नौकरी की खुशी थी, अब वह मायूसी में बदल चुकी है.

'नियुक्ति नियमावली में संशोधन क्यों नहीं?' : नौकरी गंवाने वाली राधिका कुमारी ने भावुक होकर कहा कि जब संविधान में संशोधन हो सकता है तो नियुक्ति नियमावली में क्यों नहीं. उन्होंने कहा कि नौकरी की सुरक्षा उनका अधिकार है और सरकार ने गलत किया है.
'परिवार को नौकरी जाने की नहीं जानकारी' : राधिका ने बताया कि महीने में ₹30000 की आय से वह आत्मनिर्भर थीं लेकिन नौकरी जाते ही सब खत्म हो गया. उनके परिवार को भी यह जानकारी नहीं है कि नौकरी चली गई है. वह सोचकर परेशान हैं कि जब घरवालों को सच्चाई पता चलेगी तो उन पर क्या बीतेगी.
महिला सशक्तिकरण पर सवाल : रूपम कुमारी ने कहा कि 22 दिन से हड़ताल पर बैठने के बावजूद विभाग सुध लेने नहीं आया. उल्टे उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. उन्होंने पूछा कि क्या यही महिला सशक्तिकरण है और क्या वह बिहार की बेटी नहीं हैं.

''22 दिन से हड़ताल पर हम लोग बैठी हुई हैं, लेकिन विभाग और सरकार की ओर से कोई सुध लेने वाला नहीं आया. उल्टे हम लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है. क्या यही सरकार का महिला सशक्तिकरण है? क्या मैं बिहार की बेटी नहीं हूं. हम लोगों ने 60 साल की उम्र तक के लिए नौकरी के स्थायित्व की मांग कर दी तो क्या गलत कर दिया? सरकार को बर्खास्तगी का आदेश तुरंत वापस लेना चाहिए.''- रूपम कुमारी, बर्खास्त संविदा कर्मी, भूमि सुधार विभाग
7000 से अधिक परिवारों पर संकट : ललित कुमार ने कहा कि सरकार ने हजारों परिवारों का चूल्हा बुझा दिया है. करोड़ों नौकरियां देने की बात करने वाली सरकार युवाओं को नौकरी से निकाल रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि बर्खास्तगी वापस लिए बिना वह धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे.
'बिना वार्ता के ही शुरू की हड़ताल' : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि हड़ताल से पहले कर्मियों ने अपने विभाग से वार्ता की कोशिश नहीं की. यह सर्वेक्षण संविदा कर्मी थे और काम खत्म होते ही सेवा समाप्त होनी थी. उन्हें दो बार लौटने का मौका भी दिया गया लेकिन उन्होंने वापसी नहीं की, जो काम पर लौटे उनकी सेवा बहाल है.

''हड़ताल पर बैठे संविदा कर्मियों को दो बार लौटने के लिए कहा गया. अखबार में भी नोटिस दिए गए. इसके बाद 3275 कर्मी वापस ड्यूटी पर लौटे, लेकिन 7480 कर्मी नहीं लौटे. इसके बाद विभाग की ओर से इन 7480 विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों को उनकी सेवा से मुक्त कर दिया गया.''- दीपक कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
अब नहीं मिलेगी कोई सहानुभूति : दीपक कुमार सिंह ने कहा कि अनुशासनहीनता के कारण 7480 कर्मियों को सेवा मुक्त किया गया. अब उनके प्रति कोई सहानुभूति नहीं बरती जाएगी. जिन कर्मियों ने ईमानदारी से काम किया होता, उनके लिए भविष्य में विकल्प खुले रहते.
नए सिरे से होगी बहाली : विभाग ने ऐलान किया है कि भूमि सर्वेक्षण का काम बाधित न हो, इसके लिए नए सिरे से बहाली प्रक्रिया शुरू होगी. चुनाव की घोषणा से पहले विज्ञापन जारी कर आवेदन मंगाए जाएंगे. हटाए गए कर्मियों को दोबारा मौका मिलेगा या नहीं, यह विज्ञापन में साफ किया जाएगा.
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