मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन को संजीवनी नहीं देगी केंद्र सरकार, मोहन यादव ने खुद उठाया बीड़ा
मोहन यादव कैबिनेट मीटिंग में जल जीवन मिशन को लेकर चर्चा. तय किया गया कि अधूरे प्रोजेक्ट के लिए सरकार खुद राशि खर्च करेगी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 2, 2025 at 5:04 PM IST
भोपाल : केंद्र सरकार ने अपने बजट में जल जीवन मिशन के लिए फंड तय किया. योजना को 2028 तक बढ़ा दिया है लेकिन मध्य प्रदेश में इस योजना के अधूरे कार्यों के लिए केंद्र ने राशि देने से साफ मना कर दिया है. इससे राज्य सरकार के सामने समस्या आ गई है. पहले ही कर्ज के जाल में फंसे मध्य प्रदेश में इस योजना पर आगे काम कैसे बढ़ेगा? ये बड़ा सवाल है. हर घर नल लगवाने की योजना अधर में न लटके, इसके लिए मोहन यादव सरकार ने तय किया है कि इसके लिए राज्य सरकार अपने खजाने से राशि खर्च करेगी.
मोहन यादव सरकार खुद खर्च करेगी 9026 करोड़
मंगलवार को आयोजित मोहन यादव कैबिनेट में तय किया गया "जल जीवन मिशन के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए राज्य सरकार अपने दम पर 9026 करोड़ रुपये खर्च करेगी. क्योंकि हर घर जल उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है." कैबिनेट की बैठक के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया "हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाने के लिए अभी कई योजनाएं अधूरी हैं. इसमें और पैसों की जरूरत है. केन्द्र सरकार ने अपना बजट बता दिया था, इसलिए अब जो भी लागत आएगी, वह राज्य सरकार अपने बजट से देगी."

मध्य प्रदेश में अभी आधे से ज्यादा काम अधूरे
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन योजना में मध्य प्रदेश में अभी तक करीब साढ़े 20 हजार करोड़ की लागत की करीब 28 हजार एकल ग्राम नल जल योजनाएं स्वीकृत हुई थीं. इसमें से 15 हजार 947 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं. 12 हजार 43 योजनाओं के काम अभी भी अधूरे हैं. गौरतलब है कि नल जल योजना मोदी सरकार की सबसे बड़ी योजना है. इस योजना का लाभ भी गांवों में हुआ है लेकिन गड़बड़ी की शिकायतें भी व्यापक स्तर पर सामने आई हैं. ये गड़बड़ियां केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, अपितु हरेक राज्य से सामने आई हैं.
विधानसभा में गूंज चुका है जल जीवन मिशन घोटाला
मध्य प्रदेश में पिछली सभा सत्र में भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जल जीवन मिशन योजना में हुए घोटाले की व्यापक स्तर पर जांच कराने की मांग की थी. कांग्रेस विधायकों के साथ ही बीजेपी विधायक संजय पाठक ने भी अपने विधानसभा क्षेत्र विजय राघवगढ़ में जल जीवन मिशन में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था. भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने भी अपने विधानसभा क्षेत्र में जल जीवन मिशन में घोटाले को उठाया था. कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने भी अपने क्षेत्र में इस योजना में हुए घोटालों को गिनाकर प्रदेश स्तर पर जांच क मांग की थी.
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पीएचई मंत्री संपतिया उईके पर लगे आरोप
गजब तो ये है कि जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप मध्यप्रदेश की पीएचई विभाग की ही मंत्री संपतिया उईके पर लगे. आरोप लगा कि उन्होंने 1000 करोड़ रुपए कमीशन लिया है. इसके बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग ने अपने ही विभाग की मंत्री के खिलाफ जांच शुरू करवा दी. इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई थी. इसके बाद जांच के आदेश दिए गए. बता दें कि मध्य प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा जिला हो, जहां से ये शिकायतें नहीं हैं कि कहीं टंकी बनी तो सप्लाई शुरू नहीं हुई, कहीं पाइप लाइन बिछ गई तो घरों में नल नहीं लगे.

