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शौक बना धरोहर, घर के बेसमेंट में बनाया संग्रहालय 'गोयल गैलरी', अब पोते भी संभाल रहे विरासत

मिलिए सुशील गोयल से जो 55 साल से संग्रहण कर अपने घर के बेसमेंट में संग्रहालय बना चुके हैं....

गोयल गैलरी के मालिक सुशील गोयल
गोयल गैलरी के मालिक सुशील गोयल (ETV Bharat Bhilwara)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 21, 2025 at 8:58 PM IST

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भीलवाड़ा: लोगों को कई तरह के शौक होते हैं, जैसे किताबों का कलेक्शन, करेंसी का कलेक्शन, जूतों का कलेक्शन या कुछ यूनिक चीजों का कलेक्शन करना. ऐसा ही अनोखा शौक है सुशील गोयल का, जो है फिलाटेली व नोटा फिली. फिलाटेली का अर्थ है डाक टिकट का संग्रह संकलन व उनका अध्ययन करना. वहीं, नोटा फिली का अर्थ है शौक के तौर पर बैंकिंग मुद्रा अर्थात नोटों का संग्रह करना. भीलवाड़ा शहर के आरसीव्यास कॉलोनी में रहने वाले 71 वर्षीय टिंबर व्यवसायी सुशील गोयल ने अपने शौक को पूरा करने के लिए घर के बेसमेंट में एक संग्रहालय बना रखा है, जिसका नाम 'गोयल गैलरी' रखा है. सुशील 55 सालों से संग्रहण कर रहे हैं.

सुशील गोयल ने बताया कि 55 वर्ष पूर्व अपने शौक को कलेक्शन का रूप देना प्रारंभ किया, जिससे धीरे-धीरे यह शौक एक धरोहर के रूप में विकसित हो गया. गोयल ने अपने संग्रह को घर के बेसमेंट में बने बड़े हॉल में पांच विभिन्न भागों में बांट रखा है. इसमें भारतीय मुद्रा के विभिन्न नोट, विभिन्न प्रकार के सिक्के, डाक टिकट, कोर्ट स्टाम्प और विदेशी मुद्रा शामिल हैं.

मिलिए सुशील गोयल से (ETV Bharat Bhilwara)

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सभी भागों में संग्रहित चीजों की ये खासियत :

1. भारतीय मुद्रा के संग्रह में विभिन्न नोट : गोयल बताते हैं कि इस कलेक्शन में भारतीय मुद्रा के नोटों की लगातार बढ़ते क्रम में 3 सीरीज तैयार की है. पहली सीरीज में 999 नोट 001001 से 999999 तक, दूसरी सीरीज में 220 नोट 000001 से 1000000 तक और तीसरी सीरीज में 99 नोट 010101से 999999 तक के नंबरों की है. यह सीरीज संभव है. इस सीरीज को वर्ष 2019 मे 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' और 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड' में भी शामिल किया जा चुका है. इस कलेक्शन में भारतीय मुद्रा के 1 रुपए का नोट, 1917 से लेकर आज तक जारी किए गए सभी नोट संग्रहित हैं. मोरारजी सरकार की ओर से 1978 में बंद हुआ 1000 का नोट और मोदी सरकार के समय बंद हुए 500 व 1000 का नोट भी संग्रहित है. इसके अलावा ऐसे नोट भी हैं, जिन पर नंबर भी नहीं है या कुछ छपने में गलती रह गई है. भारतीय मुद्रा के रूप में आजादी के बाद सभी गवर्नर के हस्ताक्षर वाले नोट भी संग्रहित हैं.

संग्रह में क्या-क्या है
संग्रह में क्या-क्या है (ETV Bharat GFX)

2. विभिन्न प्रकार के सिक्के : संग्रहालय का दूसरा भाग है विभिन्न प्रकार के सिक्के. इस संग्रह में साल 1835 से लेकर 1945 तक जारी किए गए चांदी के सिक्के मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं. इसके अलावा भिलाड़ी सिक्के, जो तांबे से बने हुए हैं और मेवाड़ क्षेत्र में प्रचलित थे. ये भी संग्रह में शामिल हैं. पुराने 1 पाई से लेकर आज तक जारी सभी सिक्के संग्रहित हैं. इसके अलावा समय-समय पर भारत सरकार की ओर से विभिन्न महापुरुषों के नाम पर जारी चांदी के सिक्के भी संग्रहित हैं.

गोयल गैलरी
गोयल गैलरी (ETV Bharat GFX)

3. डाक टिकट : संग्रहालय में 1947 से लेकर 2022 तक जारी बिना स्टांप लगे सभी डाक टिकट संग्रहित हैं. इसके अलावा महात्मा गांधी थीम पर भारतीय व अन्य 40 देशों की ओर से जारी डाक टिकट भी संग्रहित हैं. साथ ही लगभग 15 अन्य देशों के डाक टिकट भी उपलब्ध हैं और पुराने पोस्टकार्ड अंतरदेशीय पत्र व पोस्ट लिफाफे भी देखने को उपलब्ध हैं.

घर के बेसमेंट में बनाया संग्रहालय
घर के बेसमेंट में बनाया संग्रहालय (ETV Bharat Bhilwara)

4. कोर्ट स्टाम्प : ब्रिटिश इंडिया सरकार व 40 अन्य देसी रियासतों के कोर्ट स्टाम्प व रेवेन्यू टिकट संग्रहित हैं.

5. विदेशी मुद्रा : गोयल ने बताया कि उनके संग्रहालय में 70 देशों के नोट संग्रहित हैं, जिनमें सबसे महंगी मुद्रा कुवैती दिनार और सबसे सस्ती मुद्रा इंडोनेशिया रुपया भी शामिल हैं.

सुशील गोयल के साथ उनके दोनों पोतें
सुशील गोयल के साथ उनके दोनों पोतें (ETV Bharat Bhilwara)

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पोते बढ़ा रहे विरासत : गोयल ने बताया कि 50 वर्ष पहले सबसे पहले डाक टिकट से शुरुआत की थी, जिससे उनका शौक बढ़ता गया. सुशील गोयल ने बताया कि इस ऐतिहासिक गैलरी है जिसका नाम 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड' और 'गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड' में दर्ज है. उम्र के साथ ही जिज्ञासा भी बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि इस धरोवर को और आगे बढ़ाने का मन है. इसमें उनके दोनों पोते सत्यम गोयल और शिवम गोयल का भी पूरा सहयोग रहता है. गोयल के इस कलेक्शन को देखने के लिए समय-समय पर देश के राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी, मित्र, रिश्तेदार और विभिन्न स्कूलों के बच्चे भी आते रहते हैं. दोनों पोतों का कहना है कि दादा की ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने से बड़ा काम कुछ भी नहीं हो सकता है.

सिक्कों का कलेक्शन
सिक्कों का कलेक्शन (ETV Bharat Bhilwara)

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