मनसा देवी रोपवे: नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले से पहले हरिद्वार नगर निगम ने टेंडर किया रद्द
नगर निगम ने मनसा देवी रोपवे के लिए टेंडर जारी किया था, उषा ब्रेको ने अनुभव न रखने वाली कंपनियों को लेकर याचिका दायर की

By PTI
Published : June 14, 2025 at 3:14 PM IST
नैनीताल: हरिद्वार नगर निगम ने मनसा देवी मंदिर रोपवे के संचालन के लिए एक टेंडर रद्द कर दिया है. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि बोली प्रक्रिया में इस क्षेत्र में किसी भी अनुभव के बिना फर्मों को अनुमति दी गई है. यात्रियों की सुरक्षा पर चिंता और नाराजगी व्यक्त करने और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगने के बाद हाईकोर्ट ने टेंडर रद्द किया है.
मनसा देवी रोपवे टेंडर मामला: मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हरिद्वार नगर निगम के वकील संदीप कोठारी ने अदालत को बताया कि टेंडर वापस ले लिया गया है. रोपवे विशेषज्ञ कंपनी उषा ब्रेको लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट का आदेश जल्द ही आने की उम्मीद है. ये विवाद अप्रैल में शुरू हुआ, जब हरिद्वार नगर निगम ने मनसा देवी मंदिर रोपवे के संचालन और रखरखाव के लिए टेंडर जारी किया.
उषा ब्रेको ने लगाया था ये आरोप: उषा ब्रेको लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि रोपवे सेवाओं में अनुभव न रखने वाली फर्मों, जिनमें सड़क और निर्माण कार्य से जुड़ी फर्में भी शामिल हैं, को बोली प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी गई. याचिका में कहा गया है कि राजमार्ग, पुल, सुरंग, दूरसंचार और यहां तक कि अस्पताल जैसे क्षेत्रों की फर्मों को भी इसमें शामिल किया गया.
हाईकोर्ट ने जांच समिति गठित की थी: याचिका के अनुसार, नगर निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना नगर आयुक्त द्वारा निविदा शर्तों में बदलाव किए गए. इस कारण प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर आश्चर्य व्यक्त किया था. तब हाईकोर्ट ने निविदा शर्तों की समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है.
मनसा देवी के लिए है रोपवे: मनसा देवी मंदिर हरिद्वार में बिलवा पर्वत पर स्थित है. ये देश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है. मनसा देवी को शक्ति का एक रूप माना जाता है. मनसा देवी मंदिर एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ है और यहां पहुंचने के लिए करीब 3 किलोमीटर की दूरी पहाड़ पर चढ़नी पड़ती है. इसी दूरी को कम करने के लिए यहां रोपवे लगाया गया था. रोपवे को चंद मिनटों में ही मंदिर पहुंचा जाता है.
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