बलौदाबाजार हिंसा मामला : 43 आरोपियों को बिलासपुर हाईकोर्ट से मिली बेल, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश बना आधार
बलौदाबाजार हिंसा मामले में 43 आरोपियों को हाईकोर्ट से बेल मिल गई है.देखिए चंद्रकांत वर्मा की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 29, 2025 at 6:14 PM IST
बलौदाबाजार : बलौदाबाजार में 10 जून को हुए हिंसा और तोड़फोड़ की घटना के बाद अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. इस मामले में शामिल 43 लोगों को उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) से जमानत मिल गई है. ये जमानत सुप्रीम कोर्ट द्वारा नारायण मिरी को दी गई जमानत के आधार पर दी गई है. इन 43 आरोपियों को जमानत मिलने की याचिका को हाईकोर्ट ने मंजूर किया इसके बाद आरोपियों को राहत मिली है.आपको बता दें कि विधायक देवेंद्र यादव की जमानत याचिका बलौदाबाजार सीजेएम कोर्ट, जिला सत्र न्यायालय बलौदाबाजार और हाईकोर्ट बिलासपुर से खारिज हो चुकी हैं. अब विधायक ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की हैं. जिस पर 20 फरवरी को सुनवाई होगी.
क्या है पूरा घटनाक्रम ?: 10 जून 2024 को बलौदा बाजार में स्थित संयुक्त जिला कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हुई थी. इसके साथ ही एसपी कार्यालय में भी आगजनी की गई थी. इस हिंसक घटना के दौरान सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ था. अधिकारियों के मुताबिक इस हिंसा और तोड़फोड़ के कारण लगभग 12.53 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था.
गिरफ्तारी और जमानत प्रक्रिया: बलौदाबाजार हिंसा मामले में 13 अलग-अलग FIR दर्ज हैं. जिसमें 187 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. जिनमें से कुछ लोगों के खिलाफ तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा के आरोप थे. गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने निचली अदालत में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी. लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी.इसके बाद आरोपियों ने उच्च न्यायालय का रुख किया और जमानत के लिए याचिका दाखिल की.
43 आरोपियों को मिली जमानत : हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नारायण मिरि को जमानत देने का आदेश दिया था, जो कि इस मामले में एक प्रमुख आरोपी थे. सुप्रीम कोर्ट ने उनके मामले में जमानत देते हुए यह स्पष्ट किया था कि उनके मामले में उच्च न्यायालय को पहले से दिए गए निर्देशों के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए. इसी फैसले के आधार पर, बलौदाबाजार हिंसा मामले में गिरफ्तार हुए 43 अन्य आरोपियों के मामले की याचिका पर हाईकोर्ट ने विचार किया और उन्हें जमानत दी.
हाईकोर्ट के अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिया ने की पुष्टि : जमानत मिलने के बाद, याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिया ने इस फैसले की पुष्टि की. हर्षवर्धन के मुताबिक न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और न्याय दृष्टांत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि इस फैसले से यह सिद्ध हो गया है कि उच्च न्यायालय जमानत के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए त्वरित राहत प्रदान कर सकता है.
हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय : हाईकोर्ट ने इस मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए यह फैसला सुनाया. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब कोई आरोपी पहले से जमानत पर है और अन्य आरोपियों के खिलाफ समान परिस्थितियां हैं, तो उन मामलों में जमानत दी जा सकती है. उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि जमानत देने का निर्णय आरोपियों की गिरफ्तारी, उनके द्वारा किए गए अपराध, और उनके बर्ताव को ध्यान में रखते हुए लिया जाता है.
जमानत का ऐतिहासिक फैसला, क्या अन्य आरोपी भी पाएंगे राहत? : जमानत के फैसले के बाद, बलौदाबाजार हिंसा मामले के बाकी आरोपियों के लिए यह एक संकेत हो सकता है कि यदि उनके मामलों में सुप्रीम कोर्ट से कोई नया आदेश आता है, तो वे भी राहत प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि, मामले में अन्य कानूनी प्रक्रिया और जांच भी जारी है, जो भविष्य में इस प्रकार के फैसलों पर असर डाल सकती है. इस फैसले से ये भी स्पष्ट होता है कि उच्च न्यायालय न्यायिक निष्पक्षता के आधार पर जमानत के मामलों में त्वरित और उचित फैसले कर सकता है.
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