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देवभूमि में कुदरत का कहर! धराली के अलावा इन इलाकों में भी बरसी आफत, जानिए कहां कितनी जानें गईं

उत्तराखंड में बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं अब लोगों को डराने लगी हैं. हर साल कई लोग इन आपदाओं में अपनी जान गंवाते है.

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देवभूमि में कुदरत का कहर! (@pushkardhami)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 12, 2025 at 4:56 PM IST

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Updated : August 13, 2025 at 5:22 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड को इस साल मॉनसून ने बड़े जख्म दिए हैं, जो शायद ही कभी भूल पाएंगे. इस साल मॉनसून की शुरुआत से लेकर अभी तक प्रदेश ने कई बड़ी आपदाएं की मार झेली हैं. उत्तरकाशी के धराली में आई पांच अगस्त की जल प्रलय तो सभी ने देखी है, लेकिन धराली के अलावा भी पांच और छह अगस्त को कई आपदाएं आई थी. इन आपदाओं में भी धराली की तरह कई जिंदगियां सैलाब में बह गई. आज उन्हीं आपदाओं के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

वैसे तो उत्तराखंड हर साल मॉनसून सीजन में आपदा की मार झेलता है, लेकिन इस बार तो मॉनसून ने न सिर्फ प्रदेश को आर्थिक तौर पर बड़ी चोट पहुंचाई है, बल्कि कई लोगों का जीवन भी निगल लिया है. उत्तराखंड में कुछ बड़ी आपदाओं पर गौर करें तो साल 2013 की केदारनाथ आपदा को सबसे विनाशकारी बताया गया है. धराली आपदा को भी केदारनाथ की जल प्रलय जैसा ही देखा जा रहा है. क्योंकि इस आपदा ने भी धराली बाजार का नामोनिशान मिटा दिया है.

अब उन क्षेत्रों की बात करते हैं, जहां धराली की तरह ही पांच और छह अगस्त को आपदा आई थी और इसी तरह बड़ा नुकसान हुआ था. सबसे पहले बात करते हैं पौड़ी गढ़वाल जिले की. 6 अगस्त को पौड़ी गढ़वाल जिले के थलीसैंण और पाबौ ब्लॉक में आसमान से बारिश कहर बनकर बरसी थी. इस दिन बारिश ने इन दोनों इलाकों जमकर कहर बरपाया था. कई गांवों में घर, सड़क, पुल और सरकारी इमारतें भारी बारिश की भेंट चढ़ गई थी. इस आपदा में पांच नेपाली मजदूर भी बह गए थे, जिनका अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है.

दो सगी बहनों की हुई मौत: ठीक उसी वक्त बोरांसी गांव में भी बादल फटने घर पर मलबा गिरा था जिसकी चपेट में आने से दो सगी बहनों की मौत हो गई थी. दोनों बहनें रसोई में काम कर रही थी, तभी मलबा उनके ऊपर मौत बनकर गिरा.

इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल में अलग-अलग जगह पर भी सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा था. पौड़ी का एक महत्वपूर्ण पुल पूरी तरह से टूट चुका है, जिसको बनाने का काम शुरू हो गया है. इसके साथ ही जिला मुख्यालय से गांवों को जोड़ने वाली कई सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिनकी मरम्मत का काम पिछले पांच दिनों से चल रहा है.

वहीं, पौड़ी जिलाधिकारी स्वामी भदौरिया ने बीते दिनों आपदा में हुए नुकसान की जानकारी देते हुए बताया कि जिन मार्गों को नुकसान पहुंचा है, उनकी मरम्मत का काम शुरू हो चुका है. साथ ही लापता लोगों की तलाश भी की जा रही है. जिन घरों को नुकसान पहुंचा है, उनको फौरी तौर पर राहत दी जा रही है.

हर्षिल से आर्मी के जवान लापता: पांच अगस्त को खीरगंगा में आई आपदा में आर्मी के कई जवान भी दब गए थे. उनका भी अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है. उनकी तलाश में भी सर्च ऑपरेशन जारी है.

एक महीना पहले नेशनल हाईवे पर फटा था बादल: करीब एक महीना पहले उत्तरकाशी में ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक से बादल फटा था. इस जल सैलाब में सात मजदूर लापता हो गए थे, जिनकी अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है.

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने दोनों ही जनपदों में हुए हादसे के बाद भू-वैज्ञानिकों की एक टीम भेजने के निर्देश जारी किए हैं. यह टीम इन दोनों ही आपदाओं के कारणों का अध्ययन करके शासन को रिपोर्ट सौंपेगी. वहीं शासन ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, इंडियन आर्मी, आइटीबीपी और वायु सेवा से संबंध में बनाने के लिए और एक साथ काम लेने के लिए एसडीआरएफ के आईजी अरुण मोहन जोशी को नोडल अधिकारी बनाया है.

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Last Updated : August 13, 2025 at 5:22 PM IST