कथावाचक से अभद्रता पर भड़के अखिलेश यादव; योगी सरकार से किया सवाल, 'जब कथा सभी सुन सकते हैं तो कह क्यों नहीं सकते'?
एटा के बकेवर के दादरपुर गांव में यादव कथावाचक के साथ 21 जून को लोगों ने अभद्रता की थी. चोटी काटकर सिर मुंडवा दिया था.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : June 24, 2025 at 3:40 PM IST
|Updated : June 24, 2025 at 4:44 PM IST
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एटा में पिछड़ी जाति के कथावाचक के साथ हुई अभद्रता को लेकर कड़ी नाराजगी जताई. कहा कि “अगर सभी लोग कथा सुन सकते हैं तो फिर पिछड़े समाज के लोग कथा कह क्यों नहीं सकते?”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वर्चस्ववादी मानसिकता को पिछड़े समाज से कथा सुनने में दिक्कत है? अखिलेश यादव ने कहा कि इस वक्त प्रदेश में पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) समाज के साथ भेदभाव हो रहा है.
उन्होंने इटावा, एटा, महोबा, आजमगढ़ समेत कई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी की सरकार ऐसी घटनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए होने देती है. “यह सरकार हृदयहीन है, गैर-संवैधानिक है. बाबा साहब के संविधान की प्रस्तावना के मुताबिक फैसले लिए जाएं तो पीडीए के साथ न्याय होगा.”
सपा प्रमुख ने दो टूक कहा, "भगवत कथा सबके लिए है. अगर सुन सकते हैं तो बोल क्यों नहीं सकते? भगवत कथा भगवान कृष्ण से जुड़ी है, अगर सच्चे कृष्ण के भक्त से नहीं सुनेंगे तो फिर कौन सुनाएगा?"
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो वर्चस्ववादी लोग पीडीए समाज से कथा नहीं सुन सकते, उन्हें खुलकर घोषणा कर देनी चाहिए कि वे इस समाज का चढ़ावा, दान-दक्षिणा और चंदा भी कभी स्वीकार नहीं करेंगे.
अखिलेश यादव ने एटा की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “रातभर पीटा गया, ढोलक और हारमोनियम छीन लिया गया, सिर मुंडवा दिया गया ये सब किसके आशीर्वाद से हो रहा है?” उन्होंने 21 हजार से लेकर 51 हजार तक की आर्थिक सहायता देने की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी कथावाचकों के साथ खड़ी है.
उन्होंने कहा कि “अगर बीजेपी को लगता है कि कथा कहने का अधिकार सिर्फ एक वर्ग विशेष को है, तो इसके लिए अलग कानून बना दें. जिस दिन पीडीए समाज कथा कहने लग गया, उस दिन बीजेपी चली जाएगी.”
उन्होंने महोबा की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें दलित दंपती को चप्पल उतार कर चलने को मजबूर किया गया और मना करने पर उन्हें पीटा गया. वहीं एटा में बारात निकलने से रोके गए दलित युवक की भी बात की. कहा कि “बारात नहीं निकालने दी, उल्टे पुलिस ने उनके पिता को जेल में डाल दिया.”
सपा प्रमुख ने कहा, “इस सरकार में ढाई हजार लोग ही सब कुछ चला रहे हैं. जो मन में आए कर सकते हैं.” उन्होंने श्याम जी कठेरिया की ढोलक छीनने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि “जो अपमान हुआ है, उसका जवाब क्या केवल FIR है? चैन, ढोलक, सम्मान इन सबका क्या?”
अखिलेश ने कहा कि जो कार्रवाई अब तक हुई है, उससे संतुष्टि नहीं है. उन्होंने आशंका जताई कि सरकार कहीं पीड़ितों पर ही मुकदमा न दर्ज करवा दे. उन्होंने कहा, “पूरी बीजेपी हिस्ट्रीशीटर है, पैसे देकर थानों में कुछ भी लिखवा सकते हैं.” दिल्ली की मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर कहा कि “अगर हम कह दें कि आप टोटी चोर हैं, तो क्या ठीक रहेगा?”
प्रेस वार्ता के अंत में अखिलेश ने अपनी पार्टी से बागी तीन विधायकों के निष्कासन पर कहा कि इन विधायकों को मंत्री बनना था. पार्टी के सदस्यता की वजह से मंत्री नहीं बन पा रहे थे. अब हमने उनके मंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया. इन लोगों को क्या पैकेज मिलेगा आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि जिनके नाम में ही पैकेज हो (यानी संजय सेठ) उनके पैकेज क्या होगा.
अखिलेश यादव ने अपने तीखे तेवरों में भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए पीडीए समाज के सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. उन्होंने कहा कि पीडीए के सम्मान के लिए हम अभियान चलाएंगे.
ये भी पढ़ेंः यादव कथावाचक की चोटी काटी, सिर मुंडवाया, नाक रगड़वाई; इटावा के गांव में कथा करने पर बवाल, हारमोनियम तोड़ा, मारपीट
ये भी पढ़ेंः अखिलेश यादव ने 3 सपा विधायकों को पार्टी से किया बाहर; राज्यसभा चुनाव में 7 MLA ने की थी बगावत, अब डेढ़ साल बाद एक्शन

