अधिक बारिश से फसल को कैसे बचाएं, कृषि वैज्ञानिक ने दिए टिप्स, नहीं होगा नुकसान
सरगुजा में रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कृषि वैज्ञानिक ने बारिश से फसल बचाने के उपाय बताए हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : October 8, 2025 at 1:07 PM IST
सरगुजा : उत्तरी छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने 24 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है. बारिश ना होने की चिंता में किसान बारिश की उम्मीद करते थे. बीते दो साल की बात करें तो सरगुजा में कम पानी गिरने के कारण किसान बर्बाद हो गए थे.लेकिन इस साल अच्छी बारिश हुई.लेकिन अब जब किसानों के फसल लेने का समय है तो बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है.जिसके कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है.
अक्टूबर में मानसून जैसी बारिश : अक्टूबर के महीने में भी सरगुजा में आफत की बारिश हो रही है. बारिश ने सब्जी, दलहन और फूलों की खेती बर्बाद कर दी है. अब किसानों को धान की फसल भी बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है.वहीं दूसरी ओर मौसम विज्ञानी भी बारिश की आशंका जता रहे हैं.

सब्जी और फूल की खेती बर्बाद : भारी बारिश के कारण खीरा, शिमला मिर्च, मूंगफली, मक्के की खेती प्रभावित हुई है. फूलों की खेती पर भी इसका बुरा असर पड़ा है. आलम ये है कि बारिश के कारण पौधे गल जा रहे है और उन पर कीड़े भी लग रहे हैं. इतना ही नही लगातार बारिश के कारण किसान पौधों पर दवाओं का छिड़काव भी नही कर पा रहे. सब्जी और फूलों की खेती की मार झेल चुके किसानों को अब धान की चिंता सता रही है. किसानों का कहना कि आने वाले 15 दिनों में धान पकने लगेंगे. बारिश का सिलसिला ऐसा ही रहा तो उनकी साल भर की मेहनत भी बेकार हो जाएगी.मौसम विज्ञानी एएम भट्ट ने बताया कि सरगुजा में बारिश का सिलसिला अब भी थमने का नाम नही ले रहा. बंगाल की खाड़ी में दबाव बनने के कारण बारिश की आशंका जताई जा रही है.
साल 2001 में सरगुजा में भारी बारिश आई थी जिसके बाद 24 साल बाद ये रिकार्ड टूटा है और भारी बारिश दर्ज की गई है.इससे पहले वर्ष 2001 में 1815.1 मिमी वर्ष हुई थी. इन 24 वर्षों में बीच में 2011 में 1455.1 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी. इस साल मानसूनी वर्षा अभी तक 1357.1 मिमी दर्ज हो चुकी है - एएम भट्ट, मौसम विज्ञानी

कृषि वैज्ञानिक डॉ. राहुल कुमार गुप्ता के मुताबिक बारिश की वजह से फसलों का जो नुकसान हो रहा है उनमे मुख्य रूप से धान, फूल और सब्जी की खेती हैं. किसान भाई अगर फूल या सब्जी लगाए हैं तो वो सबसे पहले तो अपनी मेढ़ को तोड़ दें और खेत से पानी बाहर निकालने का प्रबंध करें, बारिश से कट फ्लावर को तोड़कर बेचने का प्रयास करें और गेंदे की खेती में पौधों में डंडे का सहारा लगायें जिससे वो गिरने से बच सके.

इसके साथ ही जैसे ही बारिश रुकती है आप खेत में किसी भी फफूंद नाशक दवाई का छिड़काव जरूर करें. इससे आप काफी हद तक नुकसान से बच सकते हैं. महंगे फूल या फल की खेती करने वाले किसान बैग का उपयोग करें या नेट हॉउस बनाकर बारिश को सीधे पौधों में गिरने से रोकें- डॉ राहुल गुप्ता, कृषि वैज्ञानिक
डॉ राहुल गुप्ता की माने तो धान की फसल या तो पक चुकी है या पकने को तैयार है.इतनी बारिश में धान को नुकसान हो सकता है. इसलिए धान के खेत में भी मेढ़ तोड़कर उसका पानी निकालना और खेत को सुखाना बहुत जरूरी है.साथ ही बारिश की वजह से बालियां वजनदार होकर झुक जाती हैं. ऐसी बालियों को तुरंत काट लें और घर के आंगन में सूखने को डाल दें. इससे वो बाली बर्बाद होने से बच जायेगी. धान में भी रूट को गलने से बचाने के लिए जल प्रबंधन के साथ-साथ फफूंद नाशक का छिड़काव करें.
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