लातेहार के सालोडीह गांव को मिला जल वरदान! यहां जमीन से निर्बाध निकता रहता है पानी
लातेहार का सालोडीह गांव में पानी का प्रचुर भंडार है. यहां एक कुंड है जिसमें से लगातार पानी बाहर आता है.

Published : August 30, 2025 at 4:57 PM IST
लातेहार: झारखंड का लातेहार जिला, जो आमतौर पर रेन शैडो क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, अक्सर पानी की कमी से जूझता है. ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की खबरें यहां आम हैं. लेकिन लातेहार सदर प्रखंड के पांडेपुरा पंचायत में स्थित सालोडीह गांव इस मामले में अपवाद है. यह आदिवासी बहुल गांव जल की प्रचुरता के लिए प्रसिद्ध है और इसे "जल का वरदान" प्राप्त गांव माना जाता है.
जल संकट से मुक्ति की कहानी
कई दशक पहले तक सालोडीह गांव भी पानी की भयंकर किल्लत से जूझता था. ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते थे. लेकिन 35-40 वर्ष पहले एक खनिज सर्वेक्षण कंपनी ने गांव में ड्रिलिंग की. इस दौरान गांव के बीचों-बीच से पानी की मोटी धार फूट पड़ी. स्थानीय ग्रामीणों ने कंपनी से अनुरोध किया कि ड्रिल किए गए स्थान को मिट्टी से न भरा जाए. कंपनी ने ग्रामीणों की बात मान ली, और यहीं से सालोडीह की तकदीर बदल गई.
जलकुंड: गांव के लिए वरदान
इस जलकुंड के निर्माण ने ग्रामीणों का जीवन आसान कर दिया. स्थानीय निवासी सकिंद्र अगरिया और कपिलदेव उरांव बताते हैं कि पहले पानी की कमी के कारण लोग परेशान रहते थे, लेकिन अब यह जलकुंड गांव के लिए जीवनरेखा बन गया है. इस कुंड से न केवल ग्रामीणों की पेयजल आवश्यकताएं पूरी होती हैं, बल्कि खेतों की सिंचाई भी हो रही है.

जिला प्रशासन ने इस जलकुंड के महत्व को देखते हुए इसके पास एक टैंक का निर्माण करवाया है. टैंक के चारों ओर पाइपलाइन की व्यवस्था की गई है, जिससे साल भर 24 घंटे पानी उपलब्ध रहता है. पंचायत के मुखिया संजय उरांव कहते हैं, "यह जलकुंड पूरे गांव के लिए वरदान है. गर्मी के मौसम में, जब पंचायत के अन्य गांवों में पानी की किल्लत होती है, तब भी सालोडीह में पानी की कमी नहीं होती."
मेडिकेटेड पानी होने का दावा, चर्म रोगों का इलाज
ग्रामीणों का दावा है कि इस जलकुंड का पानी न केवल पीने और सिंचाई के लिए उपयोगी है, बल्कि इसमें औषधीय गुण भी हैं. उनका कहना है कि इस पानी से स्नान करने से फोड़े-फुंसी जैसे चर्म रोगों में राहत मिलती है. इस वजह से दूर-दूर से लोग यहाँ स्नान करने और पानी लेने आते हैं.
हालांकि लातेहार सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अखिलेश्वर प्रसाद के अनुसार, "गंधक युक्त पानी चर्म रोगों में लाभकारी हो सकता है. संभवतः इस जलकुंड के पानी में गंधक की मात्रा हो. हालांकि, इसके औषधीय गुणों की पुष्टि के लिए पानी की वैज्ञानिक जांच जरूरी है."
लातेहार निवासी अशोक प्रसाद उर्फ बुट्टा जी बताते हैं कि यह जलकुंड न केवल ग्रामीणों के लिए उपयोगी है, बल्कि इसे पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है. वे कहते हैं, "यहां बड़ी संख्या में लोग स्नान करने और कुंड को देखने आते हैं. यदि प्रशासन पानी के भंडारण और अन्य व्यवस्थाओं पर ध्यान दे, तो इससे कई एकड़ खेतों की सिंचाई हो सकती है और यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है."
सालोडीह की भौगोलिक स्थिति
सालोडीह गांव लातेहार जिला मुख्यालय से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह पूरी तरह आदिवासी बहुल गांव है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. लातेहार से पांडेपुरा जाने वाली सड़क पर यह गांव पड़ता है.
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