'हिंदुओं को सेकुलरिज्म सीखने की जरूरत', अब्दुल बारी सिद्दीकी के बयान पर बवाल, BJP बोली- माफी मांगिये
अब्दुल बारी सिद्दीकी के 'सेकुलरिज्म' वाले बयान पर सियासी बवाल खड़ा हो गया है. बीजेपी ने कहा कि उनको हिंदुओं से माफी मांगनी होगी. पढ़ें..

Published : August 25, 2025 at 3:03 PM IST
दरभंगा: राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी विवादों में घिर गए हैं. हिंदुओं को सेकुलरिज्म सीखने की नसीहत देकर वह फंस गए हैं. बीजेपी ने उनके बयान को हिंदू धर्म के लोगों का अपमान करार देते हुए माफी मांगने को कहा है. वहीं, अपने बयान पर सफाई देते हुए उन्होंने फिर से ऐसी बात कह दी, जिस पर सियासी बवाल मच गया है.
'हिंदुओं को सेकुलरिज्म सीखने की जरूरत': असल में दरभंगा नगर क्षेत्र में शनिवार को 'वोटर अधिकार यात्रा’ की समीक्षा बैठक के दौरान आरजेडी विधान पार्षद अब्दुल बारी सिद्दीकी लोगों को संबोधित कर रहे थे. उसी दौरान उन्होंने कहा कि हिंदू भाइयों को सेकुलरिज्म, सोशलिज्म और संविधान की समझ गहराई से लेनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास से सीख लेकर ही सही दोस्त और दुश्मन का चयन करना चाहिए.
बीजेपी को बताया 'थेथर पार्टी': सिद्दीकी ने आगे कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में बड़े दुश्मन को हराने के लिए छोटे दुश्मनों से दोस्ती जरूरी है. वहीं उन्होंने बीजेपी को 'थेथर पार्टी' करार देते हुए इसे देश के लिए खतरा बताया और माफी मांगकर सत्ता छोड़ने की सलाह दे दी.
"समझाने की जरूरत हमारे हिंदू भाइयों को है. हिंदू भाई को सेकुलरिज्म क्या है, सोशलिज्म क्या है, कॉन्स्टिट्यूशन क्या है. हमारे पुरखों का इतिहास क्या है? अगर इस चीज को नहीं बताएंगे, खाली वैसी बात बोल दें जिसमें दे दनादन-दे दनादन ताली, उससे क्या होगा?"- अब्दुल बारी सिद्दीकी, राष्ट्रीय प्रधान महासचिव, आरजेडी

संजय सरावगी ने की माफी की मांग: अब्दुल बारी सिद्दीकी के इस बयान पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है. दरभंगा सदर से विधायक और बिहार सरकार में मंत्री संजय सरावगी ने कहा कि आरजेडी नेता जितना ज्ञान हिंदुओं को दे रहे थे, उतना ज्ञान उन्हें मुसलमानों को देना चाहिए. हिंदू जितना सहिष्णु है, उतना कोई नहीं. देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था. इसके बावजूद हिंदू आज संविधान को सबसे पहले मानता है. यही कारण है कि देश में आज भी हर धर्म के लोग शांति से रह रहे हैं, जबकि मुसलमान पहले शरिया कानून को मानते हैं, उसके बाद संविधान को मानते हैं. उनको अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए.
"सिद्दीकी साहब को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए थी लेकिन माफी मांगने के बजाय उन्होंने उल्टे हिंदुओं को ही उपद्रवी बताया और धमकाने की कोशिश की. हिंदू समुदाय सभी धर्मों का आदर करता है और आज भी सहिष्णु है लेकिन सिद्दीकी जैसे नेता केवल अपने धर्म के लोगों को खुश करने के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं."- संजय सरावगी, बीजेपी नेता सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री, बिहार सरकार

सफाई के चक्कर में दिया विवादित बयान: हालांकि विवाद बढ़ने के बाद अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सफाई देने की कोशिश लेकिन उन्होंने फिर ऐसी बात कह दी, जिस पर विवाद थमने की बजाय बढ़ गया है. आरजेडी नेता ने कहा कि हिंदू बहुसंख्यक है, जबकि बाकी धर्म अल्पसंख्यक है. इसलिए हिंदुओं को धर्मनिरपेक्षता समझाने की बात कही थी लेकिन एक पार्टी आज देश में हिंदुओं को उन्मादी बनाने की कोशिश कर रही है. उनका इशारा बीजेपी की ओर था.
"मेरे कहने का मतलब था सभी धर्मों समझाने की जरूरत है लेकिन बाकी धर्म अल्पसंख्यक में है, जबकि हिन्दू बहुसंख्यक. इसलिए हिंदुओं को समझाने की बात कही. आज एक पार्टी और उसके संगठन की ओर से देश में हिंदुओं को उन्मादी बनाया जा रहा है."- अब्दुल बारी सिद्दीकी, राष्ट्रीय प्रधान महासचिव, आरजेडी
कौन हैं अब्दुल बारी सिद्दीकी?: बिहार सरकार के पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी आरजेडी के कद्दावर नेता है. वह पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव के साथ-साथ विधान परिषद के सदस्य भी हैं. उनको लालू परिवार का करीबी माना जाता है. दरभंगा के रहने वाले 71 वर्षीय सिद्दीकी की छवि साफ-सुथरी रही है लेकिन इस बयान के बाद वह विवादों की जद में आ गए हैं.
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