ETV Bharat / state

MCD में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने में देरी पर AAP का हमला, लगाए गंभीर आरोप

एमसीडी में नेता विपक्ष ने कहा कि निगम में दलाल सक्रिय हैं, जिनकी अधिकारियों और भाजपा नेताओं से मिलीभगत है.

दिल्ली नगर निगम में नेता विपक्ष अंकुश नारंग
दिल्ली नगर निगम में नेता विपक्ष अंकुश नारंग (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Delhi Team

Published : July 2, 2025 at 7:58 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम में नेता विपक्ष अंकुश नारंग ने निगम में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए है. उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान निगम में 12 हजार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का प्रस्ताव हाउस से पास किया गया था, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के दो महीने बाद भी अब तक उन कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया है. आप सरकार ने कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति के लिए कट मोशन लगाकर 800 करोड़ रुपये का फंड तय किया था. इसके बावजूद भाजपा सरकार ने न तो कर्मचारियों को पक्का किया और न ही कोई स्पष्ट प्रक्रिया शुरू की.

नौकरी नियमित होने का इंतजार कर रहे कर्मचारी:

अंकुश नारंग ने सिविक सेंटर में प्रेस वार्ता कर कहा कि एमसीडी की ‘‘आप’’ सरकार ने फरवरी-मार्च के हाउस में 12 हजार कर्मचारियों को पक्का करने का प्रस्ताव पास किया था. ये दिहाड़ी मजदूर और संविदा कर्मचारी हैं, जो अपनी नौकरी नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं. एमसीडी के कई जोनों में 1998 में नियुक्त सफाई कर्मचारी अभी तक पक्के नहीं हो पाए, उनको काम करते हुए 27 वर्ष हो गए. जब कर्मचारी को पक्का करने की फाइल जाती है, तो अपनी उपस्थिति दिखाने को कहते हैं. ये कर्मचारी दिल्ली की जनता के लिए रोज सड़कें साफ करते हैं. फिर भी ये लोग उनसे हाजिरी मांग रहे हैं. अगर ये पक्का नहीं होंगे तो रिटायरमेंट के बाद इनको कोई लाभ नहीं मिलेगा. अभी 60 कर्मचारी रिटायर हुए हैं. विदाई पार्टी में मेयर राजा इकबाल सिंह ने उनको खाली लिफाफा पकड़ा दिया.

एमसीडी में भ्रष्टाचार (ETV Bharat)

अंकुश नारंग ने कहा कि 2021-22 में 82 कर्मचारियों को पक्का किया गया, जबकि 2004 में पक्का होना था. इन 84 कर्मचारियों का कहना है कि उनके बाद पक्के हुए 94 कर्मचारियों को 2004 से पक्का माना जा रहा है तो उन्हें भी 2004 से पक्का माना जाए. डम्स विभाग ने 25 कर्मचारी लिया और उन्हें कस्तूरबा गांधी अस्पताल में भेज दिया. अब ये कर्मचारी पक्का करने की मांग कर रहे हैं. हेल्थ विभाग इन्हें डम्स भेज रहे हैं, जबकि डम्स वाले उनहें हेल्थ विभाग में भेज रहे हैं. इन कर्मचारियों को समझ ही नहीं आ रहा है कि उन्हें जाना कहां है.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि अगर किसी कर्मचारी की एक साल में 240 दिन की हाजिरी है, तो उसे पक्का किया जा सकता है. बीजेपी की एमसीडी सुप्रीम कोर्ट की इस गाइडलाइन को भी नहीं मानती है. एमसीडी किस नियम से चलती है और भाजपा इसे किस तरह चलाना चाहती है? 15 साल भाजपा शासन में एमसीडी अंधकार में गई और अब फिर से बीजेपी इसे अंधकार में ले जा रही है.

एमसीडी में बैठे अधिकारी भ्रष्टाचार को दे रहे प्रोत्साहन

उन्होंने कहा कि कुछ दलालों की बीजेपी नेताओं और बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ सेटिंग है. ये दलाल कर्मचारियों से लाखों रुपए लेकर उनको पक्का कराने की बात कहते हैं और परेशान हो चुके कर्मचारी उसकी बात मान भी जाते हैं. इस भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन एमसीडी में बैठे अधिकारी दे रहे हैं. अधिकारी जटिल नीति लाते हैं, ताकि कर्मचारी आसानी से पक्के न हो सकें. इस भ्रष्टाचार को बीजेपी के नेता बढ़ा रहे हैं, जो मेयर, स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन बने बैठे हैं. ये लोग स्टैंडिंग कमेटी में कर्मचारियों का मुद्दा नहीं लाते हैं. इसलिए हाउस में पास होने के बाद भी इन्होंने 12 हजार कच्चे कर्मचारियां को पक्का नहीं किया है, ताकि ये दलालों को पैसा दें और पक्के हों.

ये भी पढ़ें: