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ना ट्रेन ना बस...गंगा में उतारी नाव और पहुंच गए महाकुंभ, इसे कहते हैं बिहार के युवकों की जुगाड़ टेक्नोलॉजी

बक्सर के आठ युवाओं ने प्रयागराज महाकुंभ पहुंचने का एक अनोखा रास्ता निकाला जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. पढ़ें पूरी खबर

नाव से महाकुंभ का सफर
नाव से महाकुंभ का सफर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 18, 2025 at 6:38 PM IST

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Updated : February 18, 2025 at 6:57 PM IST

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बक्सर: प्रयागराज महाकुंभ में रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. सड़कों पर सैकड़ों किलोमीटर लंबे जाम, ट्रेनों में खचाखच भरे लोग, एयरपोर्ट पर भी यात्रियों की भीड़ है. इस बीच बिहार के बक्सर के कम्हरिया गांव के आठ युवाओं ने महाकुंभ पहुंचने का एक अनोखा रास्ता निकाला जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है.

नाव से महाकुंभ का सफर: महाकुंभ नाव यात्रा करने वाले युवकों में मनु चौधरी, सुमंत चौधरी, संदीप कुमार गोंड, सुखदेव चौधरी, पद्दू चौधरी, रविन्द्र चौधरी, रमेश चौधरी, अशोक यादव शामिल थे. मनु कुमार ने बताया कि जब उन्होंने सुना कि प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में भीषण भीड़ है और हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लगी है. इस वजह से 40 किलोमीटर पहले ही वाहनों को रोक दिया जा रहा है, तो उन्होंने जल मार्ग से जाने का निश्चय किया.

बक्सर से नाव लेकर पहुंच गए महाकुंभ (ETV Bharat)

नाव में किया खाने-पीने का पूरा इंतजाम: मनु कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी खुद की नाव से सफर करने का निर्णय लिया. 11 फरवरी को सुबह 10 बजे कम्हरिया गांव के गंगा घाट से अपनी नाव पर खाने-पीने का पूरा सामान लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हुए. नाव पर सब्जी, चावल, दाल, आटा, गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी सामान पहले से रखा गया था.

15 फरवरी को बक्सर लौटे: मनु ने बताया कि 13 फरवरी की रात एक बजे ये युवक प्रयागराज पहुंचे और संगम से करीब पांच किलोमीटर पहले नाव खड़ी कर त्रिवेणी संगम में स्नान किया. इसके बाद 15 फरवरी को संगम पहुंचे, स्नान किया और वापस बक्सर लौट आए. उनकी यह रोमांचक यात्रा इस समय पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.

बक्सर के आठ युवक नाव से किया महाकुंभ का सफर
बक्सर के आठ युवक नाव से किया महाकुंभ का सफर (ETV Bharat)

20 हजार रुपये में पूरा हुआ सफर: यात्रा के दौरान पेट्रोल की जरूरत को पूरा करने के लिए युवकों ने 20 लीटर पेट्रोल का गैलन अपने साथ लिया और रास्ते में कई बार अतिरिक्त पेट्रोल खरीदकर स्टोर कर लिया. पूरी यात्रा में करीब 20 हजार रुपये का खर्च आया, जिसमें आठ हजार रुपये सिर्फ मोटरबोट के पेट्रोल पर खर्च हुए.

गंगा नदी से जुड़े होने के कारण नहीं था डर: यात्रा के दौरान किसी भी तरह का डर या घबराहट नहीं थी, क्योंकि ये सभी युवक नाव चलाने और मछली पकड़ने के काम में पहले से माहिर थे. उन्होंने बताया कि नाव पर ही खाना बनाया जाता था और सोने की व्यवस्था भी नहीं थी.

चार साथी नाव चलाते थे: मनु ने बताया कि सफर के दौरान चार लोग नाव चलाते थे, जबकि चार लोग आराम करते थे. यात्रा के दौरान कई बार गंगा की धारा भ्रमित कर देती थी. खासकर जमुनिया के पास जहां नदी दो धाराओं में बंट जाती है, वहां कई बार वे गलत दिशा में चले जाते और फिर वापस लौटकर मुख्य धारा पकड़नी पड़ती. वहीं अशोक यादव ने बताया कि हम चुकी नाव पर कम रहते हैं. इसलिए मुझे ही कभी कभी डर जैसा होता था किंतु दोस्तों के साथ थे इसलिए सब कुछ अच्छा था.

नाव से सफर करने के बाद प्रसन्न दिखे सभी युवक
नाव से सफर करने के बाद प्रसन्न दिखे सभी युवक (ETV Bharat)

गांव के लोगों ने उड़ाया मजाक: सुमंत चौधरी ने बताया कि गांव से प्रयागराज की दूरी आने जाने में लगभग 600 किलोमीटर है. जब उन्होंने गांव में अपनी योजना के बारे में बताया, तो लोगों ने मजाक उड़ाया और कहा कि यह असंभव है, आधे रास्ते में ही लौट आओगे, लेकिन युवकों ने अपने हौसले को बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि बीच रास्ते में जब कठिनाइयां आईं, तो थोड़ी हिम्मत जरूर डगमगाए, लेकिन यह सोचकर आगे बढ़ते रहे कि अगर वापस लौटे, तो गांव में लोग हमें और भी ज्यादा ताने देंगे. जिसके चलते हिम्मत बना कर प्रयागराज पहुंच वापस लौटने में सफल रहे.

"अपनी खुद की नाव से सफर करने का निर्णय लिया. 11 फरवरी को कम्हरिया गांव के गंगा घाट से अपनी नाव पर खाने-पीने का पूरा सामान लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हुए. 13 फरवरी की रात एक बजे ये युवक प्रयागराज पहुंचे. सभी दोस्त स्नान कर 15 फरवरी को वापस लौट आए." - मनु चौधरी, नाव से प्रयागराज जाने वाले युवा

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Last Updated : February 18, 2025 at 6:57 PM IST