कर्पूरी ठाकुर, गोविंदाचार्य और कैलाशपति मिश्र ने दी JP आंदोलन को धार, पढ़िए इमरजेंसी के दिनों की वो दास्तान
देश में बुधवार को आपातकाल की 50वीं बरसी मनाई जाएगी. आपातकाल में कर्पूरी ठाकुर, गोविंदाचार्य और कैलाशपति मिश्र ने दी थी आंदोलन को धार.

Published : June 25, 2025 at 6:46 AM IST
पटना: 50 साल पहले यानी 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इस दिन देश ने आपातकाल के दंश को झेला था. 50 साल पहले आज के ही दिन देश के लोगों ने रेडियो पर एक ऐलान सुना और मुल्क में खबर फैल गई कि सारे भारत में अब आपातकाल की घोषणा कर दी गई है. स्वतंत्रता के बाद पहला मौका था जब देशवासियों के नागरिक अधिकार छीन लिए गए थे.
आपातकाल के 50 साल: 25 जून 1975 की तारीख को लोग आज भी नहीं भूले हैं खासकर जिस किसी ने आपातकाल को देखा और झेला है आज भी उसे दिन को याद कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. उस दिन को इंदिरा गांधी ने रातों-रात राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली से हस्ताक्षर कर लिए थे. सुबह कैबिनेट के सदस्यों को सूचना दी गई थी देश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था और 35000 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था.
जेपी-कर्पूरी ने सत्ता से बेदखल करने में निभाई भूमिका: आपातकाल के दौरान रातों-रात नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था हालत ऐसी हो गई थी कि जबरन लोगों के नसबंदी भी कराई जा रहे थे. वैसे स्थिति में जेपी और कर्पूरी की जोड़ी ने इंदिरा गांधी को सत्ता से उखाड़ फेंकने में भूमिका निभाई.
दिल्ली में गिरफ्तार किए गए जयप्रकाश नारायण: 25 जून 1975 को संपूर्ण क्रांति के नायक जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी सभा को संबोधित किया था जयप्रकाश नारायण ने रामलीला मैदान से ही इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया था और संपूर्ण क्रांति का नारा भी दिया था आपातकाल लागू होने के साथ ही जयप्रकाश नारायण को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया.

इंदिरा गांधी की सदस्यता रद्द होने के बाद स्थिति बिगड़ी: दरअसल, आपातकाल की घोषणा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद की गई थी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1971 के भारतीय आम चुनाव में रायबरेली से प्रधानमंत्री के चुनाव को रद्द कर दिया था. उन्हें अपने पद पर बने रहने की वैधता को चुनौती देते हुए अगले 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया था. इंदिरा गांधी ने तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से आपातकाल की घोषणा करने की सिफारिश कर दी थी.
राज नारायण ने दायर किया था मुकदमा: इंदिरा गांधी ने 10 मार्च को उत्तर प्रदेश के रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से अपने निकटतम प्रतिबंध संयुक्त देश पार्टी के उम्मीदवार राज नारायण को एक लाख 10000 मतों से हराया था. राज नारायण ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इंदिरा गांधी के निर्वाचन को चुनौती दी थी. इस तरह की याचिका चुनाव परिणाम घोषित होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर दायर की जाती है.

चुनाव को अमान्य घोषित: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में ऐसे आधारों की सूची दी गई है, जिसके आधार पर उम्मीदवार के चुनाव पर सवाल खड़ा किया जा सकता है. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 127 में कुछ दृष्ट आचरण की सूची दी गई है. साबित होने की स्थिति में उम्मीदवार के चुनाव को अमान्य घोषित किया जा सकता है.
गोविंदाचार्य ने जेपी को समझने का काम किया: जयप्रकाश नारायण के अनुयायियों ने देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. जयप्रकाश नारायण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पहले गहरे मतभेद थे, लेकिन गोविंदाचार्य के प्रयासों से जयप्रकाश नारायण और आरएसएस के बीच दूरियां कम हुई संघ से जुड़े अहम नेता रमाकांत पांडे को गोविंदाचार्य ने जीपी को करीब लाने की जिम्मेदारी दी थी.

गोविंदाचार्य ने जेपी को समझाया: जनसंघ के पूर्व विधायक रमाकांत पांडे ने कदमकुआं में किराए पर घर लिया और रोज जयप्रकाश नारायण से मिलने लगे रमाकांत पांडे बताते हैं कि जयप्रकाश नारायण पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को नहीं पसंद करते थे, लेकिन हम धीरे-धीरे उनके करीब आए और गोविंदाचार्य ने उन्हें समझाया कि आपके पास आंदोलन करने की क्षमता है और मेरे पास आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए लोग हैं.
पुलिस ने किया नजरबंद: अगर हम लोग अगर मिल जाए तो आंदोलन सफल हो सकता है. जेपी सहमत हो गए और फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाया. रमाकांत पांडे बताते हैं कि जिस दिन आपातकाल की घोषणा हुई थी उसे दिन मुंबई गए थे. वहां उन्हें मीटिंग में हिस्सा लेना था. वहां की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और एक कमरे में नजर बंद कर दिया.

पटना सिटी में रहते थे गोविंदाचार्य और कैलाशपति मिश्र: भाजपा नेता और बिहार राज्य उद्यमी एवं व्यवसायिक संघ के अध्यक्ष सुरेश रूंगटा ने कहा कि आपातकाल के दौरान पटना सिटी आंदोलन का केंद्र था. वहीं से हम लोग आंदोलन चलाने का काम करते थे हमारे नेता गोविंदाचार्य और कैलाशपति मिश्र भी पटना सिटी में रहते थे. वह लोग नारा बोलते थे. हम लोग लिखते थे और उसे जगह-जगह बांटने का काम करते थे. हम लोगों का लक्ष्य था कि गिरफ्तारी से बचाना है और आंदोलन को तेज करना है हमारे नेता कैलाशपति मिश्र और गोविंदाचार्य जी पगड़ी बांधकर सिख के वेश में रहते थे. हालांकि बाद में वह गिरफ्तार कर लिए गए.
लालू यादव पहले से जेल में बंद थे: वरिष्ठ पत्रकार और जेपी टू बीजेपी के पुस्तक लेखक संतोष सिंह बताते हैं कि जिस दिन आपातकाल की घोषणा हुई थी उस दिन बिहार के लोग स्तब्ध थे लालू प्रसाद यादव पहले से ही जेल में बंद थे. जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया था.

19 महीने नेपाल में थे कर्पूरी ठाकुर: खास बात यह थी कि आंदोलन में महती भूमिका निभाने वाले कर्पूरी ठाकुर ने अलग तरीके से आंदोलन को धार देने का काम किया. कर्पूरी ठाकुर ने नेपाल को केंद्र बनाया था और 19 महीने तक वह गिरफ्तार नहीं हुए. संतोष सिंह बताते हैं कि कर्पूरी ठाकुर ने पूरे देश का दौरा किया और वह कहीं भी तीन दिन से ज्यादा नहीं रहते थे.
'मैं ही कर्पूरी ठाकुर हूं': कर्पूरी ठाकुर जब मंच पर जयप्रकाश नारायण के साथ हाजिर हुए और कहा कि मैं ही कर्पूरी ठाकुर हूं तब जाकर अप्सरा सिनेमा के पास पुलिस ने कर्पूरी ठाकुर को गिरफ्तार किया. कर्पूरी ठाकुर ने पुलिस पदाधिकारी से कहा कि तुम लोग कैसे ड्यूटी करते हो कि 19 महीने तक मुझे गिरफ्तार नहीं किया.
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