19 वर्षीय दिव्या देशमुख ने जीता महिला चेस विश्व कप का खिताब, ऐसा करने वाली बनीं पहली भारतीय महिला
दिव्या देशमुख ने फिडे महिला चेस वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीत लिया है. उन्होंने फाइनल में अपनी हमवतन कोनेरू हम्पी को हरा दिया.

Published : July 28, 2025 at 4:16 PM IST
|Updated : July 28, 2025 at 5:09 PM IST
हैदराबाद: भारत की 19 वर्षीय दिव्या देशमुख ने सोमवार को जॉर्जिया के बटुमी में अनुभवी और अपनी ही हमवतन कोनेरू हम्पी को हराकर FIDE महिला विश्व कप 2025 का खिताब जीत लिया है. वो यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय और 88वीं भारतीय ग्रैंडमास्टर भी बनीं.
सोमवार को टूर्नामेंट के फाइनल के टाईब्रेक में हमवतन कोनेरू हम्पी को 2.5-1.5 के स्कोर से हराकर पहली भारतीय चैंपियन बनीं. देशमुख को अब लगभग ₹43.23 लाख (50,000 डॉलर) की पुरस्कार राशि मिलेगी, जबकि हम्पी को ₹30.26 लाख (35,000 डॉलर) मिलेंगे.
🇮🇳 Divya Deshmukh, just 19 years old, is the Winner of the 2025 FIDE Women’s World Cup! 🏆
— International Chess Federation (@FIDE_chess) July 28, 2025
With this incredible victory, she:
✨ Becomes a Grandmaster
✨ Secures a spot at the next Women’s Candidates#FIDEWorldCup @DivyaDeshmukh05 pic.twitter.com/fNlkRrzvr1
दिव्या देशमुख टाईब्रेक में रहीं विजय
इस फाइनल का नतीजा टाईब्रेक तक पहुंच गया क्योंकि फाइनल में दो क्लासिकल गेम के बाद दोनों खिलाड़ी 1-1 से बराबरी पर थीं. अब परिणाम 10 मिनट के दो रैपिड मैचों के परिणाम पर निर्भर था, जिसमें प्रत्येक चाल के बाद समय में 10 सेकंड की वृद्धि होती थी.
रैपिड गेम 1 में दिव्या ने टॉस जीतकर सफेद मोहरों से मुकाबला शुरू करने का फैसला किया. 19 वर्षीय दिव्या ने मैच की शुरुआत में आक्रामक खेल दिखाया और हम्पी को समय बर्बाद करने पर मजबूर कर दिया. समय बीत रहा था और हम्पी पर दबाव था, लेकिन वह संयमित रहीं और अपनी रानी से विपक्षी टीम पर आक्रमण करना शुरू कर दिया.
दबाव के कारण दिव्या ने अंतत एक गलती की और अपना मोहरा बिना सुरक्षा को छोड़ दिया, जिससे हम्पी को आक्रमण करने का मौका मिल गया. हम्पी ने रानी बदलने के लिए उकसाया, लेकिन महाराष्ट्रीयन खिलाड़ी ने रानी बदलने से इनकार कर दिया और दोनों खिलाड़ी बराबरी पर आ गईं.
🇮🇳 Divya Deshmukh defeats Humpy Koneru 🇮🇳 to win the 2025 FIDE Women's World Cup 🏆#FIDEWorldCup @DivyaDeshmukh05 pic.twitter.com/KzO2MlC0FC
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रैपिड गेम 2 में 19 वर्षीय दिव्या ने एक बार फिर शानदार शुरुआत की और हम्पी को उनकी सीमा तक धकेल दिया. ओलंपियाड में तीन बार की स्वर्ण पदक विजेता दिव्या को 40वीं चाल में ब्रेक मिला, जब उनकी प्रतिद्वंद्वी ने मोहरे के साथ गलती की और युवा खिलाड़ी को अपनी रानी को सक्रिय करने का मौका दे दिया. अनुभवी दिव्या ने संघर्ष किया और यह एक रूक एंडगेम था, जिसमें युवा खिलाड़ी के पास एक अतिरिक्त मोहरा था.
हम्पी द्वारा अंतिम मिनटों में की गई गलती ने दिव्या के लिए जीत के दरवाजे खोल दिए और अनुभवी खिलाड़ी ने अंततः 75वें मूव पर हार स्वीकार कर ली. इस जीत से दिव्या ने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए योग्यता भी सुनिश्चित कर दी है.
जानिए जीत के बाद क्या बोलीं दिव्या देशमुख
दिव्या देशमुख अपनी जीत के बाद कहा, 'मुझे इसे समझने के लिए समय चाहिए. मुझे लगता है कि यह किस्मत की बात थी कि मुझे इस तरह ग्रैंडमास्टर का खिताब मिला. इस टूर्नामेंट से पहले मेरे पास एक भी मानक नहीं था. यह वाकई बहुत मायने रखता है. अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है. मुझे उम्मीद है कि यह तो बस शुरुआत है'.इस जीत के बाद दिव्या अपनी माँ के साथ जश्न मनाते हुए वह भावुक और उनकी आंखें आंसुओं से भरी हुई दिखीं.
Divya’s hug to her mom says everything ❤️#FIDEWorldCup @DivyaDeshmukh05 pic.twitter.com/jeOa6CjNc1
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दिव्या देशमुख कौन हैं
नागपुर में 2005 में दिव्या देशमुख का जन्म हुआ था. उन्हें बचपन से ही चेस पसंद था और उन्होंने 5 साल की उम्र से ही खेलना शुरू कर दिया था. चेस से उनका परिवार का दूर-दूर तक नाता नहीं था क्योंकि उनके माता पिता दोनों डॉक्टर हैं.
दिव्या ने 7 साल की उम्र में 2012 में अंडर-7 नेशनल चैंपियनशिप में अपना दबदबा दिखाया और टूर्नामेंट को अपने नाम किया. उन्होंने 2021 में महिला ग्रैंडमास्टर का ताज अपने नाम किया. वो 2023 में इंटरनेशनल मास्टर का खिताब भी जीत चुकी हैं. अब वो फिडे महिला चेस वर्ल्ड कप 2025 का खिताब भी जीत चुकी हैं.

