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रंगों के त्यौहार की शान हैं ये होली गीत, उत्तराखंड में इनके बिना अधूरा है फाल्गुन-बसंत

उत्तराखंड की खड़ी और बैठकी होली गीतों से सजी होती है, छलड़ी के दिन ढोलक की थाप पर निकलती है मतवालों की टोली

HOLI SONGS OF UTTARAKHAND
होली 2025 (Photo- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : March 13, 2025 at 9:56 AM IST

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Updated : March 13, 2025 at 10:04 AM IST

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देहरादून: कल यानी 14 मार्च को होली. रंगों के त्यौहार होली की चर्चा होली गीतों के बिना अधूरी है. होली में जब इसके गीत बजते हैं तो होल्यारों की रंगत देखते ही बनती है. उत्तराखंड में कई होली गीत सालों से होली में सुरों के रंग बिखेरते आ रहे हैं. आज हम आपको ऐसे की कुछ चुनिंदा होली गीतों के बारे में बताते हैं.

उत्तराखंड के होली गीत: सबसे पहले उत्तराखंड के सुर सम्राट नरेंद्र सिंह नेगी के गाए होली गीतों की करते हैं. नरेंद्र सिंह नेगी ने वैसे तो उत्तराखंड की संस्कृति, रहन-सहन, रीति-रिवाज, जल-जंगल और जमीन हर विषय से जुड़े गीत गाए हैं, लेकिन उनके होली गीत भी कम रंगीले नहीं हैं. सबसे पहले बात करते हैं उनके गाए पिचकारी कैन मारी की. नरेंद्र सिंह नेगी का ये गीत होली पर हर किसी की जुबान पर होता है. आप भी इस गीत की कुछ लाइनें गुनगुनाइए और होली की मस्ती में खो जाइए.

पिचकारी छरररर कैन मारी तररररर

तन-मन रुझैगे, भिजैगे

होहोहो होरी ऐगे

पर्वतूं मा होहोहो होरी ऐगे

बसंत ऋतु मा होहोहो होरी ऐगे

नरेंद्र सिंह नेगी के होली गीत हैं लाजवाब: नरेंद्र सिंह नेगी का एक और होली गीत फूल फूलेगे होला, फ्यूंली, बुरांश ग्वीराल भी बहुत अपीलिंग है. दरअसल होली के त्यौहार पर देवर-भौजाई की मस्ती सबसे अलग होती है. इस गीत में घर से दूर नौकरी करने गया युवक अपनी भाभी से कह रहा है कि मैं होली पर छुट्टी आ रहा हूं, भाभीजी रंग लगाने को तैयार रहना. आप भी इस गीत को गुनगुनाइए

ऐंसु होरि मा

फूल फूलेगे होला

फ्यूंली, बुरांश ग्वीराल

होरी का हुलेर गैल्या

बैठ्यां होला मेरी जग्वाल

ऐगी फागुण त्यौहार रंग रंगौं की बहार

रंगों की बहार बौजी ह्वे जावा तैयार

छुट्टी में ओणु छूं मैं घौर

ऐंसू होरी मा

देवर-भाभी की होली पर छाया ये गीत: नरेंद्र सिंह नेगी का एक और गीत होली पर खूब धूम मचाता है. इसमें देवर भाभी की होली की छेड़छाड़ का जिक्र है. देवर भाभी से कह रहा है मैं पिचकारी लेकर आ गया हूं, आप बाहर आओ. भाभी कहती है देवरजी मेरी बसंती रंग की सजीली साड़ी है. आप सूखा रंग डालना. गीला रंग डालकर मेरी साड़ी खराब मत करना. आप भी इस गीत के गुनगुनाइए.

अबीर गुलाल लेके

रंग पिचकारी

भैर आवा बौजी

ऐगी होरी का खिलाड़ी

बसंती रंगै सजीली

मेरी नई नई साड़ी

कोरू रंग लगैले द्योरा

पिचकारी ना मारी

भगवान शिव पर होली गीत: इसके साथ ही कुछ ट्रेडिशनल होली गीत भी उत्तराखंड में खूब गाए जाते हैं. होली का भगवान शिव से अटूट नाता है. ऐसा नाता कि 'खेले मसाने में होली' यानी भगवान शिव श्मशान घाट पर रहने वाले भूत-पिशाचों के साथ तक होली खेलते हैं. काशी शिव की नगरी मानी जाती है. ऐसे में शिव के मन में बसे काशी होली गीत उत्तराखंड में खूब गाया जाता है. ये गीत खासकर उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में लोकप्रिय है. आप भी इस होली गीत को गुनगुनाते हुए भगवान शिव से कनेक्ट हो जाइए.

शिव के मन में बसे काशी

शिव के मन में बसे काशी

आधे काशी में बामन बनिया

हे आधे काशी में बामन बनिया

आधे काशी में सन्यासी

शिव के मन में बसे काशी

काहे करन को बामन बनिया

हे काहे करन को बामन बनिया

काहे करन को सन्यासी

शिव के मन में बसे काशी

पूजा करन को बामन बनिया

हे पूजा करन को बामन बनिया

सेवा करन को सन्यासी

शिव के मन में बसे काशी

झुके आयो शहर में व्यापारी होली गीत : इसके साथ ही उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में होली में झुके आयो शहर में व्यापारी होली गीत भी खूब गाया जाता है. बैठकी होली की तो ये गीत जान है. टीम घुघुती जागर ने इसे नए अंदाज में गाया है. आप भी इस गीत को गुनगुनाइए

झुके आयो शहर में व्यापारी

इस व्योपारी को प्यास लगी है

पनिया पिला दे मतवाली, झुकी आयो शहर में व्योपारी

इस व्योपारी को भूख लगी है

खाना खिला दे मतवाली, झुकी आयो शहर में व्योपारी

इस व्योपारी को नींद लगी है-

खटिया बिछा दे मतवाली, झुकी आयो शहर में व्योपारी

इस व्योपारी को ठंड लगी है-

कमली ओढ़ा दे मतवाली, झुकी आयो शहर में व्योपारी

रंगीलो देवर होली गीत है सबकी पसंद: उत्तराखंड के होली गीतों की बात हो और मेरो रंगीलो देवर घर ऐ रौ छौ की चर्चा नहीं हो, ऐसा हो ही नहीं सकता है. ये गीत महिलाओं की होली की शान रहा है. आज भी जहां भी महिला होली होती है, वहां इस गीत के बोल अवश्य सुनाई देते हैं. आप भी मेरो रंगोलो देवर घर ऐ रौ छा के गुनगनाइए.

मेरो रंगीलो देवर घर ऐ रौ छा

मेरो लाड़िल देवर घर ऐ रौ छा

केहुंड़ी झुमका, केहुंड़ी टीका

मैंहुड़ी बिंदिया ल्यै रौ छा

खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर की बात ही अलग है: एक और होली गीत खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर भी होल्यारों की टोली गाती है. जब रंग वाली होली के दिन घर-घर मिलने जाते हैं तो ये गीत सबसे ज्यादा गाया जाता है. आप भी इसका आनंद लीजिए.

खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर

दर्शन दीजो माई अम्बे-झुलसी रहो जी.

तील को तेल कपास की बाती

जगमग जोत जले दिन राती-झुलसी रहो जी

इस गीत पर मस्त होकर नाचते हैं होल्यार: उत्तराखंड का ये होली गीत सालों से रंगों के त्यौहार की शोभा बढ़ा रहा है. को जन खेलें लड़िया हिंडोला. ढोलक की थाप पर जब होल्यार इस गीत को गाते हैं तो जिसे नाचना नहीं आता वो भी थिरकने लगता है. आप भी इस गीत को गुनगुनाइए.

वन फूलों से मथुरा छायी रही

को जन खेलें लड़िया हिंडोला

को जन झूला झुलाय रहे, वन फूलों से मथुरा छायी रही

कृष्ण जी खेले लड़िया हिंडोला

राधा जी झूला झूलाय रहीं, वन फूलों से मथुरा छायी रही

कृष्ण के सिर में मुकुट विराजै

मुकुट में हीरे भरे ही रहें, वन फूलों से मथुरा छायी रही

कृष्ण के गल में माला विराजै

माला में मोती जंड़ ही रहें, वन फूलों से मथुरा छायी रही

कृष्ण के हाथों में वंशी विराजै

अधरों से वंशी बजती रहे, वन फूलों से मथुरा छायी रही

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Last Updated : March 13, 2025 at 10:04 AM IST