न्यूनतम पीएफ पेंशन वृद्धि पर कब होगा फैसला, श्रम मंत्री मांडविया ने दी यह जानकारी
13 अक्टूबर को नई दिल्ली में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में न्यूनतम पीएफ पेंशन बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.

Published : October 14, 2025 at 1:35 PM IST
नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EFPO) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. हालांकि, न्यूनतम पीएफ पेंशन में बढ़ोतरी का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में थे, लेकिन सीबीटी ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है. लंबे समय से उम्मीद की जा रही थी कि अक्टूबर में होने वाली केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह किया जा सकता है.
इस संबंध में केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने 13 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में न्यूनतम पीएफ पेंशन बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.
इससे साफ हो गया है कि न्यूनतम पीएफ पेंशन में बढ़ोतरी का फैसला आने वाले महीनों में हो सकता है. फिलहाल पेंशनभोगियों को इसके लिए इंतजार ही करना होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीटी के ट्रेड यूनियन सदस्यों ने चर्चा के दौरान कहा कि न्यूनतम पीएफ पेंशन को वर्तमान 1,000 रुपये प्रति माह से संशोधित किया जाना चाहिए. सीबीटी के एक सदस्य ने 'द हिंदू' को बताया, "मंत्री ने इसे खारिज नहीं किया और कहा कि मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव पर प्राथमिकता के साथ विचार कर रहा है."
CBT की बैठक में लिए गए अहम फैसले
- ईपीएफ के आंशिक निकासी प्रावधानों को सरल बनाने का निर्णय
- ईपीएफ सदस्य अब कर्मचारी और नियोक्ता के हिस्से सहित भविष्य निधि में पात्र शेष राशि का 100 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे.
- निकासी की सीमा को उदार बनाया गया है - शिक्षा के लिए 10 बार तक निकासी की अनुमति, विवाह के लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति (विवाह और शिक्षा के लिए कुल 3 आंशिक निकासी की मौजूदा सीमा से)
- सभी आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा की आवश्यकता को घटाकर 12 महीने किया गया
- 'विशेष परिस्थितियों' के अंतर्गत आंशिक निकासी के लिए सदस्य बिना कोई कारण बताए आवेदन कर सकते हैं
- सदस्यों के खाते में अंशदान का 25 प्रतिशत न्यूनतम शेष राशि के रूप में निर्धारित करने का प्रावधान, जिसे हर समय बनाए रखना होगा.
- ईपीएफ के समयपूर्व अंतिम निपटान की अवधि को मौजूदा 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने किया गया
- इसी प्रकार, अंतिम पेंशन निकासी की अवधि को 2 महीने से बढ़ाकर 36 महीने करने का निर्णय
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