भारत पर दबाव डालने से अमेरिका को नहीं मिलेगा फायदा, बोनी ग्लेसर की चेतावनी
विशेषज्ञ का कहना है कि अमेरिका की सार्वजनिक दबाव की रणनीति भारत को खोने का जोखिम बढ़ा रही है.

Published : September 6, 2025 at 10:15 AM IST
वॉशिंगटन: जर्मन मार्शल फंड के इंडो-पैसिफिक प्रोग्राम की मैनेजिंग डायरेक्टर बोनी ग्लेसर ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की वर्तमान रणनीति, जिसमें वह भारत को उसकी विदेश नीति के फैसलों पर खुले तौर पर निर्देश दे रहा है, से मनचाहे नतीजे मिलने की संभावना कम है. ग्लेसर ने शुक्रवार को वाशिंगटन में आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप प्रशासन यह मान रहा है कि भारत को अमेरिका की ज्यादा जरूरत है, जबकि अमेरिका को भारत की उतनी आवश्यकता नहीं.
ट्रंप प्रशासन की सोच पर सवाल
ग्लेसर के अनुसार, ट्रंप प्रशासन यह मानता प्रतीत होता है कि भारत अपने रिश्तों को अमेरिका के साथ प्राथमिकता देगा क्योंकि उसे अमेरिका की जरूरत अधिक है. उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण सही नहीं है और इससे द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन बिगड़ सकता है.
BRICS विवाद और अमेरिकी शर्तें
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने भारत से BRICS समूह का हिस्सा न बनने की मांग सहित कुछ शर्तें रखी थीं. ग्लेसर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारी रणनीतिक दृष्टिकोण रखते हैं, लेकिन लुटनिक उनमें शामिल नहीं हैं. पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने वाले वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी कुछ ही महीनों में आई गिरावट से हैरान और दुखी हैं.
ट्रंप का सोशल मीडिया डिप्लोमेसी
ग्लेसर ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ साझा की. ट्रंप ने लिखा कि भारत और रूस अब चीन के हाथों चले गए हैं. ग्लेसर के अनुसार, इस तरह की सोशल मीडिया पोस्ट भारत की नीतियों को प्रभावित नहीं करेगी.
भारत के विकल्प और सहयोगियों की ओर झुकाव
ग्लेसर ने कहा कि अमेरिका से रिश्ते खराब होने पर भारत यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य अमेरिकी सहयोगियों के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका अकेले चीन का सामना करने की कोशिश करेगा तो वह असफल होगा.
भविष्य के लिए सलाह: कूलिंग-ऑफ पीरियड
ग्लेसर ने चेतावनी दी कि प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत जोखिमभरी हो सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को एक कूलिंग-ऑफ पीरियड अपनाना चाहिए ताकि रिश्तों में और गिरावट न आए.
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र रहेगा और अमेरिका के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने के लिए दोनों देशों को शांतिपूर्ण और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना होगा.
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