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इस बैंक के खाताधारक 10 हजार रुपये से ज्यादा नकद नहीं निकाल पाएंगे; आपका खाता भी तो इसी बैंक में नहीं है?

आरबीआई ने बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर अंकुश लगाए, निकासी ₹10,000 तक सीमित, नए कर्ज और जमा रोक, जमाकर्ता ₹5 लाख तक बीमित, लाइसेंस बरकरार.

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सांकेतिक फोटो (getty image)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : October 9, 2025 at 10:31 AM IST

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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित द बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर सख्त निगरानी उपाय लागू किए हैं. आरबीआई ने बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति और संचालन संबंधी अनियमितताओं को देखते हुए कई पाबंदियां लगाई हैं, जिनमें ग्राहकों के लिए निकासी सीमा को 10,000 रुपये तक सीमित करना शामिल है. आरबीआई ने कहा कि यह कदम जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने और बैंक के संचालन में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

सुधार न होने पर कार्रवाई
केंद्रीय बैंक ने बताया कि हाल के महीनों में बैंक के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा की गई थी, और निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां पाई गईं. आरबीआई ने बैंक के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन से इन खामियों को सुधारने के लिए चर्चा की, लेकिन बैंक द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए. परिणामस्वरूप, आरबीआई को बैंक पर संचालन संबंधी प्रतिबंध लगाने पड़े. आरबीआई ने स्पष्ट किया कि इन उपायों का उद्देश्य बैंक को बंद करना नहीं बल्कि वित्तीय अनुशासन बहाल करना है.

कर्ज और नई जमा पर रोक
इन पाबंदियों के तहत, द बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक बिना आरबीआई की पूर्व अनुमति के कोई नया कर्ज या अग्रिम राशि नहीं दे सकेगा. बैंक अब किसी भी प्रकार की नई जमा स्वीकार करने या उधारी लेने से भी वंचित रहेगा. आरबीआई ने यह भी कहा कि बैंक अपने ग्राहकों की जमा राशि को उनके ऋण के विरुद्ध समायोजित कर सकता है, लेकिन ग्राहकों को अपने किसी भी खाते — चाहे वह बचत, चालू या अन्य — से केवल अधिकतम 10,000 रुपये निकालने की अनुमति होगी.

जमाकर्ताओं को डीआईसीजीसी से बीमा सुरक्षा
जमाकर्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए, आरबीआई ने स्पष्ट किया कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत पात्र जमाकर्ताओं को अधिकतम ₹5 लाख तक की बीमा राशि प्राप्त करने का अधिकार होगा. यह बीमा कवरेज बैंक में जमा सभी प्रकार की रकम पर लागू होगा, जिसमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), बचत खाता और चालू खाता सभी शामिल हैं. चाहे ग्राहक ने बैंक में इससे अधिक राशि जमा की हो, उन्हें केवल पांच लाख रुपये तक की सुरक्षा ही मिलेगी.

बैंक का लाइसेंस बरकरार
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि इन प्रतिबंधों का अर्थ बैंक का लाइसेंस रद्द होना नहीं है. बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के प्रयास जारी रखेगा और इस अवधि में सीमित बैंकिंग गतिविधियाँ संचालित कर सकेगा. केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह बैंक की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर इन आदेशों की समीक्षा करेगा.

इन निर्देशों का प्रभाव 8 अक्टूबर 2025 से शुरू हो गया है और यह शुरुआती तौर पर छह महीने तक लागू रहेंगे. इससे पहले महाराष्ट्र के जीजाबाई को-ऑपरेटिव बैंक पर भी आरबीआई ने इसी तरह की सख्ती दिखाई थी. केंद्रीय बैंक का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि वह को-ऑपरेटिव बैंकों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतने वाला है.

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