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उत्तरकाशी के धराली में ग्लेशियर डिपॉजिट के टूटने से मची तबाही! वैज्ञानिक स्वप्नमिता ने बताए कारण

उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा को तीन दिन हो चुके हैं. आपदा के कारणों का पता लगाने को लेकर वैज्ञानिक लगातार जुटे हुए हैं.

WIHG Scientist Swapnamita Choudhury
ग्लेशियर डिपॉजिट से तबाही (फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 7, 2025 at 3:27 PM IST

4 Min Read
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धीरज सजवाण, देहरादून: उत्तराखंड के धराली में आई भीषण आपदा के बाद जहां एक तरफ राज्य सरकार राहत बचाव कार्यों में युद्धस्तर पर लगी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ इस आपदा के पीछे क्या वैज्ञानिक कारण हैं? इसको लेकर लगातार वैज्ञानिक और विशेषज्ञ लगातार काम करने में जुट गए हैं.

ईटीवी भारत ने सबसे पहले दिखाया था कि कैसे एक बड़ा ग्लेशियर डिपॉजिट के टूटने की तस्वीर एक वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट ने साझा की थी. उन्होंने बताया था कि यह आपदा किसी ग्लेशियर झील के टूटने की वजह से नहीं बल्कि, भूस्खलन और उसके साथ ग्लेशियर पदार्थ की वजह से आई. वहीं, अब वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट डॉ. स्वप्नमिता चौधरी ने भी इसे स्वीकारा है. जिससे ईटीवी भारत की खबर पर मुहर लग गई है.

धराली में ग्लेशियर डिपॉजिट के टूटने से मची तबाही! (वीडियो-ETV Bharat/Geologist Swapnamita Choudhury)

बादल फटने की घटना नहीं कहा जा सकता: ईटीवी भारत से बातचीत में वाडिया संस्थान के वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट स्वप्नमिता चौधरी (Swapnamita Choudhury) ने बताया कि 'धराली आपदा से पहले के सभी तरह के डाटा को देखने पर लग रहा है कि उस क्षेत्र में कोई भारी बारिश का संकेत नहीं मिला है. बारिश के डाटा के अनुसार ये कहना बेहद मुश्किल है कि यह घटना बादल फटने के बाद हुई है.'

Dharari Disaster Scientific Reason
धराली में जल सैलाब से तबाही (फाइल फोटो- Local Resident)

"तमाम अन्य अलग-अलग तरह के सोर्सेस से मलबा के वीडियो देखने को मिल रहे हैं. इसके अलावा जो घटनास्थल पर स्लरी मटेरियल आया है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह किसी ग्लेशियर डिपॉजिट का हिस्सा है."- स्वप्नमिता चौधरी, वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान

डॉ. स्वप्नमिता चौधरी ने बताया कि 'धराली में जो नदी आ रही है, वो खीर गंगा है. खीर गंगा एक ग्लेशियर वैली है. जिसके ऊपर एक हैंगिंग ग्लेशियर भी है. इस वैली में काफी ज्यादा ग्लेशियर मटेरियल मौजूद हैं.' उन्होंने बताया कि 'यह सेंट्रल क्रिस्टलाइन जोन का एक बड़ा हिस्सा है. ऊपर ग्लेशियर तक काफी ज्वाइंटस और फ्रैक्चर भी देखने को मिलते हैं.'

Dharari Disaster Scientific Reason
धराली में ऊपर से आया स्लरी मटेरियल (फोटो सोर्स- Geologist Swapnamita Choudhury)

ग्लेशियर और मोरेन का कोई बड़ा हिस्सा टूटने की संभावना: वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट स्वप्नमिता चौधरी ने कहा कि इस बात में पूरी संभावना है कि 'ग्लेशियर और मोरेन का कोई बड़ा हिस्सा यहां पर टूटा हो.' हालांकि, इसके लिए हमें अपडेटेड सैटेलाइट डाटा देखना होगा, उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है.

Dharari Disaster Scientific Reason
ग्लेशियर डिपोजिट टूटने से मची तबाही (फोटो सोर्स- Geologist Swapnamita Choudhury)

डाउनस्ट्रीम में नहीं था उतना ज्यादा डिस्चार्ज: वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट स्वप्नमिता चौधरी का कहना है कि इस घटना के बाद डाउनस्ट्रीम में आए डिस्चार्ज का डाटा भी इस बात की तस्दीक करता है कि इसमें पानी की उतनी मात्रा नहीं थी. उन्होंने बताया शाम का जो डिस्चार्ज रिकॉर्ड किया गया है, वो तकरीबन 700 क्यूबिक है.

Dharari Disaster Scientific Reason
धराली के ऊपर ग्लेशियर वैली (फोटो सोर्स- Geologist Swapnamita Choudhury)

उन्होंने बताया कि घटना के समय यह 300 से 400 क्यूबिक था. जिसका 700 हो जाना, कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं है. यही सारे फैक्टर हैं कि इसमें 'बादल फटने' की घटना कहना बेहद मुश्किल है. उन्होंने बताया कि खीर गंगा वैली के आसपास बहुत छोटे-छोटे गाड़-गदेरे हैं, जो कि काफी ऊपर से आ रहे हैं.

ISRO
इसरो से जारी सैटेलाइट इमेज (फोटो सोर्स- ISRO)

उन्होंने बताया कि 7 किलोमीटर में तकरीबन 2000 किलोमीटर का एलिवेशन है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऊपर से आने वाले मटेरियल का प्रेशर कितना होगा. यही वजह है कि जब भी इस संकरी घाटी में बहुत कम मात्रा में भी पानी बहेगा, उसकी रफ्तार बहुत तेज होगी. वो अपने साथ पूरे मोरेन और ग्लेशियर मैटेरियल को भी साथ में बहकर लाएगा. इसी रफ्तार को घटना के वीडियो में भी देखा गया है.

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