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गयाजी के पंडों की शादी में पांच बारात की अनोखी परंपरा, मुंह दिखाई की रस्म भी खास

गयाजी के पंडों समाज में शादी की अनोखी परंपरा है. जिसमें चार-पांच बार बारात निकलती है और दहेज की प्रथा नहीं होती. पढ़ें पूरी खबर

गयाजी के पंडों समाज में शादी में निकलती है पांच बारात
गयाजी के पंडों समाज में शादी में निकलती है पांच बारात (ETV B1harat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 18, 2025 at 5:39 PM IST

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गया: गयाजी के पंडों की शादी में बारात पांच बार निकलना सुनने में जितना अजीब लगे, उतना ही रोचक और दिलचस्प भी है. हर बारात के पीछे एक अलग कहानी और खास महत्व छुपा होता है, जो इस परंपरा को और भी जीवंत बना देता है. यह रिवाज न केवल शादी की खुशियों को दोगुना करता है, बल्कि परिवार और समाज के बीच रिश्तों को भी मजबूत करता है.

गया जी में पितृपक्ष मेला पूरे शबाब: हालांकि गया जी में इन दिनों विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला पूरे शबाब पर है. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां अपने पितरों की मोक्ष की कामना लेकर आते हैं और पवित्र फल्गु नदी के तट पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. इस धार्मिक कार्य में गयापाल पंडा मुख्य भूमिका निभाते हैं, जो पीढ़ियों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं. पंडा समाज के रहन-सहन, शादी-विवाह की रीतियां आम समाज से काफी अलग होती हैं. आइए जानते हैं इस अनोखी परंपरा के पीछे की दिलचस्प वजहें.

गयाजी पंडों का पांच शादी की पूरी कहानी (ETV Bharat)

गयाजी के पंडों की शादी में बारात: गयापाल पंडा निरंजन कुमार धोखड़ी बताते हैं कि उनके समाज में शादी की रस्में आम लोगों से बिल्कुल अलग होती हैं. जहां सामान्य तौर पर बारात एक बार ही निकलती है, वहीं गयापाल पंडा समाज में चार-पांच बार बारात निकलती है. हर बारात एक खास रस्म के साथ जुड़ी होती है और विवाह के अलग-अलग चरणों को दर्शाती है. समय के साथ कुछ बदलाव आए हैं, लेकिन गयापाल पंडा इस बात को लेकर सजग हैं कि उनकी पहचान और परंपरा कभी विलुप्त न हो.

"हम बदलते समय को स्वीकार करते हैं, लेकिन हमारी संस्कृति और परंपरा ही हमारी असली पहचान है, जिसे हम कभी खोने नहीं देंगे."-निरंजन पंडा

अनोखी होती है शादी की व्यवस्था: गया के प्रसिद्ध गयापाल पंडा महेश लाल बताते हैं कि उनके समाज में शादी की प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है और यह आम लोगों की शादियों से काफी अलग होती है. भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों के पुरोहित समाजों की तरह, गयापाल पंडा भी अपने विशिष्ट सामाजिक रीति-रिवाज, रहन-सहन और खान-पान को लेकर विशेष पहचान रखते हैं.

मथुरा की लड़कियां ब्याही जाती हैं: महेश लाल ने बताया कि जैसे मथुरा में ब्रज संस्कृति के तहत मथुरा की लड़कियां अपने ही समाज में ब्याही जाती हैं, उसी तरह गयापाल पंडा समाज में भी विवाह की परंपरा समाज के दायरे में ही निभाई जाती है, केवल गोत्र का ध्यान रखा जाता है. समाज के भीतर ही विवाह संबंध तय किए जाते हैं, जिससे पारंपरिक संरचना बनी रहती है. यह व्यवस्था आज भी जीवंत है और आधुनिकता के बावजूद समाज के लोग इसे पूरी आस्था और निष्ठा के साथ निभा रहे हैं.

गयाजी पंडों का शादी की रस्म करता दूल्हा
गयाजी पंडों का शादी की रस्म करता दूल्हा (ETV Bharat)

पांच बारात की अनोखी शादी: गयापाल पंडा महेश लाल के अनुसार, पंडा समाज में पांच बारात की परंपरा सदियों से चली आ रही है. हालांकि समय के साथ कुछ बदलाव आए हैं और अब कई परिवार दो या तीन बारात ही निकालते हैं. पुराने समय में जब पंडा समाज अधिक समृद्ध था, तो उन्हें बिना राजतिलक के राजा माना जाता था. इसी वैभव और शाही अंदाज के चलते उनकी शादी-विवाह की रस्में भी भव्य और पांच बारात वाली होती थीं.

दिखाऊनी से होती है शादी की शुरुआत: गयापाल पंडा महेश लाल बताते हैं कि शादी की परंपरा की शुरुआत टीका-तिलक से होती है, जिसके दौरान वर और वधू पक्ष की ओर से एक बारात निकलती है और दोनों घरों में तिलक चढ़ाया जाता है. कुल मिलाकर पांच बारात निकलने की परंपरा रही है, जो अब कुछ परिवारों में कम हो गई है। लेकिन फिर भी, कई समृद्ध परिवार आज भी अपनी इस भव्य परंपरा को बड़े सम्मान के साथ निभा रहे हैं.

दिखाऊनी बारात की भव्य परंपरा: पंडा समाज में शादी की पहली बरात को दिखाऊनी बारात या तिलक बारात कहा जाता है. यह बारात वर पक्ष से वधू पक्ष के घर जाती है, जबकि आम समाज में लड़की के परिवार से लड़के के घर तिलक के लिए जाया जाता है. इस बारात में गाजे-बाजे के साथ परिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं और आमतौर पर इसमें 50 से अधिक लोग होते हैं. यह एक भव्य और शाही परंपरा है, जिसमें संख्या की कोई सीमा नहीं होती.

बारात निकलने से पहले पंडा समाज के वर पक्ष
बारात निकलने से पहले पंडा समाज के वर पक्ष (ETV Bharat)

उपहार और संदेश की परंपरा: दिखाऊनी बारात के दौरान लड़की वाले लड़के को सोने-चांदी के चैन, अंगूठी, कपड़ा और सलामी के रूप में पैसे देते हैं. वहीं, लड़के पक्ष की ओर से दिखाऊनी बारात में सात से अधिक तरह की मिठाइयां, फल और अन्य संदेश के रूप में भेजे जाते हैं. इन उपहारों की मात्रा और वजन कोई निश्चित सीमा में नहीं बंधे होते, बल्कि लोग अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार संदेश लेकर जाते हैं.

जोड़ा बारात लड़की पक्ष की भव्य यात्रा: निरंजन पंडा के अनुसार, शादी की दूसरी बारात को जोड़ा बारात कहा जाता है, जिसमें लड़की पक्ष के लोग लड़के पक्ष के घर जाते हैं. इस बारात में परिवार के सदस्यों के लिए कपड़े और अन्य समान ले जाया जाता है. आमतौर पर कम से कम 51 जोड़े कपड़े साथ होते हैं, लेकिन कई परिवारों में यह संख्या इससे भी अधिक हो सकती है. इस बारात में माता-पिता, दादा-दादी और अन्य रिश्तेदारों के लिए कपड़े विशेष रूप से शामिल होते हैं.

मिठाई और गुड़ की खास परंपरा: जोड़ा बारात के साथ मिठाई और फल भी संदेश के रूप में भेजे जाते हैं, जिसमें गुड़ की मिठाइयों का विशेष महत्व होता है. कुल सात तरह की गुड़ की मिठाई इस बारात में शामिल होती हैं. इनमें से एक खास मिठाई होती है मोकदर लड्डू, जिसका वजन लगभग 1 किलो 25 ग्राम होता है.

तीसरी बारात जेवर बारात की परंपरा: निरंजन पंडा के अनुसार, शादी की तीसरी बारात को जेवर बारात कहा जाता है, जिसमें लगभग 50 से 60 लोग लड़की के घर जाते हैं. इस बारात में लड़की को जेवरात, कपड़े और अन्य उपहार दिए जाते हैं. जेवरात की गुणवत्ता और मात्रा लोगों की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती है, जिससे यह परंपरा व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार निभाई जाती है.

तोहफों के साथ लौटती बारात: जेवर के अलावा, लड़की के परिवार को कपड़े और अन्य तोहफे भी दिए जाते हैं. इस बारात में महिलाओं की संख्या अधिक होती है और सभी उपहार देने के बाद लड़के के पक्ष के लोग अपने घर लौट आते हैं. यह रस्म गयापाल पंडा समाज की शादी-विवाह की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है.

चौथी बारात शादी की भव्य रस्म: महेश लाल पंडा बताते हैं कि गयापाल पंडा समाज में चौथी बारात शादी की होती है, जिसमें लगभग 100 से अधिक लोग शामिल होते हैं। शादी की सभी पारंपरिक रस्में बड़ी श्रद्धा और भव्यता से निभाई जाती हैं। बारात की संख्या कोई निश्चित सीमा नहीं होती, लेकिन आमतौर पर सौ से कम लोग नहीं होते। शादी की कई विधियां आम समाज से अलग होती हैं, जिन्हें आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाया जाता है.

वधू के घर से अंतिम बारात विदाई: पंडा समाज में अंतिम बारात विदाई की बारात कहलाती है, जिसमें लड़के के पक्ष के लगभग 100 लोग शामिल होते हैं. इस बारात में लड़की की विदाई कराकर उसे वर पक्ष अपने घर ले जाता है. कभी-कभी शादी के तुरंत बाद विदाई नहीं होती, तब यह बारात और भी भव्य होती है. विदाई बारात में लड़के वाले कम से कम 51 किलो मिठाई साथ लेकर जाते हैं, जबकि वधू पक्ष की ओर से भी मिठाई, फल और अन्य संदेश के रूप में उपहार दिए जाते हैं.

"दिखाऊनी या जोड़ा बारात भी बड़े धूमधाम से, बैंड बाजा, हाथी और घोड़े के साथ निकलती है. इस बारात में दूल्हा, बाराती के साथ-साथ कठपुतली, मिट्टी और कागज के खिलौने, मूर्तियां, मिठाई और अन्य सामग्री भी शामिल होती हैं. दूल्हा घोड़े पर सवार होकर शान-शौकत के साथ जाता है, जिससे बारात के मार्ग पर चौक-चौराहों पर भीड़ जमा हो जाती है." -चंदन गुर्दा, गयापाल समाज

बारात में भोजन की अनोखी परंपरा: निरंजन पंडा बताते हैं कि गयापाल पंडा समाज में लड़के की ओर से निकलने वाली बारातों में सिर्फ शादी बारात के समय ही भोजन कराया जाता है. बाकी बारातों में मौसम के अनुसार फल, शरबत और हल्का नाश्ता दिया जाता है. पहले केवल पानी और शरबत की परंपरा थी, अब नाश्ते की भी व्यवस्था होने लगी है. यह सब आपसी सहमति से होता है. अगर लड़की पक्ष आर्थिक रूप से कमजोर हो तो लड़के वाले विवाह की सारी व्यवस्था करते हैं.

दहेज की प्रथा से मुक्त समाज: महेश लाल बताते हैं कि उनके समाज में दहेज की प्रथा नहीं है, इसलिए लड़की पक्ष पर किसी भी प्रकार का आर्थिक या सामाजिक बोझ नहीं होता. शादी पूरी तरह आपसी सहमति से होती है और परंपराओं का पालन सहज और सरल तरीके से किया जाता है. उन्होंने कहा कि आज के पढ़े-लिखे युवाओं के बीच भी दहेज का चलन नहीं है. वे अपनी अनोखी परंपराओं को बिना बोझ डाले निभाने की पूरी कोशिश करते हैं.

"पंडा समाज में शादियां वाराणसी पंचांग के दोनों मांगलिक शुभ समय पर होती हैं, लेकिन रस्मों का अंदाज अलग होता है. परंपरागत रूप से पंडा समाज में चार से पांच बार बारात निकलने की परंपरा रही है. फिर भी, वे मानते हैं कि बदलते जमाने के साथ बारात की संख्या कम हुई है. आज मुख्यत: दो या तीन बारात निकलती हैं. तिलक-दिखौनी, शादी की बारात और विदाई की बारात." -अमरनाथ ढोलकी, पूर्व कार्यकारिणी सदस्य, गयापाल श्री विष्णुपद

मुंह दिखाई की अनोखी परंपरा: निरंजन पंडा बताते हैं कि गयापाल पंडा समाज में मुंह दिखाई की रस्म खास होती है. यहां शादी में रिसेप्शन नहीं होता और लड़का-लड़की साथ नहीं बैठते। शादी के बाद लड़की ससुराल आती है, जहां परिवार के सदस्य उसकी मुंह दिखाई करते हैं. इस अवसर पर परिवार के लोग उसे गिफ्ट देते हैं और लड़की उस परिवार के किसी सदस्य को हल्दी लगाकर आशीर्वाद लेती है.

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