हेट स्पीच केस में जितेंद्र नारायण बरी, 3 हिंदू मित्रों को दिया अंतिम संस्कार का अधिकार, वक्फ बोर्ड संशोधन पर ये कहा
धर्म संसद हेट स्पीच मामले में जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी बरी हो गए हैं. जिसके बाद उन्होंने वक्फ बोर्ड संशोधन को अच्छा बताया.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : April 20, 2025 at 11:10 AM IST
|Updated : April 20, 2025 at 11:53 AM IST
हरिद्वार (उत्तराखंड): वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह हेट स्पीच मामले में हरिद्वार कोर्ट से बरी हो गए हैं. बरी होने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें छह महीने बेगुनाह जेल में रखा गया और जहर देने की कोशिश भी की गई. उन्होंने कहा कि, उनकी जमानत रोकने के लिए बड़े-बड़े वकीलों को खड़ा किया गया. यह सब केवल इसलिए कि उन्होंने सनातन धर्म को स्वीकार किया.
उन्होंने कहा कि आज भी उनका परिवार इस्लाम को मानता है, इसलिए उन्होंने अपनी वसीयत की है, जिसमें उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद अपने अंतिम संस्कार का अधिकार अपने 3 मित्रों को दिया है. ये लोग सनातन परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करने के लिए अधिकृत हैं.
वहीं, वक्फ बोर्ड संशोधन और पश्चिम बंगाल में हिंसा पर बोलते हुए वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि वक्फ बोर्ड में जो भी संशोधन हुए हैं वो अच्छे हैं. उसके किसी को कोई नुकसान नहीं है. उनका मानना तो ये है कि हिंदुस्तान से वक्फ बोर्ड को ही समाप्त कर देना चाहिए. जैसे सीएए के विरोध के लिए कई शाहीनबाग बनाए गए, ताकि सीएए लागू ना हो सके और सीएए की आड़ में एनआरसी लागू ना हो सके, वैसे ही इसलिए बंगाल में वक्फ बोर्ड संशोधन का विरोध हो रहा है, ताकि भविष्य में वक्फ बोर्ड में और सख्ताई ना हो सके. उन्होंने कहा सीएम ममता की मजबूरी है कि उनको वोट बैंक की राजनीति के चलते कट्टरपंथियों का सपोर्ट करना पड़ रहा है.
गौरतलब हो कि, हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर 2022 के बीच धर्म संसद का आयोजन किया गया था. जिसमें कथित रूप से एक विशेष समुदाय के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक बयान दिए गए थे. ये बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे. हरिद्वार धर्म संसद हेट स्पीच का वीडियो वायरल होने के बाद बहुत से लोगों ने विवादित भाषण की निंदा करते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी. वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह को जेल जाना पड़ा. यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया था. जिसके बाद उनका नाम जितेंद्र नारायण सिंह रखा गया है.
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