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ओडिशा, एमपी और गुजरात के आदिवासी सिकल सेल से सबसे ज्यादा प्रभावित; क्या कहते हैं विशेषज्ञ

ओडिशा, मध्य प्रदेश और गुजरात शीर्ष तीन राज्य हैं जहां आदिवासी क्षेत्रों की अधिकतम आबादी सिकल सेल रोग से पीड़ित है.

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सांकेतिक तस्वीर. (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 9, 2025 at 3:51 PM IST

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नई दिल्ली: भारत के 17 राज्यों में कुल 2 लाख 16 हजार 118 सिकलसेल रोगियों की पहचान की गयी है. इनमें से 96 हजार 484 ओडिशा में, 30 हजार 762 मध्य प्रदेश में और 28 हजार 178 मरीज गुजरात में हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 8 जुलाई 2025 तक 17 चिन्हित जनजातीय बहुल राज्यों में कुल 6 करोड़ 04 लाख 50 हजार 683 लोगों की जांच की गई.

सिकल सेल रोग क्या होता हैः

सिकल सेल रोग एक दीर्घकालिक, एकल-जीन विकार है जो एक दुर्बल करने वाला प्रणालीगत सिंड्रोम उत्पन्न करता है. जिसके लक्षण हैं दीर्घकालिक रक्ताल्पता, तीव्र दर्दनाक घटनाएं, अंग रोधगलन और दीर्घकालिक अंग क्षति. एससीडी एक आनुवंशिक रक्त विकार है जो रोगी के पूरे जीवन को प्रभावित करता है, क्योंकि यह विभिन्न गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बनता है.

एससीडी के कारण लाल रक्त कोशिकाएं गोल और लचीली होने के बजाय असामान्य रूप से अर्धचंद्राकार या दरांती के आकार की हो जाती हैं. ये दरांती के आकार की कोशिकाएं रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर सकती हैं, जिससे दर्द और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं. यह आनुवंशिक रक्त रोग हीमोग्लोबिन को प्रभावित करता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है.

आदिवासियों में एस.सी.डी. के प्रचलन का कारणः

सिकल सेल रोग भारत में, खासकर आदिवासी आबादी में विशेष रूप से पायी जाती हैं. हालांकि यह गैर-आदिवासियों को भी प्रभावित करता है. 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में विश्व स्तर पर सबसे अधिक जनजातीय जनसंख्या घनत्व है, जहां 8.6 प्रतिशत जनसंख्या, यानी 67.8 मिलियन लोग आदिवासी हैं.

ईटीवी भारत से बात करते हुए, प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन, इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. तामोरिश कोले ने कहा कि सिकल सेल रोग ज्यादातर आदिवासी आबादी में प्रचलित है. क्योंकि ये समुदाय ऐतिहासिक रूप से मलेरिया-ग्रस्त जंगली और पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं, जहां सिकल सेल जीन की एक प्रति होने से गंभीर मलेरिया के खिलाफ आंशिक सुरक्षा मिलती है. यह जीन पीढ़ियों तक बनी रहती है. अंतर्विवाह (एक ही समुदाय के भीतर विवाह) की प्रथा के साथ, इसने जीन की सांद्रता को बढ़ा देता है, जिससे यह रोग आदिवासी समूहों में अधिक आम हो गया है.

गैर-आदिवासियों को भी प्रभावित कर सकता हैः

डॉ. कोले ने कहा, "सिकल सेल रोग (एससीडी) आदिवासी समूहों में सबसे आम है, यह गैर-आदिवासी आबादी को भी प्रभावित कर सकता है. इसका मुख्य कारण परिवार में सिकल सेल जीन की उपस्थिति है, चाहे वह किसी भी जातीय या जाति का हो."

डॉ. कोले के अनुसार, भारत में मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों के कुछ गैर-आदिवासी समुदाय, जैसे महाराष्ट्र में कुनबी, तेली और आगरी, साथ ही ऐतिहासिक रूप से उच्च मलेरिया वाले क्षेत्रों की कुछ अनुसूचित जातियां में इसका प्रचलन अधिक है. उन्होंने कहा, "मिश्रित विवाहों से पैदा हुए बच्चे, जहां एक या दोनों माता-पिता सिकल सेल लक्षण रखते हैं, वे भी जोखिम में हैं, भले ही माता-पिता में से कोई भी आदिवासी समुदाय से संबंधित न हो."

सिकल सेल के लिए निवारक कदमः

डॉ. कोले ने कहा, "यह बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों, विशेष रूप से उच्च-प्रचलन वाले जिलों में और वाहक दम्पतियों को आनुवंशिक परामर्श प्रदान करके प्राप्त किया जा सकता है. जन जागरूकता पहल समुदायों को विरासत के तरीके और विवाह या गर्भधारण से पहले परीक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है."

सरकारी कार्यक्रम, जैसे कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (जिसका लक्ष्य 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को समाप्त करना है), स्क्रीनिंग, परामर्श और प्रारंभिक प्रबंधन सेवाओं को मजबूत करने के लिए काम करते हैं.

डॉ. कोले ने कहा, "हालांकि इस बीमारी से पीड़ित लोगों में इसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों में इसके प्रकोप को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा प्रभावित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है."

एससीडी के खिलाफ सरकारी कार्रवाईः

हाल ही में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय ने सिकल सेल रोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक समर्पित टीम गठित की है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, संयुक्त टीम देश भर में एससीडी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी और इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाएगी.

उल्लेखनीय है कि एससीडी को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (एनएससीएईएम) का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2023 को मध्य प्रदेश से किया था.

मिशन का उद्देश्य सभी सिकल सेल रोगियों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करना, जागरूकता सृजन के माध्यम से सिकल सेल रोग के प्रसार में कमी लाना, जनजातीय क्षेत्रों के प्रभावित जिलों में 0-40 वर्ष आयु वर्ग के 7 करोड़ लोगों की वर्ष 2025-26 तक लक्षित जांच करना और केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से परामर्श प्रदान करना था.

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