उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं में 8 साल में 3,534 लोगों ने गंवाई जान, अरबों की संपत्ति का हुआ नुकसान
बीते कुछ सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उत्तराखंड ने आपदा में बहुत कुछ खोया है, जिसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 20, 2025 at 11:05 AM IST
|Updated : August 20, 2025 at 2:47 PM IST
देहरादून (रोहित कुमार सोनी): उत्तरकाशी जिले के धराली में बीती पांच अगस्त को आई आपदा ने फिर उन पुराने जख्मों को हरा कर दिया, जो उत्तराखंड प्राकृतिक आपदा के रूप में बरसों से झेल रहा है. हालांकि, उत्तराखंड के लिए धराली जैसी आपदा नई नहीं है. मॉनसून हर साल उत्तराखंड के लिए बर्बादी लेकर आता है. बीते दस सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड में करीब 18,464 प्राकृतिक आपदाएं आई हैं, जिन्होंने उत्तराखंड को बहुत नुकसान पहुंचाया है.
विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला प्रदेश उत्तराखंड आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील राज्य है. आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़े खुद इसकी तस्दीक करते हैं. मॉनसून सीजन तो उत्तराखंड के लिए काफी घातक साबित होता है. क्योंकि मॉनसून उत्तराखंड को आपदा के रूप में हर साल कोई न कोई नया जख्म देकर ही जाता है. इस साल 2025 में भी उत्तराखंड को धराली आपदा के रूप में कभी न भूल पाने वाला जख्म मिला है. इस आपदा में 66 लोग लापता हैं, जिनकी खोजबीन में बीते 14 दिनों से सर्च ऑपरेशन चल रहा है. लेकिन 50 फीट मलबे के नीचे दबे लोगों को कुछ पता नहीं चल पा रहा है.

बीते दस सालों का रिकॉर्ड: धराली आपदा उत्तराखंड के लिए कोई पहला जख्म नहीं है, बल्कि बीते कुछ सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो वो काफी डराने वाले हैं. साल 2015 से 2024 तक आई प्राकृतिक आपदाओं पर गौर करें तो इन 10 सालों में 18,464 प्राकृतिक घटनाएं हुई हैं. इनके चलते हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. इन सभी घटनाओं में से सबसे अधिक 12,758 तेज बारिश और बाढ़ की घटनाएं हुई हैं.

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 10 सालों में करीब 18,464 प्राकृतिक घटनाओं के चलते 3,667 पक्के और कच्चे मकान जमींदोज हुए थे. इसके अलावा 9,556 पक्के मकान और 5,390 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे.
साल 2018 सबसे मुश्किल भरा रहा: साल 2015 से 2024 के बीच साल 2018 में सबसे अधिक घटनाएं हुई थी. साल 2018 में 5,056 घटनाएं दर्ज हैं. जिसमें 720 लोगों की मौत और 1,207 लोग घायल हो गए थे.

साल 2025 की आपदाओं पर एक नजर: वर्तमान साल 2025 में अगस्त के पहले हफ्ते तक करीब 700 प्राकृतिक घटनाएं हुई हैं, जिसके चलते 209 लोगों की मौत और 491 लोग घायल हो चुके हैं. जबकि अभी भी इस साल में चार महीने का समय बचा हुआ है.
आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 10 सालों में 4,654 भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं. जिसमें पौड़ी जिले में सबसे अधिक 2,040; पिथौरागढ़ जिले में 1,426; टिहरी गढ़वाल जिले में 279; चमोली जिले में 258; चंपावत जिले में 173; उत्तरकाशी जिले में 80; रुद्रप्रयाग जिले में 48; अल्मोड़ा जिले में 30 व अन्य जिलों में 320 भूस्खलन की घटनाएं शामिल हैं.

भूस्खलन बड़ी समस्या: उत्तराखंड में लैंडस्लाइड भी बड़ी समस्या बनता जा रहा है. पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) के साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग समय-समय पर भूस्खलन की घटनाओं पर लगाम लगाए जाने को लेकर भूस्खलन प्रोन क्षेत्रों का ट्रीटमेंट करता है. लेकिन भारी बारिश के चलते नए भूस्खलन जोन बनते जा रहे हैं. साथ ही कुछ नए भूस्खलन जोन सक्रिय हो रहे हैं.

पिछले सालों में बढ़ा प्राकृतिक आपदाओं से मौत का आंकड़ा: साल 2018 में 720 लोगों की मौत और 1207 लोग घायल हुए थे. साल 2019 में 532 लोगों की मौत और 980 लोग घायल हुए थे. साल 2020 में 301 लोगों की मौत और 460 लोग घायल हुए थे. साल 2021 में 393 लोगों की मौत और 366 लोग घायल हुए थे. साल 2022 में 518 लोगों की मौत और 679 लोग घायल हुए थे. साल 2023 में 497 लोगों की मौत और 956 लोग घायल हुए थे. साल 2024 में 384 लोगों की मौत और 809 लोग घायल हुए थे. साल 2025 में 209 लोगों की मौत और 491 लोग घायल हुए हुए.

इस साल 15 फीसदी ज्यादा बारिश हुए: उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड राज्य में एक जून से 18 अगस्त 2025 तक 973.1 एमएम (मिली मीटर) बारिश हुई है, जो नार्मल बारिश से करीब 15 फीसदी अधिक है.
आंकड़ों के अनुसार, बागेश्वर जिले में सामान्य से करीब 220 फीसदी अधिक बारिश हुई है. वही, चंपावत जिले में सामान्य से करीब 25 फीसदी कम बारिश हुई है. इसी तरह बागेश्वर में 220 फीसदी अधिक बारिश हुई है. चमोली जिले में 76 फीसदी तो हरिद्वार जिले में 58 फीसदी अधिक बारिश हुई है. टिहरी जिले की बात की जाए तो 55 फीसदी अधिक बारिश हुई है. वहीं राजधानी देहरादून में झमाझम बारिश हुई है. यहां इस मॉनसून सीजन में 24 फीसदी अधिक बारिश हुई है. अल्मोड़ा जिले में 20 फीसदी तो 18 फीसदी और उत्तरकाशी सिर्फ 3 फीसदी अधिक बारिश हुई है.

इस जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई: उत्तराखंड के कुछ जिले से ऐसे भी है, जहां 18 अगस्त तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. चंपावत में नार्मल से 25 फीसदी कम तो पौड़ी गढ़वाल में 21 और नैनीताल जिले में 13 फीसदी कम बारिश हुई हैं. इस तरह पिथौरागढ़ 10 फीसदी और रुद्रप्रयाग जिले में 8 फीसदी कम बारिश हुई है.
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