1550 माओवादियों का 19 महीने में सरेंडर, नक्सलियों की टॉप लीडरशिप भी ध्वस्त
बस्तर आई जी सुंदरराज पी ने कहा कि माओवादियों के पास अब ये आखिरी विकल्प बचा है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 21, 2025 at 11:39 AM IST
|Updated : July 21, 2025 at 12:31 PM IST
बस्तर: नक्सलवाद के खिलाफ चल रहा ऑपरेशन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है. नक्सलगढ़ में फोर्स दशकों से काबिज माओादियों को "न्यूट्रलाइज़" करने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रही है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि 31 मार्च 2026 तक माओवाद खत्म कर दिया जाएगा. माओवादियों के खात्मे की डेडलाइन को देखते हुए फोर्स तेजी से अपने ऑपरेशन में जुटी है.
1550 माओवादियों का 19 महीने में सरेंडर: बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने एक बार फिर कहा है कि नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाएं. एंटी नक्सल ऑपरेशन के चलते बड़ी संख्या में माओवादी हथियार डाल रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक 19 महीनों के दौरान करीब 1550 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. सरेंडर करने वाले नक्सली समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर अब हिंसा से तौबा कर चुके हैं.
नक्सलियों को लगे कई तगड़े झटके: बस्तर आईजी ने बताया कि हाल ही में पड़ोसी राज्य तेलंगाना में SZCM कैडर के माओवादियों ने सरेंडर किया था. वहीं सुकमा और नारायणपुर जिले में DVCM रैंक के माओवादियों ने भी सरेंडर किया है. सरेंडर के आंकड़े को देखकर यह साफ है कि अब माओवादी संगठन से लोगों का विश्वास कम ही रहा है. नक्सलियों की सच्चाई आम जनता और आदिवासी जान चुकी है. इनके बहकावे में अब कोई आने वाला नहीं है.
मोर्चा संभाले हैं जवान: बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि बस्तर में जिस तरीके से DRG, STF, बस्तर फाइटर्स, कोबरा, CRPF, ITBP, SSB तमाम सुरक्षाबलों के द्वारा माओवादियों के खिलाफ प्रभावी रूप से कार्य किया जा रहा है. जिसके कारण माओवादी संगठन को बीते दिनों बड़ा झटका लगा.
माओवादी संगठन के जनरल सेक्रेटरी बसवा राजू समेत अनेक सीनियर माओवादियों के शव अलग अलग मुठभेड़ों में बरामद किया गया था. इन सब कारणों से माओवादी संगठन हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं. उनका आत्मसमर्पण किया जा रहा है. उनके पुनर्वास के लिए शासन के नीति के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं की जा रही है. इन सब परिस्थितियों को देखकर आने वाले समय में माओवादियों का खात्मा सुनिश्चित होगा. माओवादियों के पास केवल एक ही विकल्प बचा है कि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल हों: सुंदरराज पी, आईजी, बस्तर रेंज
बस्तर आई जी की नक्सलियों से अपील: बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने एक बार फिर अपील करते हुए माओवादियों से कहा कि वे नक्सल संगठन छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो. और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर शांतिपूर्ण व सामान्य जीवन जी सकें. बस्तर आई जी ने कहा कि बसव राजू के मारे जाने से नक्सलवाद की कमर टूट गई है. बसव राजू के मारे जाने से नक्सली बैकफुट पर हैं. नंबल्ला केशव राव के मारे जाने के बाद नक्सलियों में दहशत का माहौल है.
कौन था बसवा राजू ?: बसव राजू को नंबल्ला केशव राव, कृष्णा, विनय, गंगन्ना, बसवराज, प्रकाश, गगन्ना, विजय, केशव, बीआर, उमेश, राजू, दारापु नरसिम्हा रेड्डी और नरसिम्हा के नाम से भी जाना जाता था. बसवराजू जियान्नापेट, कोटाबोम्माली, श्रीकाकुलम (आंध्रप्रदेश राज्य) का रहने वाला था. सीपीआई माओवादी संगठन में 2018 से महासचिव के पद पर पदस्थ था. साथ ही सेंट्रल कमेटी का भी सदस्य था. बसवा राजू ने वारंगल के इंजीनियर कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई की थी. इस दौरान छात्र संगठन का लीडर भी रहा . बसवराजु NIA के भी दो मामलों में वांटेड था. बसवराज के खिलाफ NIA 2012 और 2019 में दो FIR दर्ज की थी. 2019 वाली घटना में 5 सुरक्षाकर्मियों को आईडी ब्लास्ट के जरिए मारने का आरोप था. वहीं 2010 में घटे ताड़मेटला घटना में बसवा राजू का हाथ था. इसके अलावा देश की सबसे बड़ी राजनैतिक घटना झीरम 25 मई 2013 की घटना में भी बसवा राजू का हाथ था. इसके साथ ही PLGA संगठन के निर्माता भी बसवा राजू को ही कहा जाता है. आईईडी बम बनाकर ब्लास्ट करने में एक्सपर्ट था. बताया जाता है कि 1980 के दशक में बस्तर में पहला आईईडी ब्लास्ट बसवा राजू ने ही किया था.
पिछले कुछ वर्षों में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए शीर्ष माओवादी नेता
21 मई 2025: प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के महासचिव बसवराजू उन 27 माओवादियों में शामिल हैं, जिन्हें इस अभियान के दौरान मार गिराया गया. यह हाल के वर्षों में माओवाद विरोधी सबसे प्रभावशाली सफलताओं में से एक है. लगभग 70 वर्षीय बसव राजू भारत के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक थे, जिनके सिर पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम था.
21 जनवरी 2025: जयराम रेड्डी, जिन्हें चलपति और अप्पा राव के नाम से भी जाना जाता है, एक वरिष्ठ माओवादी नेता थे, जिनके सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था, छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में मारे गए 14 माओवादियों में शामिल थे.
16 जनवरी 2025: (छत्तीसगढ़): तेलंगाना में प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) को बड़ा झटका देते हुए, पार्टी के राज्य समिति सचिव बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर में बीजापुर जिले के जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए. मुलुगु जिले के सम्मक्का सरक्का तड़वई मंडल के कलवापल्ली गाँव के रहने वाले 55 वर्षीय दामोदर तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में मोस्ट वांटेड सूची में थे, उनके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
13 नवंबर 2021: : प्रतिबंधित CPI (माओवादी) संगठन के केंद्रीय समिति के सदस्य मिलिंद तेलतुंबडे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए 26 माओवादियों में शामिल थे। तेलतुंबडे पर 50 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने बताया कि 58 वर्षीय तेलतुंबडे माओवादी संगठन के महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) क्षेत्र के प्रभारी थे। वह पूर्व आईआईटी प्रोफेसर, दलित बुद्धिजीवी और लेखक आनंद तेलतुम्बडे के छोटे भाई भी थे, जिन्हें एल्गर परिषद मामले में जेल भेजा गया है.
24 नवंबर 2016: कुप्पू देव राज उर्फ कुप्पू स्वामी उर्फ रमेश उर्फ रायन्ना उर्फ योगेश उर्फ बालाजी (65), SWRBM, तमिलनाडु और केरल के प्रभारी, SOCs और जो पूरे पार्टी उत्पादन विभाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, मलप्पुरम जिले के नीलांबुर जंगल में मुठभेड़ में मारे गए.
अक्टूबर 2016: मलकानगिरी मुठभेड़, ओडिशा: मुठभेड़ में चार केंद्रीय समिति सदस्य- दया उर्फ गरला रवि, आंध्र ओडिशा छत्तीसगढ़ संभाग समिति सचिव, गणेश, मल्लेश और चलपति मारे गए। इसके अलावा, चलपति उर्फ अप्पा राव, उनकी पत्नी अरुणा और एक अन्य नेता बाकुरी वेंकट रमण मूर्ति भी घटना में मारे गए। रवि के सिर पर 20 लाख रुपये का इनाम था, जबकि पूर्वी डिवीजन के सचिव और चित्तूर जिले के मूल निवासी चलपति के सिर पर भी 20 लाख रुपये का इनाम है.
23 अगस्त 2013: ओडिशा के मलकानगिरी में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में खूंखार नक्सली नेता माधव उर्फ गोल्ला रामुल्लू मारा गया, जिसके सिर पर चार लाख रुपये का इनाम था। माधव ओडिशा का मोस्ट वांटेड नक्सली था। वह चित्रकोंडा जलाशय में 38 सुरक्षाकर्मियों की हत्या, जबरन वसूली और लैंड माइन विस्फोट समेत कई हत्याओं में शामिल था.
24 नवंबर 2011: मल्लोजुला कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी: पोलित ब्यूरो सदस्य किशनजी की पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के बुरीसोल जंगल में मुठभेड़ में मौत हो गई.
02 जुलाई 2010: चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद: आंध्र प्रदेश पुलिस ने पोलित ब्यूरो के सदस्य आजाद को आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के जोगापुर जंगलों में उसके एक ठिकाने पर मुठभेड़ में मार गिराया.
12 मार्च 2010: आंध्र प्रदेश के प्रकाशम और वारंगल जिलों में पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में दो शीर्ष माओवादी नेताओं सखामुरी अप्पा राव और सोलीपेटा कोंडल रेड्डी को मार गिराया गया। पुलिस ने दोनों मुठभेड़ स्थलों से एके-47 राइफलें बरामद कीं। मारे गए दोनों नेता राज्य समिति सदस्य स्तर के हैं. अप्पा राव पर 10 लाख रुपये का इनाम था, जबकि रेड्डी पर 5 लाख रुपये का इनाम था.
02 दिसंबर 2009: आदिलाबाद मुठभेड़: केरामेरी पुलिस स्टेशन की सीमा के अंतर्गत कलेगांव-पिट्टागुडा के पास जंगल में विशेष पार्टी के पुलिसकर्मियों के साथ मुठभेड़ में तीन कैडर माओवादी मारे गए। मारे गए लोगों में से दो की पहचान सीपीआई माओवादी के अदलीबाद जिला समिति सचिव (डीसीएस) माइलरापु अडेलु उर्फ भास्कर नरसान्ना और जिला समिति सदस्य चिप्पाकुर्थी रवि उर्फ सुदर्शन के रूप में हुई है, तीसरे की पहचान नहीं हो सकी है.
24 मई 2009: तड़वई मुठभेड़: दो शीर्ष माओवादी नेता, पटेल सुधाकर रेड्डी उर्फ सूर्यम उर्फ श्रीकांत और कनुगुला वेंकटैया - एक केंद्रीय समिति सदस्य और दूसरा राज्य समिति सदस्य, घने तड़वई वन क्षेत्र में लाववाला गांव के पास गौरप्पा पहाड़ियों पर पुलिस के साथ गोलीबारी में मारे गए.
15 जनवरी 2009: आंध्र प्रदेश: मुठभेड़: पुलिस ने प्रकाशम जिले के पुल्लालचेरुवु मंडल के मुलमपल्ली गांव में एक मुठभेड़ में माओवादी नेता करमथोटा गोविंदा नाइक उर्फ संजीव उर्फ राजू (34) को मार गिराया.
02 अप्रैल 2008: वारंगल: आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ राज्यों में पुलिस द्वारा सबसे अधिक वांछित शीर्ष माओवादी और नक्सली गजेरला सरैया उर्फ आजाद उर्फ भास्कर मुठभेड़ में मारा गया. मुठभेड़ में आजाद की पत्नी भी मारी गई.
01 जुलाई 2007: वारंगल (आंध्र प्रदेश): सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ सदस्य चेट्टीराजा पपैया उर्फ सोमन्ना पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। सोमन्ना उत्तर तेलंगाना विशेष क्षेत्रीय समिति का सचिव सदस्य था और दो दशक से अधिक समय से भूमिगत था.
22 जून 2007: अनंतपुर: शीर्ष माओवादी नेता सांडे राजमौली उर्फ प्रसाद पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में मारा गया.
28 दिसंबर 2006: विशाखापत्तनम: विशाखापत्तनम जिले में नक्सली नेता चंद्रमौली की हत्या। वह लंबे समय से आंध्र-उड़ीसा सीमा पर नक्सली गतिविधियों की कमान संभाल रहा था.
10/11/2006: गोपावरम: आंध्र प्रदेश राज्य सचिवालय सदस्य यालागला अप्पा राव उर्फ ओबुलेसु की गोपावरम वन क्षेत्र में मारा गया.
12/10/2006: संगारेड्डी : जनशक्ति (राजन्ना गुट) राज्य समिति सदस्य और मेडक समिति सचिव मंतुरी नागभूषणम (33) उर्फ संजीव चेगुंटा मंडल के बोनाला गांव के पास पुलिस ने उर्फ सुभाष को गोली मार दी.
15/09/2006: वारंगल: महादेवपुर क्षेत्र के सीपीआई (माओवादी) सचिव अलवाल सरैया उर्फ मधु वारंगल जिले में मारा गया.
13 जुलाई 2006: हैदराबाद: ए माधव रेड्डी और आईपीएस अधिकारी जी. परदेसी नायडू, चौ. उमेश चंद्रा और विधायक चौ. नरसी रेड्डी की हत्या के पीछे का मास्टरमाइंड, सीपीआई (माओवादी) के राज्य समिति सचिव माधव मुठभेड़ में मारा गया.
17 जून 2006: नल्लामाला वन: मट्टम रविकुमार उर्फ श्रीधर उर्फ वरिष्ठ माओवादी नेता अनिल येरागोंडापलेम के पास मारे गए.
07 मार्च 2005: करीमनगर: सीपीआई (एमएल) जनशक्ति नेता रियाज़ की करीमनगर जिले के मुस्ताबाद मंडल के मोहिनीकुंटा गांव के बाहरी इलाके में मुठभेड़ में गोली मारकर हत्या कर दी गई.
02 नवंबर 1999: करीमनगर जिले में पुलिस और पीडब्लूजी दलम के बीच मुठभेड़ में केंद्रीय समिति के तीन सदस्य मारे गए, जिनमें दूसरे नंबर के नेता नल्ला आदि रेड्डी और आंध्र प्रदेश राज्य इकाई के सचिव महेश उर्फ संतोष रेड्डी शामिल थे. इनमें से एक अन्य पीडब्लूजी दलम के उत्तरी तेलंगाना समिति का सचिव सीलम नरेश उर्फ मुरली था. तीनों पीडब्लूजी नेताओं पर 12-12 लाख रुपये का इनाम था.
10 जुलाई 1970 श्रीकाकुलम: वेम्पतापु सत्यनारायण और आदिबतला कैलासा, श्रीकाकुलम विद्रोह के नेता पुलिस मुठभेड़ में मारे गये.

