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पापा से मांगे थे 200 रुपये, मां बोली- 'मत दीजिए'.. बिहार की पहली महिला फिडे मास्टर की दिलचस्प कहानी

10 साल की छोटी बच्ची के शतरंज खेलने के जुनून ने उसे 19 साल की होते-होते बिहार की पहली महिला फिडे मास्टर बना दिया. पढ़ें

Mariam Fatima
मुजफ्फरपुर की मरियम फातिमा की सफलता की कहानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 19, 2025 at 7:46 PM IST

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रिपोर्ट: विवेक कुमार

मुजफ्फरपुर: अगर बचपन में ही बच्चे को पता हो कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है तो बड़ी से बड़ी कठिनाइयों के बावजूद उस मुकाम को हासिल करना आसान हो जाता है. इसका जीता जागता उदाहरण मुजफ्फरपुर की रहने वाली मरियम फातिमा (19) हैं. मरियम बिहार की पहली महिला फिडे मास्टर बन गई हैं. इसके साथ ही उनका रेटिंग नंबर 2100 तक पहुंच गया है. मरियम को 10 साल की उम्र में ही शतरंज खेलने का जुनून सवार था. उस वक्त उस छोटी सी बच्ची को नहीं पता था कि आगे चलकर उसका ये जुनून उसे बड़े मुकाम पर पहुंचा देगा.

बिहार की पहली महिला फिडे मास्टर की दिलचस्प कहानी (ETV Bharat)

पिता से मांगे पैसे तो मां ने किया था मना : मरियम फातिमा के पिता इम्तियाज अहमद को अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व है. खुशी और गर्व से पिता कहते हैं कि फातिमा ने संत जेवियर पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की है. पढ़ाई में वह शुरू से ही काफी अच्छी थी. स्कूल के टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए फातिमा ने एक ₹200 की एंट्री फीस मांगी थी. उस वक्त उसकी मां ने कहा इसे पैसे मत दीजिए बहुत फिजूल खर्च करती है.

"फातिमा को इसकी जानकारी नहीं थी कि 200 रुपये क्यों स्कूल में मांगे जा रहे हैं. अचानक वह मेरे पास आई और बोली कि उसे स्कूल में ₹200 जमा करना है. तब मैंने उसके स्कूल जाकर शिक्षकों से बात की. शिक्षकों ने बताया कि शतरंज टूर्नामेंट हो रहा है और फातिमा उसमें भाग लेना चाहती है, जिसकी फीस ₹200 है. इसके बाद मैंने उसे ₹200 दिए."- इम्तियाज अहमद, मरियाम फातिमा के पिता

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मरियम फातिमा के पिता (ETV Bharat)

कोच अभिषेक और कुमार गौरव ने दी ट्रेनिंग: इम्तियाद अहमद ने बताया कि फातिमा को सबसे पहले कोच अभिषेक सोनू से ट्रेनिंग मिली. जब उसका खेल बेहतर हुआ, तो मैंने उसे लगभग 2 साल तक पटना में रखकर चेस की विशेष ट्रेनिंग दिलवाई. उसके बाद मुजफ्फरपुर में कुमार गौरव सर उसके कोच बने.

बिहार की पहली महिला फिडे मास्टर: मरियम बिहार की पहली महिला खिलाड़ी बनी हैं, जिन्होंने यह गौरव हासिल किया है. मरियम फातिमा मूल रूप से मुजफ्फरपुर के चंदवारा जमीरन गाछी की रहने वाली हैं. हाल ही में उन्होंने स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित बारबेड़ा डिल वैलिस ओपन चेस चैम्पियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने रेटिंग अंकों में बढ़ोतरी की. इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें फिडे की ओर से यह उपलब्धि हासिल हुई है.

अब तक की सफलता: मरियम ने अबतक कई मेडल अपने नाम किया है. इसकी फेहरिस्त काफी लंबी है. 16 साल की उम्र में महिला स्टेट चैंपियन, अंडर-19 स्टेट चैंपियनशिप पर भी कब्जा, दो बार अंडर- 11, तीन बार अंडर-13, पांच बार अंडर- 15, दो बार अंडर- 17, पांच बार अंडर-19 और तीन बार सीनियर राज्य महिला चैंपियन ट्रॉफी मरियम फातिमा ने अपने नाम किया है.

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बिहार की पहली महिला फिडे मास्टर बनीं मरियम फातिमा (ETV Bharat)

फातिमा के फर्स्ट टाइम कोच अभिषेक सोनू ने बताया कि मरियम फातिमा ऐसे परिवार से आती हैं, जहां शतरंज जैसी उपलब्धियों का सपना देखना भी कठिन होता है. इसलिए उनके परिवार के लिए यह उपलब्धि बहुत बड़ी है. जब फातिमा ने खेलना शुरू किया था, उस समय शतरंज को उतनी अहमियत नहीं दी जाती थी, लेकिन आज जो मुकाम उन्होंने हासिल किया है, वह जिले के शतरंज खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल है.

"शुरुआत में जब मैंने फातिमा को ट्रेनिंग देना शुरू किया, तब वह सिर्फ 10 साल की बच्ची थी और खेल के बारे में बहुत कम जानती थी. मैंने अपनी क्षमता के अनुसार उन्हें शुरुआती स्तर की जानकारी दी. बाद में उन्हें मित्र कुमार गौरव सर के पास उच्च स्तरीय ट्रेनिंग के लिए भेजा गया. लगभग तीन साल तक मैं उन्हें घर जाकर रोजाना दो घंटे प्रशिक्षण देता रहा. धीरे-धीरे फातिमा का खेल बेहतर होता गया."- अभिषेक सोनू, मरियम फातिमा के कोच

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मरियम फातिमा के कोच अभिषेक (ETV Bharat)

'रोज 12-13 घंटे प्रैक्टिस': मरियम के दूसरे कोच व खिलाड़ी कुमार गौरव ने बताया कि जब फातिमा पहली बार उनके पास ट्रेनिंग के लिए आई थी, तब उनकी उम्र लगभग 10 साल थी. उस समय उन्हें शतरंज के बेसिक और थ्योरी की ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन कैलकुलेशन की क्षमता अच्छी थी. 2016 से उन्होंने मेरे पास प्रशिक्षण लेना शुरू किया. शुरुआत से ही मरियम अपने खेल को लेकर गंभीर और मेहनती रहीं. वह रोज 12 से 13 घंटे शतरंज को देती थीं.

"फातिमा बहुत सारी किताबें पढ़ती थीं और लगातार अपनी गलतियों को सुधारने की कोशिश करती थीं. अपने उम्र के खिलाड़ियों की तुलना में वह कहीं ज्यादा मेहनत करती थीं. वह नई-नई चीजें सीखने के लिए हमेशा उत्सुक रहती थीं. चाहे वह मूव्स हों, गेम का एनालिसिस हो या गलतियों को कम करने की तकनीक, मरियम पूरा फोकस करती थी. मरियम लगातार तीन से चार घंटे एक ही जगह बैठकर खेल लेती थी."- कुमार गौरव,मरियम के कोच व खिलाड़ी

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कोच कुमार गौरव (ETV Bharat)

पिता ने दिया हर कदम पर बेटी का साथ: शतरंज के प्रति मरियम का लगाव असाधारण था. इसमें उनके पिता का सहयोग सबसे बड़ा रहा, जिन्होंने शुरू से उन्हें प्रोत्साहित किया. बिहार के एक जिले से निकलकर इस स्तर तक पहुंचना आसान नहीं था. उस समय संसाधनों की भारी कमी थी. इंटरनेट की सुविधा भी कम थी. इसके बावजूद मरियम ने संकल्प लिया कि उन्हें शतरंज में उत्कृष्टता हासिल करनी है.

कुमार गौरव ने कहा कि शतरंज खुद एक तरह की पढ़ाई है. इसमें शुरुआती खेल (ओपनिंग), मध्य खेल (मिडिल गेम) और अंतिम खेल (एंड गेम) तीनों पर बराबर पकड़ होना जरूरी है. फातिमा ने कम उम्र में इन बारीकियों को समझ लिया और उसी दिशा में मेहनत जारी रखी.

ऐसे बढ़ती गयी रेटिंग: अब तक मरियम फातिमा 50 से अधिक टूर्नामेंट खेल चुकी हैं. जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब उनकी रेटिंग 1040 थी. उनका पहला नेशनल टूर्नामेंट विजयवाड़ा में हुआ था, जहां उन्होंने 62 रेटिंग अंक की बढ़त हासिल की. 2016 से 2020 तक लगभग 30 टूर्नामेंट खेलने के बाद उन्होंने 1040 से बढ़कर 1700 की रेटिंग परफॉर्मेंस हासिल कर ली थी.

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मिल चुके हैं कई सम्मान (ETV Bharat)

'ग्रैंड मास्टर' में भी इतिहास रचने की तैयारी: वहीं मरियम फातिमा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बिहार चेस एसोसिएशन के अधिकारियों को देती हैं. उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य ग्रैंड मास्टर नॉर्म हासिल करना है. इसके लिए उन्हें 2400 रेटिंग तक पहुंचना होगा. मरियम का कहना है कि अभी बिहार से कोई भी ग्रैंड मास्टर नहीं है और वह चाहती हैं कि इस कमी को पूरा करें. इंटरनेशनल मास्टर बनने के बाद मरियम बेहद उत्साहित नजर आईं.

"मेरी इस उपलब्धि से राज्य के अन्य युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी. मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में बिहार शतरंज के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएगा."- मरियम फातिमा, बिहार की पहली महिला फिडे मास्टर

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फातिमा करती हैं रोज 12-13 घंटे प्रैक्टिस (ETV Bharat)

WFM खिताब का महत्व: वूमन फिडे मास्टर खिताब काअंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल कौशल की पहचान करना है. फिडे रेटिंग सीमा (2100+) प्राप्त करना जरूरी है. फिडे द्वारा मान्य प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन का भी प्रतीक है. वूमन इंटरनेशनल मास्टर (WIM) और वूमन ग्रैंडमास्टर (WGM) से नीचे का स्तर का यह खिताब है.

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